आत्मसंतुष्टि आपको जितेंद्रिय बना देती है-कृष्णचंद्र
Mathura News - केशव धाम में भागवताचार्य कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुरजी के सान्निध्य में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ का रविवार को समापन हुआ। उन्होंने सुदामा चरित्र के माध्यम से आत्मसंतोष और जितेंद्रियता के महत्व को बताया। इस अवसर पर कई प्रमुख व्यक्तियों की उपस्थिति रही और प्रसाद वितरण के साथ यज्ञ का समापन हुआ।

केशव धाम प्रबंध समिति के तत्वावधान में केशव धाम में भागवताचार्य कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुरजी के पावन सान्निध्य में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ का रविवार को मंगलय पूर्ण विश्राम भी हो गया। अंतिम दिवस सुदामा चरित्र का श्रवण करते हुए व्यासपीठ से कृष्णचंद्र शास्त्री ठाकुरजी ने कहा कि विप्र सुदामा महाराज दरिद्र नहीं अपितु आत्मसंतुष्ट अथवा जितेंद्रिय ब्राह्मण भे। भागवत जैसा ग्रंथ एक दरिद्र को प्रसन्नात्मा जितेंद्रिय शब्द से कभी भी अलंकृत नहीं कर सकता है। सुदामा पेट के लिए नहीं अपितु आत्मा के लिए अथवा तो उस परमात्मा के लिए ही अपना जीवन जीते थे। उन्होंने बताया कि बहुत ऐश्वर्य भी आपको जितेंद्रिय नहीं बनाता अपितु आपकी आपकी आत्मसंतुष्टि आपको जरूर जितेंद्रिय बना देती है।
जो जितेंद्रिय बन जाता है, वही परम ऐश्वर्यवान भी बन जाता है। तत्पश्चात शुकदेव स्वरूप व्यास भगवान के पूजन पश्चात, विप्र देवों के पूजन एवं भागवत भगवान की भव्य आरती पश्चात प्रसाद वितरण के साथ इस सप्ताह ज्ञान यज्ञ अनुष्ठान का मंगलमय पूर्ण विश्राम हुआ। इस अवसर पर महामंडलेश्वर डा. सत्यानंद सरस्वती, विहिप के अंतर्राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश कुमार, जीएलए विवि कुलाधिपति नारायणदास अग्रवाल, रामकिशन अग्रवाल, प्रभास्कर राय, सुधा राय, अगम गौतम, ललित कुमार, सतीश अग्रवाल, अमित जैन, राजा भोज, कमल किशोर वार्ष्णेय, मुकेश खंडेलवाल, नृत्यगोपाल दुबे, नगर प्रचारक कृष्ण कुमार, संजय जादौन, योगेंद्र कुमार, महेश किलानोत, कमलेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
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