
बोले मथुरा-ड्यूटी मजबूरी है पर सुरक्षा भी जरूरी है
Mathura News - यमुना एक्सप्रेसवे पर 16 दिसंबर को घने कोहरे में हुए हादसे ने लोगों को दहशत में डाल दिया है। रोडवेज के चालक कोहरे में गाड़ियाँ चलाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। पीली लाइट की कमी के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है। अधिकारियों ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नए आदेश जारी किए हैं।
कोहरे में वाहनों का संचालन बड़ा मुश्किल होता है। जब सामने सफेद दीवार खड़ी हो तो वाहन चलाना न केवल मुश्किल होता है, बल्कि खतरनाक भी होता है। यमुना एक्सप्रेसवे पर 16 दिसंबर को हुए हादसे ने लोगों को दहला दिया है। विशेष रूप से रोडवेज के चालक और परिचालक भय में हैं, लेकिन मजबूरी है क्योंकि ड्यूटी पर जाना ही है और गाड़ियों को चलाना भी है। रोडवेज कर्मियों ने कहा कि कोहरे में पीली लाइट लगना जरूरी है, लेकिन अधिकांश बसों में पीली लाइट नहीं है। गौरतलब है कि इस हादसे में रोडवेज की एक बस भी जल गई।
गयी और उसका एक चालक लापता है। उसके परिजनों ने डीएनए सैंपल दिये हैं। इस बस में कुछ लोगों की मौत भी हुई थी। यमुना एक्सप्रेस वे पर हुई घटना के बाद उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अधिकारी हरकत में आए और शीतकाल मौसम में निगम बसों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के सम्बन्ध लम्बा चौड़ा आदेश रोडवेज के सभी मंडल के आरएम व डिपो के एआरएम को भेजे हैं। जनपद के अधिकांश मार्गों पर कोहरा पड़ना प्रारम्भ हो चुका है, कोहरे के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की संभावनाए बढ़ गई हैं। इस मौसम में रोडवेज बसों को चलाने में चालक व परिचालकों को कितनी कठिनाई हो रही हैं। चालक परिचालकों का कहना है कि कोहरे और धुंध के दौरान मार्गों पर सफेद दीवार सी खड़ी हो जाती है। चाहे चालक कितनी भी बस को धीमी चलाए, इसके बावजूद दुघर्टना का डर हमेशा बना रहता है। बसों में पीली लाइटों की कोहरे के दौरान सफल रहती हैं। ऐसे मौसम में बस संचालन बड़ा कठिन काम है लेकिन परिवार के भरण पोषण के लिए बसें चलाना जरूरी है। बस चलाते समय बरतते हैं पूरी सावधानी:रोडवेज के चालकों का कहना है कि वे कोहरे के दौरान पूरी तरह से सावधानी बरतते हैं। अधिकारियों के निर्देशानुसार बसों का संचालन करते हैं। एक्सप्रेस वे हो या अन्य मार्ग जहां भी कोहरा अधिक रहता है घने कोहरे में बस एवं यात्रियों की सुरक्षा के लिये धीमी गति से बस का संचालन करने और अत्यधिक कोहरे में विजविलटी बहुत खराब होने पर बस को किसी सुरक्षित स्थान पर रोक कर विजविलटी ठीक होने पर ही आगे गन्तव्य के लिये बस संचालन कर रहे हैं। कोहरे की स्थिति में चालक/परिचालक पर बस की गति बढ़ाने के लिये यात्री दबाव डालते हैं तो वे यात्रियों से अनुरोध करते हैं कि यह दबाव नहीं बनाएं। रात्रि में कोहरे के दौरान बस चलाना कठिन कार्य हैं। रोजी रोटी कमाने के लिए वे बसों को चलाते हैं। यदि वे किलोमीटर पूरा नहीं करेंगे तो उनको मानदेय नहीं मिलेगा। कोहरे को चीरने वाली लाइटें बसों में लग जाएं तो बहुत अच्छा रहेगा। - खेम सिंह कोहरा पड़ना प्रारंभ हो गया है, रोडवेज बसों में अभी भी फॉग व पीली लाइटें नहीं लगी हैं। जो लाइटें बसों में लगी हैं वह कोहरे के दौरान काम नहीं करती हैं। घने कोहरे में आगे कुछ नहीं दिखाई देता है। - प्रवीन कुमार आशर की बसों में कोहरे के लिए सभी लाइटें लगी हुई हैं, क्योंकि ये नई बसें आई हैं। यदि कोई लाइट खराब होती है तो उसको बदल दिया जाता है। बिना लाइट के बदले उसको मार्ग पर संचालन के लिए नहीं भेजा जाता है। - अक्षत कुमार, फोरमैन कोहरे के दौरान बसों की स्पीड 20 से 30 किमी प्रति घंट रहती है। जीरो विजीबिलिटी पर बसों के आगे सफेद दीवार बन जाती हैं, उसके अलावा कुछ नहीं दिखाई देता है। इस दौरान आम लाइटें काम ही नहीं करती हैं। - सतीश कुमार कोहरे में अधिकारियों के निर्देशानुसार बस को रास्ते में सुरक्षित जगह खड़ा करते हैं तो यात्री हल्ला मचाते हैं। जब उनको समस्या और दुघर्टना के बारे में समझाते हैं तो वे शांत हो जाते हैं। कोहरा छटने पर बस को आगे बढ़ाते हैं। - गजराज सिंह उनकी रोजी रोटी बस का संचालन करना है। यदि वे बस को नहीं चलाएंगे तो उनको वेतन नहीं मिलेगा। जहां कोहरा अधिक दिखाई देता है वे बस को साइड में खड़ा कर देते हैं। यात्रियों की जान के साथ जोखिम नहीं कर सकते हैं। - टीकाराम

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