धनुष यज्ञ लीला में हुआ राम-सीता का विवाह
श्रीरामायण प्रचारिणी समिति की गौरांग लीला में धनुष यज्ञ लीला का भावपूर्ण मंचन हुआ। साध्वी देवी माहेश्वरी ने नामजप का महत्व बताया। राम-लक्ष्मण का मिथिला आगमन, सीता-राम मिलन, और धनुष भंग की घटनाओं का सुंदर प्रदर्शन किया गया। संचालन लछमन प्रसाद यादव ने किया।

श्रीरामायण प्रचारिणी समिति की गौरांग लीला में धनुष यज्ञ लीला का भावपूर्ण मंचन हुआ। वहीं सुबह लीला में चैतन्य महाप्रभु के ब्रज दर्शन लीला का मंचन हुआ। साध्वी देवी माहेश्वरी ने कहा कि श्रीजी के नामजप से ही सबका कल्याण संभव है। व्यास कृष्णमुरारी ने गुरु विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण के मिथिला आगमन, वाटिका में सीता-राम मिलन, गौरी पूजन व सीता को मनोवांछित वर का आशीर्वाद मिलने का सुंदर मंचन किया। यज्ञ में राजा-महाराजा एवं लंकेश रावण का आगमन भी दिखाया। धनुष न टूटने पर राजा जनक के विलाप से लक्ष्मण के क्रोधित हुए वहीं श्रीराम द्वारा धनुष भंग कर सीता स्वयंवर पूर्ण किया।
सीता ने उन्हें वरमाला पहनाई। धनुष भंग से क्रोधित महर्षि परशुराम के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर राम द्वारा नारायण स्वरूप सिद्ध करने का प्रसंग भी प्रस्तुत किया। संचालन लछमन प्रसाद यादव ने किया। इसमे बृजगोपाल अग्रवाल, कल्याणदास बृजवासी, महेशचंद्र कसेरे, राजेंद्रप्रसाद अग्रवाल, माधवशरण अग्रवाल ने आरती की।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


