स्मार्ट मीटर बने आफत, उपभोक्ता परेशान
Mathura News - -विद्युत कनेक्शन कटने से पहले उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रही सही सूचना -विद्युत कनेक्शन कटने से पहले उपभोक्ताओं को नहीं मिल पा रही सही सूचना -स्मार्ट

भले ही विद्युत विभाग के नए प्रीपेड मीटर का नाम स्मार्ट मीटर है पर उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक नहीं है। यह प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ी दुविधा बन गया है। न माइनस बिलिंग की कोई सूचना मिलती है और न ही कोई मैसेज प्राप्त होता है। केवल स्मार्ट मीटर के काम के नाम कनेक्शन डिसकनेक्ट कर दिया जाता है। उपभोक्ता समझ ही नहीं पाते हैं कि क्या हुआ? विद्युत आपूर्ति कैसे बंद हो गई? कर्मचारियों से बात करने का प्रयास करो तो रटा हुआ जवाब मिलता है कि बिल जमा करो तब आपूर्ति स्वतः सुचारू हो जाएगी। शनिवार को कस्बा सौंख में स्मार्ट मीटर की चाल ने ऐसा चाबुक चलाया कि उपभोक्ता कराह उठे।
सैंकड़ों की संख्या में विद्युत संयोजन बिना किसी सूचना के विच्छेदित कर दिए गए। पहले तो उपभोक्ताओं को कुछ समझ ही नहीं आया। तकनीकी खराबी लगी तो टेक्नीशियन से संपर्क किया गया। बाद में पता चला कि यह विभागीय स्मार्ट मीटर की कारगुजारी है। मीटर ने बकाया की संगणना की और काट दिया कनेक्शन। स्मार्ट मीटर की नजर में उपभोक्ता की वैल्यू शून्य है। स्मार्ट मीटर के कनेक्शन विच्छेदन के इस चाबुक से वह उपभोक्ता ज्यादा आहत हुए हैं जो हर माह नियमानुसार बिल भरते आए हैं। शनिवार को कस्बा स्थित विभागीय काउंटर पर उपभोक्ता कर्मचारियों से उलझते भी दिखे। कर्मचारी भी जद्दोजहद कर उपभोक्ताओं को समझाने में लगे रहे। उपभोक्ता उस समय लाचार दिखाई दिए जब बिल भरने के बाद भी घंटों तक बिल अपडेट नहीं हुआ। स्थानीय जेई भी कुछ संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।इस बारे में उपभोक्ता पंकज ने बताया कि कनेक्शन कटने से पहले कोई विभागीय सूचना या मैसेज प्राप्त नहीं हुआ। सुभाष अग्रवाल का कहना है कि मीटर भले ही स्मार्ट हो पर कनेक्शन कटने से पहले उपभोक्ता को सूचना नहीं मिल रही है जो कि जरूर मिलनी चाहिए। जब इसको लेकर एसडीओ गोवर्धन से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।--उपभोक्ता विभागीय एप से अनजानमथुरा। विद्युत विभाग अपने ढंग से उपभोक्ताओं को दौड़ा रहा है। मीटर स्मार्ट लगा दिए गए हैं, लेकिन उपभोक्ता विभागीय सूचना प्राप्त करने वाले एप से अभी अनजान हैं। बिल भरने जाते समय सूचना न मिलने का मुद्दा उठाया जाता है तो विभागीय कर्मचारी एप के बारे में जानकारी देने लगते हैं। इस बारे में सुभाष चंद ने बताया कि उनके पास तो स्मार्ट फोन ही नहीं है। वह कैसे एप डाउनलोड करें।--
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