परशुराम जन्मोत्सव में दिखा भक्ति और सेवा का संगम
धर्मनगरी में भगवान परशुराम जन्मोत्सव का दूसरा दिन श्रद्धा, सेवा और उत्साह के साथ मनाया गया। विशाल सामूहिक भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पंडित आशीष गौतम ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर प्रकाश डाला और ऐसे धार्मिक आयोजनों की महत्ता बताई।

धर्मनगरी में श्रीपरशुराम शोभायात्रा समिति के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय भगवान परशुराम जन्मोत्सव का दूसरा दिन रविवार को श्रद्धा, सेवा और उत्साह के साथ मनाया गया। देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं के लिए विशाल सामूहिक भंडारा एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। भंडारे में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। पूरे परिसर में भक्तिमय माहौल बना रहा और भगवान परशुराम की जय के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। समिति के संस्थापक पंडित आशीष गौतम चिंटू ने भगवान परशुराम के जीवन, उनके आदर्शों और धर्म रक्षा के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम केवल शक्ति के प्रतीक ही नहीं, बल्कि न्याय, संयम और सत्य के मार्गदर्शक भी हैं। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही समाज में नैतिक मूल्यों की स्थापना की जा सकती है। देवेंद्र धमीजा और राघव धमीजा ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनों से समाज में एकता, भाईचारा और सेवा की भावना मजबूत होती है। चंद्र नारायण शास्त्री ने कहा कि समिति द्वारा हर वर्ष इस तरह के भव्य आयोजन कर समाज को जोड़ने का प्रयास किया जाता है। पंडित अमित गौतम एडवोकेट में कहा कि भूखे को अन्न और प्यासे को पानी पिलाना हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता रही है। अपने आराध्य भगवानों के पर्व उत्सव पर पीड़ित मानवता की सेवा करना ही सच्ची प्रभु आराधना है।इस अवसर पर पंडित रविकांत सिद्ध, पार्थ कृष्ण गौतम, चेतन्य कृष्ण शर्मा, मुकेश कृष्ण शर्मा ,गोपाल शर्मा , दुष्यंत दीक्षित, कौस्तुभ गौतम, सूरज शर्मा, हिमांशु शर्मा, रियांश गौड़ आदि उपस्थित थे।
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


