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पेट के कीड़े मारने की दवा खाने से बच्ची की तबीयत बिगड़ी

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गांव शेरनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में पेट के कीड़े मारने की दवा खाने से बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। मामला 29 अगस्त का है। इनमें से एक बच्ची की दशा गंभीर है। उसे केडी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

शहीद हेमराज के गांव शेरनगर में एक प्राथमिक विद्यालय है। 29 अगस्त को विद्यालय स्टॉफ ने 54 बच्चों को छाता सीएचसी से आयी पेट के कीड़े मारने की दवा दी थी। दवा लेने के बाद करीब आधा दर्जन बच्चों को उल्टी की शिकायत हुई और उनके शरीर पर सूजन आने लगी। जिससे विद्यालय प्रशासन एवं ग्रामीणों मे हड़कंप मच गया। विद्यालय स्टॉफ एवं बीमार हुए बच्चों के परिजनों ने फौरन बच्चों को स्थानीय हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां कुछ दिन चले उपचार के बाद शेष सभी बच्चों को आराम हो जाने के बाद छुट्टी दे दी गयी, लेकिन गांव निवासी बच्चू सिंह की 6 वर्षीय पुत्री नेहा की तबीयत बिगड़ती चली गयी। उसकी तबीयत में कोई सुधार न होने के कारण विद्यालय स्टॉफ और परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां तीन दिनों तक चले उपचार के बाद भी छात्रा को कोई आराम नहीं मिला तो चिकित्सकों ने परिजनों को छात्रा को किसी हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। इसके बाद परिजन अपनी पुत्री को केडी हॉस्पीटल लेकर पहुंचे।

एबीएसए ने शिक्षकों के सिर फोड़ी लापरवाही की हांडी

मामले में एबीएसए संजय सिंह ने बताया कि गांव शेरनगर के प्राथमिक विद्यालय में गत माह 29 अगस्त को विद्यालय के स्टॉफ द्वारा 54 बच्चों को कीड़े मारने की गोली खिलायी गयी थीं। उन्होंने बताया कि गोली सीएचसी छाता से विद्यालय स्टॉफ को मुहैया करायी गयी थी। गोली खिलाने से पूर्व विद्यालय स्टॉफ को बच्चों को गोली खिलाने की ट्रेनिंग ब्लॉक कार्यालय पर बुलाकर वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा दी गई थी। जिसमें सभी सावाधानियों के बारे में भली प्रकार उनको बताया गया था।

साफ पानी से देनी होती है कीड़ा मारने की दवा

कोसी सीएचसी प्रभारी डॉ. गिरेन्द्र पाल सिंह का कहना है कि पेट के कीड़े मारने की दवा 1 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को 6-6 माह के अंतराल पर 1-1 गोली दी जाती है। उन्होंने बताया कि दवा को सावधानी पूर्वक दिया जाता है। दवा के लिए हाथों के साफ होने के साथ-साथ पानी भी बिल्कुल साफ होना चाहिए। उन्होंने बताया कि वैसे तो दवा रिऐक्शन कभी नहीं करती, अगर रेयर केस में दवा रिऐक्शन करती भी है तो बच्चों को केवल उल्टी होने जैसे शिकायत हो सकती है।

तीन बच्चों में अकेली है नेहा

इस मामले में जब पीड़ित छात्रा नेहा के पिता बच्चूसिंह से बात की गई तो वे कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं थे। उनका कहना था कि वह फिलहाल पिछले 29 अगस्त से अपनी सबसे छोटी और लाडली पुत्री नेहा के दु:ख से परेशान हैं। उनके दो पुत्रों के बाद सिर्फ एक ही उनकी दुलारी पुत्री नेहा है, जो जिंदगी और मौत से जूझ रही है।

बच्ची की तबीयत दवा खाने से नहीं बिगड़ी। बच्ची को गुर्दे की परेशानी पहले से ही थी।

-डॉ. अमन कुमार, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला चिकित्सालय

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