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जवाहरबाग कांड: 1 साल: 27 की मौतों को अभी भी खुलासे का इंतजार

जवाहरबाग को यूं तो लोग कई साल पहले से जानते थे, लेकिन दो जून 2016 को जो कुछ हुआ, वह इतिहास बन गया। गाजीपुर जिले के रामृवृक्ष यादव व उसके गुर्गों ने एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव की हत्या की तो जवाब में पुलिस ने भी कर्रवाई की। फलत: करीब 25 अवैध कब्जाधारियों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। बाद में दो और कब्जाधारी मर गए थे। आज भी केस जांच के दायरे में है। 14 जनवरी 2014 को मध्य प्रदेश के सागर के गांव मरदह, गाजीपुर निवासी रामवृक्ष यादव दिल्ली तक की स्वाधीन भारत जनजागरण यात्रा प्रारंभ की। 14 जून को वह मथुरा पहुंचा और बाबा जयगुरुदेव पेट्रोल पंप पर मारपीट के बाद 15 मार्च को विधिक सत्याग्रह के नाम पर रामवृक्ष और उसके साथी जवाहरबाग में जा घुसे। इनकी मांग के अनुरूप 9 मई 2014 को इन लोगों को बाबा जयगुरुदेव का मृत्यु प्रमाणपत्र भी दे दिया गया, लेकिन फिर भी ये नहीं गए। धीरे-धीरे जब इन्होंने अपनी संख्या बढ़ानी प्रारंभ कर दी और जवाहरबाग की उद्यान संपदा को नुकसान पहुंचाना प्रारंभ कर दिया, तब जिला उद्यान अधिकारी मुकेश कुमार की ओर से इन्हें पहला नोटिस दिया गया। 2 फरवरी 2016 को तत्कालीन मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने मुख्य सचिव आलोक रंजन को पत्र लिखकर जवाहरबाग को खाली करने को फोर्स की मांग की थी। प्रशासन ने भी 16 बार शासन को पत्र लिखे थे। लेकिन शासन ने इन मांगों को ठंडे बस्ते में डाले रखा। आलम यह था कि 20 मई 2015 को हाईकोर्ट ने जवाहरबाग को खाली कराने का आदेश दिया, लेकिन जिला प्रशासन इस आदेश को तामील इसी लिए नहीं करा पाया क्योंकि उसे पर्याप्त फोर्स नहीं मिला था। इससे रामवृक्ष व उसके साथियों का दुस्साहस बढ़ गया था। 2016 तक हालत यह थी कि रामवृक्ष के सामने पड़ने से अधिकारी भी कतराते थे। लोगों का मानना था कि रामवृक्ष की बढ़ती ताकत का असली कारण राजनैतिक संरक्षण है। अंतत: 2 जून 2016 को रिहर्सल कर रही पुलिस टीम पर अवैध कब्जाधारियों ने हमला कर दिया व एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी व एसओ फरह संतोष यादव की नृशंस हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस का गुस्सा फूटा और अतिक्रमणकारियों को जवाहरबाग से बाहर खदेड़ा। इस पुलिस कार्रवाई में करीब 25 कब्जाधारियों की मौत हो गई थी। हालांकि बाद में दो और कब्जाधारियों की मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने करीब 300 लोगों को हिरासत में लिया था। इनमें से चंदन बोस, वीरेश यादव व राकेश बाबू गुप्ता समेत 78 लोग अभी भी जेल में हैं। जवाहरबाग कांड की गूंज देश के अलावा विदेशों तक पहुंची थी। भीड़ को रामवृक्ष ने बनाया था रक्षा कवच धरना-प्रदर्शन के बहाने एक बार जवाहरबाग पहुंचने के बाद ही रामवृक्ष की नीयत में खोट आ गया था। दरअसल जब अनर्गल और बकवास मांगों के सहारे रामवृक्ष को कई माह जवाहरबाग में हो गए, तब उसने जवाहरबाग को कब्जाने की योजना बना ली। इसी योजना के तहत धीरे-धीरे उसने बाबा जयगुरुदेव के अनुयायियों को बरगला कर जवाहरबाग में एकट्ठा कर लिया। दरअसल रामवृक्ष यादव जनतंत्र में भीड़तंत्र की ताकत को बहुत अच्छी तरह जानता था। उसे पता था, कि जब तक उसके साथ लोगों की भीड़ है, तब तक कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। रामवृक्ष की मौत का रहस्य बरकरार रामवृक्ष यादव ने जवाहरबाग में जड़ें जमाने के लिए बाबा जयगुरुदेव की मृत्यु पर ऐसा सवाल उठाया कि ठीक वैसा ही सवाल उसकी मौत पर भी खड़ा हो गया। अभी तक रामवृक्ष की मौत की पूरी सच्चाई सामने आने का लोग इंतजार कर रहे हैं। यहां तक कि पुलिस को भी रामवृक्ष यादव की मौत साबित करने को उसके बेटों की डीएनए जांच कराई है। फिलहाल, हैदराबाद स्थित फोरेंसिक लैब से जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। पहले न्यायिक आयोग, अब सीबीआई की जांच जवाहरबाग कांड की जांच को राज्य सरकार ने पहले न्यायिक जांच आयोग गठित किया था। इसके अध्यक्ष पूर्व जस्टिस इम्तियाज मुर्तजा और सचिव पूर्व जिला जज प्रमोद कुमार गोयल थे। न्यायिक जांच आयोग ने करीब 371 लोगों के बयान लिए थे। हालांकि इस बीच विगत 1 मार्च को जांच सीबीआई को सौंप दी गई और न्यायिक आयोग भंग कर दिया गया। जवाहरबाग कांड की जांच में सीबीआई की दो टीमें गठित की गई हैं। एक टीम शासनस्तरीय तो दूसरी टीम जिला स्तर पर की गई कार्रवाइयों की जांच कर रही है। इस कड़ी में सीबीआई की टीम ने प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी जवाहरबाग से संबंधित प्रकाशित व प्रसारित खबरों की जानकारी मांगी है। 11 बार हुई थी अधिकारियों व कब्जाधारियों में वार्ता जवाहरबाग के कब्जाधारियों को जिला प्रशासन एवं पुलिस ने समझाने का काफी प्रयास किया था। दोनों पक्षों के बीच कुल 11 बार वार्ता हुई थी, लेकिन कोई सफलतता नहीं मिल सकी। 27 मई और 11 जून 2015 को अतिक्रमणकारियों के साथ वार्ता हुई तो 8, 15 और 23 जनवरी 2016 को भी उन्हें समझाने की कोशिशें हुईं, लेकिन प्रयास बेकार गए। जब भी अधिकारी जवाहरबाग पहुंचते, रामवृक्ष और उसके साथी हावी होकर उन्हें धमकाने लगते। सवाल: कैसे जवाहरबाग बना था रामवृक्ष की पनाहगाह रामवृक्ष यादव को जवाहरबाग कैसे सुरक्षित पनाहगाह बन गया और किन सफेदपोशों ने उसे सपोर्ट किया, यह लोगों को कौतूहल और सीबीआई को जांच का प्रमुख बिंदु रह सकता है। रामवृक्ष को ढाई साल जवाहरबाग बिल्कुल घर-आंगन जैसा बन गया। यहां तक कि जवाहरबाग में उसका ही सिक्का चलता था। अंदरखाने रामवृक्ष को शासन-सत्ता का हाथ होने की बात चलती रहती थी। इसमें कितनी सच्चाई है, यह तो सीबीआई जांच में ही पता चल सकेगा। शहीदों को न्याय दिलाने को चली मुहिम जवाहरबाग कांड में शहीद हुए एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव की हत्या के असली गुनाहगारों को सजा दिलाने की मांग को बाकायदा जुलूस व रैली आदि हुए थे। शहीद स्व. मुकुल द्विवेदी की पत्नी अर्चना द्विवेदी ने सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके अलावा कुल 13 याचिकाएं और इसी मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की गई थीं। फेसबुक पेज ‘जस्टिस फॉर मुकुल से भी शहीदों को न्याय दिलाने को मुहिम चली थी। फिर संवरने लगा है जवाहरबाग का स्वरूप 2 जून को आग की लपटों में बुरी तरह झुलसकर अपनी खूबसूरती खो देने वाले जवाहरबाग की अब स्थिति बेहतर बनाई जा रही है। अब जवाहरबाग में पुराने जले हुए पेड़ों के स्थान पर नए पौधे लगाए जा रहे हैं। यही कारण है कि फिलहाल कई नए पौधे आने वाले समय में जवाहरबाग को फिर से नया नवेला रूप दिए जाने की कार्रवाई चल रही है। जिला उद्यान अधिकारी मुकेश कुमार के मुताबिक इस प्रकार जवाहरबाग का विकास किया जाएगा कि उसे लोग पिकनिक स्पॉट के रूप में देखें। अभी तक नहीं बना शहीदों का स्मारक पूर्व में शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव का स्मारक बनाए जाने की स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग की थी। इसके लिए एमवीडीए ने स्मारक का डिजाइन भी बनवाया था। चर्चा यहां तक थी कि मुकुल द्विवेदी और संतोष यादव का स्मारक जवाहरबाग में उसी जगह बनवाया जाएगा, जहां उनकी शहादत हुई थी। बाद में शहीदों के स्मारक का निर्माण ठंडे बस्ते में चला गया। कार्रवाई के लिए शासन को कब-कब लिखे गए पत्र 15 अगस्त 2014 19 जून 2014 01 नवंबर 2014 11 फरवरी 2015 30 मई 2015 18 सितंबर 2015 29 सितंबर 2015 06 अक्टूबर 2015 23 अक्टूबर 2015 18 नवंबर 2015 21 नवंबर 2015 11 दिसंबर 2015 20 फरवरी 2016 04 अप्रैल 2016 11 अप्रैल 2016 18 अप्रैल 2016

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  • Web Title:1 year: 29 deaths still awaiting revelations