ईपीएफओ की पेंशन का लाभ न ले पाने वाले लोगों को बड़ी राहत, इस शहर में घर-घर शुरू हुई मुहिम
ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के साथ हुए करार के तहत कानपुर रीजन में एक डाकिये पर ऐसे 6 पेंशनरों को ढूंढने की जिम्मेदारी है। अगर वह जीवित हैं तो उनका डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाकर देना है, जिससे उनकी पेंशन उनके खातों में जा सके। कानपुर रीजन में कुल 87,292 पीएफ पेंशनर हैं।

Pension News : जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) जमा न होने की वजह से ईपीएफओ की पेंशन का लाभ न ले पाने वाले कानपुर रीजन के 21 हजार लोगों के लिए राहत की राह खुली है। डाक विभाग से समझौते के बाद एक फोन कॉल पर घर बैठे डीएलसी होने से अब रुकी पेंशन मिलने लगी है। इसमें तमाम लोग ऐसे हैं, जिनकी मृत्यु के बाद डीएलसी जमा नहीं थी। विभाग को इसकी जानकारी न होने से मृतक आश्रितों (पत्नी और 25 साल की उम्र तक दो बच्चों) को भी पेंशन नहीं मिल पा रही थी लेकिन अब घर-घर डीएलसी मुहिम से उन्हें भी पेंशन देने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जल्द ही आश्रितों के खाते में ईपीएफओ पेंशन भेजने लगेगा।
वहीं कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से पेंशन लेने वाले करीब नौ हजार पेंशनर्स ऐसे हैं, जिनके जीवित या मृत होने के सबूत नहीं मिल पा रहे हैं। ये ऐसे पेंशनर्स हैं, जिन्होंने पांच साल या इससे अधिक समय से पेंशन नहीं ली है। ईपीएफओ ने इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) के साथ हुए करार के तहत कानपुर रीजन में एक डाकिये पर ऐसे छह पेंशनरों को ढूंढने की जिम्मेदारी है और अगर वह जीवित हैं तो उनका डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (डीएलसी) बनाकर देना है, जिससे उनकी पेंशन उनके खातों में जा सके। कानपुर रीजन में कुल 87,292 पीएफ पेंशनर हैं। इनमें 21,374 पेंशनर्स की डीएलसी जमा न होने से पेंशन रुकी है, जबकि पांच साल से अधिक समय से पेंशन न लेने वाले कानपुर परिक्षेत्र के 9193 पेंशनर हैं।
केस-1
नौबस्ता के राजीव कुमार की मृत्यु दो वर्ष पहले हो चुकी है। डेढ़ साल से उनकी पेंशन डीएलसी जमा न होने से नहीं मिली। उनकी पत्नी को भी विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिला। डाक विभाग की मदद से डीएलसी की जानकारी मिलने पर उन्होंने टोलफ्री नंबर 033-22029000 पर कॉल किया। डीएलसी हो चुकी है और उन्हें व उनके दो बच्चों को पेंशन देने की प्रकिया शुरू की जा रही है।
केस-2
रूरा के मनीष कुमार की पेंशन तीन साल से नहीं मिली। उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं थी कि हर वर्ष जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होता है। अब उन्होंने जीवन प्रमाण पत्र जमा कराया है। ईपीएफओ से उन्हें बताया गया है कि अगले माह से उनके खाते में पेंशन आएगी।
पेंशनर्स की मृत्यु बाद परिवार को वित्तीय सहायता
ईपीएफओ की तरफ से कर्मचारी के रिटायरमेंट के बाद उसे जीवनभर पेंशन मिलती है। मृत्यु के बाद परिवार को वित्तीय सहायता दी जाती है। शारीरिक विषमता में भी पेंशन का अधिकार है। कर्मचारी पेंशन योजना-1995 (ईपीएस-95) उन कर्मचारियों को मिलती है, जिनकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता 15 हजार रुपये या उससे कम है। इसके लिए कम से कम 10 साल की सेवा जरूरी होती है। 58 साल की उम्र पूरी होने के बाद पेंशन का दावा किया जा सकता है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रितों को मासिक पेंशन दी जाती है। इसमें पत्नी या पति को विधवा/विधुर पेंशन का लाभ मिलता है। न्यूनतम पेंशन एक हजार रुपये प्रतिमाह निर्धारित है।
इस फॉर्मूले से जानें कितनी मिलेगी पेंशन
पेंशन योग्य वेतन और पेंशन योग्य सेवा को गुणा करने के बाद 70 से भाग देने पर जो अमाउंट आता है, वही मासिक पेंशन होती है। मसलन अगर किसी की पेंशन योग्य सैलरी ₹15,000 और सेवा 20 साल है, तो अनुमानित पेंशन करीब ₹4,285 प्रतिमाह हो सकती है।
पहल
-घर-घर डीएलसी मुहिम में मृत पेंशनरों के आश्रितों को मिलेगी पेंशन
-अब डाकिए के माध्यम से पेंशनर्स के घर-घर पहुंच रहा ईपीएफओ
-कानपुर नौ हजार से अधिक ने पांच साल से नहीं जमा किया है डीएलसी
-मृतक आश्रित विधवा और दो बच्चों को 25 साल तक मिलती पेंशन
क्या बोले अधिकारी
कानपुर के क्षेत्रीय भविष्य निधि के आयुक्त प्रथम शाहिद इकबाल ने बताया कि कानपुर रीजन में 21 हजार से अधिक पेंशनरों ने डीएलसी न जमा करने से पेंशन का लाभ नहीं मिल ले पा रहे हैं लेकिन नौ हजार से अधिक पेंशनर्स तो ऐसे हैं जिनकी पेंशन पांच साल या इससे भी अधिक समय से रुकी है।
लेखक के बारे में
Ajay Singhअजय कुमार सिंह पिछले आठ वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में पूर्वांचल के बड़े हिस्से से खबरों का कोआर्डिनेशन देख रहे हैं। वह हिन्दुस्तान ग्रुप से 2010 से जुड़े हैं। पत्रकारिता में 27 वर्षों का लंबा अनुभव रखने वाले अजय ने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। हिन्दुस्तान से पहले वह ईटीवी, इंडिया न्यूज और दैनिक जागरण के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। अजय राजनीति, क्राइम, सेहत, शिक्षा और पर्यावरण से जुड़ी खबरों को गहराई से कवर करते हैं। बैचलर ऑफ जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट अजय फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में असिस्टेंट एडिटर हैं और उत्तर प्रदेश की राजनीति और क्राइम की खबरों पर विशेष फोकस रखते हैं।
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