यूपी के 33 जिलों में चलेगा बड़ा अभियान, 14 से 22 दिसंबर तक घर-घर जाएंगी टीमें
33 जिलों में बड़ा अभियान चलने जा रहा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाएंगी। 14 से 22 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।

यूपी के 33 जिलों में बड़ा अभियान चलने जा रहा है। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाएंगी। 14 से 22 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। दरअसल पोलिया वायरस को जड़ से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर पांच साल तक के बच्चों को पोलिया की दवा पिलाएंगी।
राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अजय गुप्ता ने बताया कि पोलियो वायरस जनित यह अत्यंत संक्रामक बीमारी है। यूपी को पोलियो मुक्त हुए 15 वर्ष हो चुके हैं और राज्य में आखिरी पोलियो का मामला 21 अप्रैल 2010 को फिरोजाबाद में मिला था। उन्होंने कहा, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में आज भी पोलियो संक्रमण बना हुआ है। संक्रमण का पुनः खतरा न बढ़े, इसलिए हर वर्ष प्रदेश में पल्स पोलियो अभियान चलाकर बच्चों को सुरक्षा प्रदान की जाती है। भारत सरकार के निर्देश पर चयनित 33 जिलों में इस बार 1.33 करोड़ बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित है। अभियान के पहले दिन 44,726 पोलियो बूथ स्थापित किए जाएंगे। इसके बाद 14 से 22 दिसंबर के बीच 29,360 टीमें और 10,686 पर्यवेक्षक घर–घर जाकर सभी पात्र बच्चों को दवा पिलाएँगे।
दूरस्थ क्षेत्रों, बस–टैक्सी स्टैंड, रेलवे स्टेशन और ईंट–भट्ठों में बच्चों तक पहुंचने के लिए 2,750 ट्रांज़िट टीमें और 1,746 मोबाइल टीमें तैनात रहेंगी। घुमंतू, मलिन बस्तियों, ईंट–भट्ठों, निर्माण स्थलों और फैक्ट्रियों में रह रही आबादी पोलियो संक्रमण के प्रसार के प्रति अधिक संवेदनशील मानी जाती है। इसी कारण प्रदेश के 16,194 घुमंतू एवं प्रवासी क्षेत्रों में 4,60,489 परिवारों को चिन्हित किया गया है। सीमा क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतते हुए नेपाल बॉर्डर पर 30 टीकाकरण पोस्ट स्थापित किए गए हैं। साथ ही पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नाइजीरिया, सोमालिया, सीरिया, कैमरून, केन्या और इथियोपिया जैसे पोलियो प्रभावित देशों से आने–जाने वाले सभी यात्रियों को भी सावधानीपूर्वक पोलियो वैक्सीन दी जा रही है। फरवरी 2014 से अक्टूबर 2025 के बीच 1,87,203 यात्रियों को खुराक से आच्छादित किया जा चुका है। राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि पाँच वर्ष तक के सभी बच्चों को ‘दो बूंद जिंदगी की’ अवश्य पिलाएँ और प्रदेश को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखने में सहयोग दें।
इन जनपदों में चलेगा अभियान
आगरा, अम्बेडकर नगर, अमेठी, अयोध्या, बदायूं, भदोही, बांदा, चंदौली, इटावा, फिरोजाबाद, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, गाजीपुर, हमीरपुर, हाथरस, जालौन, जौनपुर, झाँसी, कन्नौज, कानपुर देहात, कानपुर नगर, कासगंज, कुशीनगर, ललितपुर, लखनऊ, महोबा, मऊ, मथुरा, मिर्जापुर, पीलीभीत, सोनभद्र, उन्नाव एवं वाराणसी।
लेखक के बारे में
Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट
पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर
यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका
(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर
आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और
डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।
लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल
वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।
पत्रकारिता का सफर
हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब
एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो
उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने
करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में
प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी
है।


