आगरा में टला बड़ा हादसा; मेट्रो की क्रेन गिरी, मकान और दुकान ध्वस्त, बाल-बाल बचा परिवार
आगरा में मेट्रो निर्माण के दौरान प्रतापपुरा चौराहे पर जमीन धंसने से 25 फीट ऊंची पाइलिंग रिग मशीन गिर गई। पास की बीयर शॉप और कमरा क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन जनहानि नहीं हुई। पुलिस ने रास्ता बंद कर जांच शुरू की। हादसे के बाद सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठे हैं।

ताजनगरी आगरा में मेट्रो निर्माण के दौरान शनिवार तड़के बड़ा हादसा होने से टल गया। प्रतापपुरा चौराहे के पास खुदाई कर रही मेट्रो की 25 फीट ऊंची पाइलिंग रिग (क्रेन) अचानक जमीन धंसने से एक ओर जा गिरी। बीयर शाप क्षतिग्रस्त हो गई, उसके ऊपर बना कमरा ध्वस्त हो गया। पुलिस और मेट्रो के अधिकारियों ने तत्काल इस रास्ते को बंद करा दिया। थाना सदर में प्रतापपुरा चौराहे के पास देवीराम स्वीट्स की दुकान है। यहां मेट्रो का एलीवेटेड ट्रैक बनाने का काम चल रहा है। पिलर के लिए जमीन खोदने को पाइलिंग रिंग का प्रयोग हो रहा है। अचानक सड़क का हिस्सा धंस गया।
अचानक गिर गई मेट्रो की क्रेन
जमीन धंसते ही वहां खड़ी करीब 25 फीट की ड्रिल मशीन का संतुलन बिगड़ गया। उसकी शाफ्ट बेकाबू होकर करीब स्थित बीयर शान की छत पर बन कमरे पर गिर गई। छत पर बना कमरा पूरी तरह मलबे में बदल गया। साथ ही बीयर दुकान की छत भी क्षतिग्रस्त हो गई। छत पर रखी पानी की टंकी टूट गई। अचानक हुए धमाके से आसपास के घरों में सो रहे लोग जाग गए। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और मेट्रो के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। एहतियात के तौर पर इलाके की घेराबंदी कर दी गई। मशीन को क्रेन से भी हटाया गया। प्रशासन और दूसरी एजेंसियां जमीन धंसने के कारणों की जांच कर रही हैं। फिलहाल हालात काबू में हैं और निर्माण स्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
कैसे काम करती है पाइलिंग रिग मशीन?
पाइलिंग रिग (क्रेन) दरअसल युद्ध में प्रयोग होने वाले टैंक की तरह होती है। इसकी निचला हिस्सा बेहद भारी होता है। मशीन के आगे लगा ड्रिल बट मिट्टी को काटता है। यह लोहे की चेन से ऊपर-नीचे जाता है। आम तौर पर मेट्रो के पिलर के लिए 15 से 40 मीटर गहराई तक खुदाई की जाती है। दूसरे शब्दों में जब तक जमीन के नीचे मजबूत चट्टानी परत न मिल जाए, खुदाई होती रहती है। इसी चट्टानी परत पर मेट्रो के पिलर को टिकाया जाता है। बेस के लिए करीब 100 फुट चौड़ा गहरा गड्ढा बनाया बनाया जाता है। इसी तल पर लोहे की सरिया, कांक्रीट से मजबूत जाल बनाया जाता है। इसके ऊपर पिलर खड़ा किया जाता है।
बाल-बाल बचा मकान मालिक का परिवार
मशीन प्रभुकांत नागर के मकान पर गिरी थी। उनके घर में आगे की तरफ शराब का ठेका और पीछे की ओर परिवार रहता है। मशीन ठेके की छत पर गिरी। मकान के पिछले हिस्से में सोते हुए लोग तेज धमाके और कंपन से जागकर बाहर आ गए। बाहर देखा तो होश उड़ गए। ठेके पर बना कमरा ध्वस्त हो चुका था। दुकान की छत भी टूट गई थी। मशीन की ऊंचाई ज्यादा होती तो बड़ा नुकसान हो सकता था।
दिन में गिरती मशीन तो भयावह होता हादसा
एमजी रोड, माल रोड, फतेहाबाद रोड, सिकंदरा रोड, रामबाग से कालिंदी विहार रोड पर इसी तरह की तमाम मशीनें लगी हैं। सड़कों के बीचोंबीच काम चल रहा है। दोनों ओर से ट्रैफिक भी आता-जाता है। इनमें बसें, कारें, दोपहिया, आटो जैसे वाहन चल रहे हैं। सोचिए कि दिन में अगर ऐसे स्थानों पर मशीन गिर जाए तो क्या होगा। मेट्रो कार्पोरेशन के सुरक्षा संबंधी दावों पर फिर सवाल लगा दिए हैं।
सड़क के घटिया निर्माण का मामला खुला
मेट्रो रेल कार्पोरेशन का कहना है कि सड़क के नीचे छोटे-छोटे गड्डे हैं। जब जांच कराई गई तो सड़क के नीचे मलबा और राख निकली है। सड़क की भराई ठीक नहीं की गई। मेट्रो का कहना है कि कानपुर, लखनऊ में इस तरह की दिक्कत नहीं आई है। यह पहला मामला है जबकि सड़क धंस गई। हालांकि अब पाइलिंग पूरी हो गई है।
पूरे शहर में लगी हैं ऐसी 17 पाइलिंग रिग
पिलर के लिए गहरे गड्ढ़ों की खुदाई करने के लिए पूरे शहर में 17 पाइलिंग रिग लगाई गई हैं। जहां निर्माण तेजी से करना होता है वहां इनकी संख्या बढ़ा दी जाती है। काम करने वाली कंपनी मशीन को किराए पर लेती रहती हैं। इस समय सभी निर्माण स्थलों पर कुल 12 मशीन काम कर रही हैं। मेट्रो के मुताबिक पिलर खुदाई का काम लगभग खत्म हो गया है।
ड्राइवर की समझदारी से बड़ा हादसा टला
मेट्रो कार्पोरेशन के मुताबिक क्रेन के ड्राइवर ने बड़ी समझदारी दिखाई। जैसे ही जमीन दरकने लगी तो ड्राइवर ने मशीन को आगे की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया। वह किसी तरह आगे जाना चाहता था। कारण यह कि जहां खुदाई चल रही थी वहां दोमंजिला रिहायशी मकान था। उसे बचाने के लिए मशीन को आगे बढ़ाकर बंद बीयर के ठेके पर टिका दिया। चूंकि मशीन भारी थी इसलिए कमरा ढह गया, आवाज भी हुई।
मेट्रो रेल कार्पोरेशन के डीजीएम जनसंपर्क पंचानन मिश्रा ने बताया कि दरअसल सड़क नीचे से खोखली और बेहद कमजोर थी। इसकी भराई ठीक नहीं की गई। सड़क धंसने से मशीन एक ओर गिर गई। यह यूपी मेट्रो के अब तक के इतिहास में पहली घटना है। जिसका नुकसान हुआ है उसकी मरम्मत नियमावली के मुताबिक करके देंगे।



