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24 जनवरी, 2021|8:05|IST

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पाठशाला बंद हैं तो क्या हुआ, अब हर घर है पाठशाला

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परिषदीय स्कूलों में भले ही ताले लटके हैं लेकिन सरकार और स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं मिशन प्रेरणा लक्ष्य में जुटे पड़े हैं। शहर से जुड़े ग्राम देवामई स्थित अंग्रेजी माध्यम की पाठशाला की प्रधानाध्यापिका वर्तिका अवस्थी की टीम बच्चों की पढ़ाई का अभियान लेकर घर-घर जा रही हैं। उन्होंने अभिभावकों और युवाओं को भी इस अभियान से जोड़ा है। हर घर पाठशाला का लक्ष्य लेकर वर्तिका ने पंजीकृत बच्चों के घरों में ही नहीं बल्कि अन्य घरों के बच्चों को भी पढ़ाई के लिए प्रेरित करना शुरू कर दिया है। अभिभावकों से भी इस अभियान में सहयोग मांगा जा रहा है। ग्रामीण वर्तिका की इस कोशिश की सराहना कर रहे हैं।

कोरोना संकट के चलते पिछले पांच माह से परिषदीय स्कूलों में ताले लटके हैं। निकट भविष्य में स्कूल खुलने की संभावना भी नहीं है। सरकार ने मिशन प्रेरणा लक्ष्य निर्धारित कर शिक्षक-शिक्षिकाओं से बच्चों की पढ़ाई कराने और अभिभावकों को प्रेरित करने का अभियान शुरू कराया है। बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दिलाने का लक्ष्य दिया गया है। इसी के तहत वर्तिका अवस्थी विद्यालय के स्टाफ के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के घर-घर जा रही हैं। अभिभावकों से बातचीत के दौरान कहा जाता है कि जब तक विद्यालय बंद हैं तब तक वह घर के अन्य कामों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई पर भी फोकस करें। ताकि बच्चे शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़े रहें। विभिन्न मोबाइल एप के जरिए बच्चों को डिजिटल शिक्षा के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।

युवाओं से पढ़ाई में मांगा जा रहा सहयोग

मैनपुरी। वर्तिका बताती हैं कि गांव के शिक्षित अभिभावकों, युवाओं से भी वह अपील करती हैं कि वह कोरोना संकट के इस दौर में समय निकालकर परिवार, मोहल्ले और गांव के बच्चों को पढ़ाएं, उन्हें देश-दुनिया के बारे में बताएं। ताकि परिषदीय स्कूल के बच्चे भी आगे आने वाले समय के लिए तैयार हो सकें। वर्तिका की इन कोशिशों को ग्रामीणों का साथ भी मिल रहा है।

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  • Web Title:What happened if the school is closed now every house is a school