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वायरल का नहीं दिखा असर, जहरीले दूध से तो नहीं हुई मौत

वायरल का नहीं दिखा असर, जहरीले दूध से तो नहीं हुई मौत

ब्लाक क्षेत्र के ग्राम कनकपुर सादा में वायरल फीवर से दो बच्चों की मौत होने के बाद हड़कंप की स्थिति है। तीसरे बच्चे की हालत सैफई मेडिकल कॉलेज में खतरे से बाहर बताई गई है। मंगलवार को एसडीएम करहल बीमार बच्चे को देखने सैफई पहुंचे और चिकित्सकों से बात की। सीएमओ के निर्देश पर चिकित्सकों की टीम भी गांव पहुंची। उधर बच्चों को दिए गए दूध पर सवाल खड़े हो गए हैं। दूध पीने के महज 10 से 15 मिनट में ही दो बच्चों की मौत हुई। गांव में वायरल फीवर की पुष्टि नहीं हुई है।

मंगलवार को सीएमओ डा. एके पांडेय के निर्देश पर डिप्टी सीएमओ डा. राकेश कुमार की अध्यक्षता में बनाई गई 10 सदस्यीय टीम गांव पहुंची। टीम में शामिल बरनाहल स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डा. रविदीप सिंह शाक्य, चार एएनएम, तीन आशाएं और दो हेल्थ सुपरवाइजरों ने गांव के सभी 200 घरों में जाकर मरीजों की तलाश की। लेकिन गांव में डायरिया, वायरल फीवर का कोई भी मरीज पीड़ित नहीं पाया गया। हालांकि तीन बच्चों को मौसमी बुखार की शिकायत मिली तो उन्हें मौके पर ही पैरासीटामोल का वितरण कर दिया गया। चिकित्सकों ने ग्रामीणों को स्वच्छता का पाठ भी पढ़ाया। गांव में गंदगी रोकने और जलभराव न होने देने के निर्देश दिए गए।

बुखार के पीड़ित नहीं मिले, दूध पर उठ रहे सवाल

बरनाहल। मंगलवार को पूरे गांव में घर-घर मरीजों को तलाशा गया। लेकिन डायरिया, मलेरिया और वायरल फीवर के मरीज नहीं मिले। मृत दोनों बच्चों की मां की हालत दूसरे दिन भी बिगड़ी रही। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उसने इतना जरूर कहा कि दूध पिलाने के बाद तीनों बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं। चर्चा है कि दूध में छिपकली या कोई जहरीला कीड़ा गिर गया। जिससे दूध जहरीला हो गया और बच्चों की जान चली गई। दस दिन पहले भी गांव में छिपकली गिरने के बाद दूध की खीर का सेवन एक ही परिवार के लोगों ने किया था। इन सभी का उपचार सिरसागंज में हुआ। डिप्टी सीएमओ का कहना है कि जांच रिपोर्ट तैयार की गई है। रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जा रही है।

एसडीएम ने सैफई जाकर जाना बच्चे का हाल

सोमवार की शाम 5 वर्षीय अमन कुमार और 2 वर्षीय अर्जुन की मौत होने के बाद तीसरे 6 वर्षीय राघवेंद्र को सैफई मेडिकल कॉलेज में भर्ती करा दिया गया। एसडीएम रतन कुमार वर्मा ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज जाकर बच्चे के उपचार का हाल जाना। गांव गई चिकित्सकों की टीम ने ग्रामीणों से कहा कि खुले में रखे हुए पदार्थ का इस्तेमाल जांच के बाद ही करें। घर के आसपास गंदगी न रखें। जलभराव न होने दें। इस दौरान डा. रविदीप के साथ डा. इंद्रदेव चौधरी, डा. एके कुलश्रेष्ठ, एएनएम नीतू, पुष्पा, शांति, आशा, सबीना, छोटी विट्टी आदि मौजूद रहीं।

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