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ग्रामीणों को नहीं था पता, कागजों में बन गए शौचालय

ग्रामीणों को नहीं था पता, कागजों में बन गए शौचालय

बुधवार को अजीतगंज गांव में शौचालय घोटाले की डीपीआरओ सुरेशचंद्र मिश्रा जांच करने पहुंचे। निरीक्षण के दौरान डीपीआरओ ने घर-घर जाकर शौचालय की जानकारी जुटाई। 98 शौचालय की धनराशि निकाली गई। जिसमें से 23 शौचालय मौके पर नहीं मिले। ये शौचालय कागजों में बना दिए गए। जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद डीपीआरओ ने सीडीओ को मामले की रिपोर्ट देने की बात कही है।

बुधवार को डीपीआरओ सुरेश चंद्र मिश्रा, खंड विकास अधिकारी जागीर अनुरुद्ध चौहान और एडीओ पंचायत सुनील जौहरी जांच करने के लिए गांव पहुंचे। जांच में पहला खुलासा हुआ कि 2012 की बेसलाइन सूची में 91 लाभार्थियों का नाम था, आरोप है कि उनसे 3000 हजार रुपये लिए गए। जिन 19 लाभार्थियों ने 3 हजार रुपये नहीं दिए, उनके शौचालय का निर्माण न कराके नए लोगों से 3 हजार रुपये लेकर शौचालय का निर्माण करा दिया गया। बेसलाइन सूची के 19 लाभार्थियों को वंचित कर दिया गया।

ग्राम पंचायत में कुल 98 शौचालय का रुपया निकालने की पुष्टि हुई। इनमें से 23 के शौचालय बने नहीं मिले। इन पात्रों को भी शौचालय मिलने की जानकारी नहीं थी। दो शौचालय ऐसे मिले, जिनका दो बार रुपया निकाला गया।

12 हजार में नहीं बनेगा ताजमहल

खंड विकास अधिकारी अनुरुद्ध चौहान ने ग्रामीणों को बताया कि 2012 बेसलाइन सूची में जिनके नाम थे और उनके यहां शौचालय का निर्माण नहीं हुआ है, तो उनके यहां शौचालय का निर्माण शीघ्रता से कराया जाए। इस दौरान महिला की घटिया निर्माण की शिकायत पर एडीओ पंचायत सुनील जौहरी भड़क गए और कह दिया कि 12 हजार रुपये में ताजमहल नहीं बनेगा।

बेसलाइन सूची में भी गड़बड़ी मिली है। रिपोर्ट मुख्य विकास अधिकारी और जिलाधिकारी को सौंपने के बाद प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

सुरेश चंद्र मिश्रा, डीपीआरओ

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  • Web Title:Toilets made in papers, in the village going to the farm