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स्कूल तो खुल गए पर न जूते मिले न मोजे

हिन्दुस्तान टीम,मैनपुरीNewswrap
Wed, 27 Oct 2021 06:25 PM
स्कूल तो खुल गए पर न जूते मिले न मोजे

परिषदीय विद्यालयों का नया सत्र शुरू हुए सात माह बीते गए लेकिन बच्चों को ड्रेस, बैग, जूते, मोजे नसीब नहीं हो पा रहे। जिससे बच्चों को बिना ड्रेस के ही अपने साधनों के साथ विद्यालय जाना पड़ रहा है। हालांकि इस बार शासन ने बच्चों को सीधे-सीधे ड्रेस, जूते, मोजे उपलब्ध कराने के स्थान पर उनके अभिभावकों के खातों में धनराशि भेजने की तैयारी की है। डीबीटी के माध्यम से खातों में धनराशि पहुंचेगी। लेकिन शासन स्तर से हो रही देरी बच्चों के लिए मुश्किल बनी हुई है।

जुलाई में चालू शैक्षिक सत्र शुरू हो गया। स्कूलों में पढ़ाई शुरू हुई तो सरकार की योजनाओं पर मंथन शुरू हो गया। स्कूलों में कक्षा एक से कक्षा 8 तक के बच्चों को सरकार स्कूल बैग, दो जोड़ी यूनीफार्म, दो जोड़ी जूते, दो जोड़ी मोजे और किताबें निशुल्क देती हैं। किताबों का वितरण तो करा लिया गया। लेकिन सरकार ने इस बार बैग, यूनीफार्म, जूते और मोजे की धनराशि 1056 रुपये निर्धारित किए और इस धनराशि को सीधे अभिभावकों के खाते में भेजने का फैसला कर लिया। ये फैसला अब बच्चों के ऊपर भारी पड़ने लगा है। सत्र शुरू हुए सात माह बीत चुके हैं। लेकिन जनपद के बच्चों को अब तक न तो बैग मिला है, न जूते मिले हैं और न ही स्कूल की ड्रेस मिल पायी है।

1909 विद्यालयों में 1.69 लाख बच्चे हैं अध्ययनरत

मैनपुरी। जिले में 1909 परिषदीय विद्यालय हैं। जिनमें एक लाख 69 हजार बच्चे अध्ययनरत हैं। चूंकि शासन ने जूते, मोजे, बैग, ड्रेस की धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद जिले के विद्यालयों के बच्चों और उनके अभिभावकों के आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक कराकर सत्यापन कराया गया।

1.42 लाख बच्चों का डाटा शासन को भेजा गया

मैनपुरी। बीएसए कमल सिंह ने बताया कि एक लाख 42 हजार बच्चों का डाटा सत्यापन कराकर शासन को भेजा जा चुका है। शेष बच्चों के आधार कार्ड व अभिभावकों के बैंक खाते सक्रिय न होने से डाटा नहीं भेजा जा सका है। खंड शिक्षाधिकारियों, संकुल शिक्षकों को जल्द शेष बच्चों का डाटा सत्यापन कराकर भेजने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों के खातों में धनराशि शासन स्तर से डायरेक्ट बेनीफिशरी ट्रांसफर(डीबीटी) के माध्यम से पहुंचेगी।

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