
बोले मैनपुरी: रामनगर को ‘रामराज्य’ की आस
Mainpuri News - मैनपुरी के रामनगर ग्राम पंचायत के ग्रामीण दो वर्षों से अधूरी जल टंकी, टूटी सड़कों और खराब स्वास्थ्य सेवाओं के कारण परेशान हैं। आवारा जानवरों और सफाई व्यवस्था की कमी भी समस्याएं बढ़ा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से उचित कदम उठाने की अपील की है ताकि उनकी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो सकें।
मैनपुरी। बेवर ब्लॉक की ग्राम पंचायत रामनगर के ग्रामीण आज भी उन मूलभूत सुविधाओं के इंतजार में हैं, जिन पर उनका पहला अधिकार है। दो वर्ष से अधूरी पड़ी पानी की टंकी, टूटी-सड़कें, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, गायब सफाई तंत्र और विकास कार्यों के ठप पड़ जाने ने ग्रामीणों के जीवन को कठिन बना दिया है। हर घर जल योजना की उम्मीदें अधूरी हैं, बीमारों को इलाज नहीं मिलता, अंतिम संस्कार सम्मानजनक ढंग से नहीं हो पाता, युवाओं के लिए खेल और शिक्षा का कोई ठोस साधन नहीं बचा। हिन्दुस्तान के बोले मैनपुरी संवाद में ग्रामीणों ने बताया कि आवारा जानवर खेतों को तबाह कर रहे हैं।
बार-बार अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद ग्रामीणों की आवाज़ अनसुनी रही और उनके दिलों में रोष भरता गया। अब ग्रामीण चाहते हैं कि सरकार और प्रशासन उनकी समस्याओं को जीकर समझे और ऐसे कदम उठाए जो उनके भविष्य को सुरक्षित कर सकें। रामनगर ग्राम पंचायत जिसकी आबादी करीब चार हजार है, कई वर्षों से अधूरे विकास और प्रशासनिक लापरवाही के बीच संघर्ष कर रही है। जल जीवन मिशन के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी दो वर्ष से अधूरी पड़ी है, जबकि गांव की लगभग सभी सड़कें पाइपलाइन डालने के दौरान तोड़ दी गईं। मरम्मत न होने से लोगों का आवागमन बेहद कठिन हो गया है। अगर विभाग समयबद्ध योजना बनाए और पानी की टंकी पूर्ण कराने के साथ सड़कों की तत्काल मरम्मत कराए, तो पेयजल व्यवस्था सुचारू हो सकेगी और ग्रामीण राहत पाएंगे। स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद डॉक्टरों की नियमित तैनाती न होना एक बड़ी समस्या है। ग्रामीणों को खांसी-बुखार, जुकाम जैसी सामान्य बीमारियों में भी भटकना पड़ता है। यदि सरकार यहां स्थायी डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और बुनियादी जांच सुविधाएं उपलब्ध कराए, तो लोगों को जिले की दौड़ से मुक्ति मिल सकती है। श्मशान घाट का प्रस्ताव वर्षों से लंबित है। अंतिम संस्कार खेतों के किनारे करना ग्रामीणों की दुखभरी मजबूरी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी देकर श्मशान घाट निर्माण शीघ्र शुरू कराया जाए, तो यह गांव के सम्मान और सुविधा दोनों के लिए बड़ा कदम होगा। बरात घर न होने से गरीब परिवारों की बेटियों की शादी तक प्रभावित हो रही है। सरकार अगर विशेष मद से पंचायत को बजट जारी करे, तो यह निर्माण गरीबों को सम्मानजनक आयोजन का अधिकार दे सकेगा। सफाई व्यवस्था सबसे बड़ी चिंताओं में है। मात्र एक सफाई कर्मचारी पूरे गांव के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण कूड़े के ढेर, गंदगी और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। दो से तीन अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति और नियमित निगरानी से यह समस्या खत्म हो सकती है। आवारा जानवर फसलों को नष्ट कर रहे हैं और कई बार लोगों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यदि प्रशासनिक स्तर पर पकड़कर गौशालाओं तक पहुंचाने की तेज़ कार्रवाई हो, तो किसानों की बड़ी राहत होगी। ग्राम पंचायत के विद्यालय की इमारत जर्जर होने से बच्चों का जीवन खतरे में है। बजट जारी होते ही नई इमारत, बाउंड्री और कक्षाओं के निर्माण की आवश्यकता है ताकि शिक्षा सुरक्षित वातावरण में हो सके। प्रकाश व्यवस्था अधूरी है, कई खंभों पर लाइट नहीं लगी है। यदि पंचायत को आवश्यक बजट मिले और विद्युत विभाग तत्काल कार्रवाई करे, तो अंधेरे वाले इलाकों में रोशनी लौट सकती है। युवाओं के लिए न खेल मैदान है, न लाइब्रेरी। यह उनकी प्रतिभा और भविष्य दोनों के लिए बाधक बन चुका है। मिनी स्टेडियम योजना व ग्रामीण पुस्तकालय की स्थापना दोनों आवश्यक हैं, ताकि युवा सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकें। आवास योजना में लंबित आवेदकों की जांच समय पर पूरी हो, सड़कें, विद्यालय, बिजली और जल आपूर्ति से जुड़े रुके कार्य तत्काल शुरू हों—तो रामनगर फिर से विकास की पटरी पर लौट सकता है। ग्रामीणों को बस इतना भरोसा चाहिए कि उनकी आवाज़ को अब सुना जाएगा। ग्राम पंचायत की पानी की टंकी दो वर्षों से अधूरी पड़ी है, जिससे लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा। पाइपलाइन डालने के लिए जो सड़कें तोड़ी गई थीं, उनकी अब तक मरम्मत न होना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को बेहद प्रभावित कर रहा है। अधिकारीयों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ग्रामीणों की मांग है कि कार्य शीघ्र पूरा कराया जाए। - पूनम, ग्राम प्रधान गांव में लाइब्रेरी न होने से युवाओं को अध्ययन सामग्री और सामान्य ज्ञान की किताबें उपलब्ध नहीं हो पातीं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं को काफी दिक्कत होती है। यदि जल्द लाइब्रेरी स्थापित करा दी जाए और आवश्यक पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, तो युवाओं का भविष्य बेहतर दिशा में बढ़ सकेगा। - अमित यादव ग्राम पंचायत क्षेत्र में कई छोटे-छोटे मजरे जुड़े हुए हैं, लेकिन बजट न मिलने से पिछले आठ महीनों से कोई नया विकास कार्य नहीं शुरू हो पाया। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जैसे ही बजट जारी होगा, सभी अधूरे कार्य—सड़कें, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल और विद्यालय—पूरा कराए जाएंगे। ग्रामीण चाहते हैं कि इस बार कोई देरी न हो। - आयुष यादव पंचायत में लगाए गए बिजली के खंभों पर अभी भी कई जगह लाइटें नहीं लगी हैं। कुछ बल्ब चोरी भी हो चुके हैं, जिससे रात में अंधेरा पसरा रहता है। यदि पंचायत को पर्याप्त बजट मिले और विद्युत विभाग द्वारा सभी खंभों पर लाइट लगवा दी जाए, तो गांव में सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ेंगी। - अशोक कुमार आवारा पशुओं के कारण फसलें नुकसान हो रही हैं और कई बार लोग भी इनके हमलों का शिकार बन जाते हैं। कुछ जानवरों को पकड़कर गौशाला भेजा गया है, पर अभी भी कई घूम रहे हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सभी आवारा जानवरों को पकड़कर गौशाला भिजवाया जाए, जिससे किसानों को राहत मिले। - प्रांशू यादव जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के लिए गांव की अधिकांश सड़कें तोड़ दी गई थीं। लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ। बरसात में कीचड़ और गड्ढों से हालात बदतर हो जाते हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग समय रहते सभी सड़कों की मरम्मत कराए। - सुलेखा शाक्य गांव का प्राथमिक विद्यालय जर्जर स्थिति में है। बच्चों के लिए यह भवन असुरक्षित बन चुका है। कुछ कार्य शुरू हुए थे, पर बजट न मिलने के कारण रुक गए। यदि समय पर बजट जारी हो जाए और नई इमारत बना दी जाए तो बच्चे सुरक्षित माहौल में पढ़ सकेंगे और उनकी शिक्षा बाधित नहीं होगी। - झब्बू सिंह

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