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2 अप्रैल, 2020|4:45|IST

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बच्चे स्कूल नहीं आए तो छत पर सजा ली नुक्कड़ पाठशाला

बच्चे स्कूल नहीं आए तो छत पर सजा ली नुक्कड़ पाठशाला

सरकारी स्कूल के शिक्षक ठीक से पढ़ाते नहीं हैं। इस तरह के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन शिक्षिका मीनाक्षी पाल स्कूल में ही नहीं पढ़ाती बल्कि छुट्टी होने पर बच्चों की नुक्कड़ पाठशाला भी सजाती हैं। मैनपुरी की परिषदीय शिक्षा में आ रहे बदलाव का ही असर है कि मीनाक्षी की नुक्कड़ पाठशाला किसी स्कूल में नहीं बल्कि बच्चों के घरों की छतों पर सजती है। इस पाठशाला में स्कूल न आने वाले बच्चे पढ़ने आ रहे हैं।

मैनपुरी ब्लॉक के ग्राम भोजपुरा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय की सहायक अध्यापिका मीनाक्षी पाल की नुक्कड़ पाठशाला विभाग में चर्चा का विषय है। मीनाक्षी स्कूल की छुट्टी होने के बाद गांव के चिह्नित घरों में पहुंचती हैं और स्कूल न आने वाले बच्चों को छत पर सजने वाली पाठशाला में पढ़ाती हैं। छत की दीवार पर उन्होंने ब्लैकबोर्ड बना लिया है और यहीं गांव के 15 से 20 बच्चे हर रोज पढ़ने आते हैं। मीनाक्षी कहती हैं कि उन्हें ऐसा करके अच्छा लगता है। वे कहती हैं कि यह बच्चे वह बच्चे हैं जो स्कूल नहीं आते। इन बच्चों को स्कूल लाने के लिए बहुत कोशिश की गई। उच्चाधिकारी भी अभिभावकों को समझा गए लेकिन बच्चे अभिभावकों ने स्कूल नहीं भेजे। अभिभावकों और बच्चों ने अपनी-अपनी मजबूरी बताई।

स्कूल के बच्चे भी करते हैं सहयोग

मैनपुरी। शिक्षिका मीनाक्षी पाल ने विद्यालय में कुछ बच्चों के न आने की समस्या का हल निकाला और बच्चों को नुक्कड़ पाठशाला में पढ़ाना शुरू कर दिया। उनके इस कार्य में स्कूल आने वाले बच्चे मदद करते हैं। यही बच्चे स्कूल न जाने वाले बच्चों को शाम के समय नुक्कड़ पाठशाला में लेकर आते हैं। खुद भी पढ़ते हैं और उन्हें भी पढ़ाई कराते हैं। मूलरूप से फर्रुखाबाद और गाजियाबाद की स्थायी निवासी मीनाक्षी इस समय मैनपुरी में रह रही हैं।

मीनाक्षी की कोशिश बेहतरीन है। हालांकि ये सभी बच्चे स्कूल में आकर पढ़ें इसकी कोशिश की गई है। छुट्टी के बाद मीनाक्षी इन बच्चों को नुक्कड़ पाठशाला में पढ़ा रही हैं। अगले सत्र से इन बच्चों को स्कूल लाने की पूरी कोशिश की जाएगी।

सुमित कुमार एबीएसए

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  • Web Title:Nukkad School was decorated on the terrace if the children did not come to school