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7 जुलाई, 2020|3:44|IST

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लॉकडाउन : जान हथेली पर रख फर्ज निभा रहे अफसर

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कोरोना योद्धा मददगार बन चुके हैं। लोग घरों में कैद है, उनकी सुरक्षा की चिंता में दिन-रात जुटे पुलिसकर्मियों के सामने भी अपनों का संकट है लेकिन दायित्व निर्वहन का जोश लेकर पुलिस और प्रशासनिक वर्ग से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। अपनों से बात तो होती है लेकिन अपनों से सामने बात करने के लिए मन मचलता रहता है। लॉकडाउन के दौरान कुछ अपने बीमार भी हो गए लेकिन ड्यूटी की जिम्मेदारी सिर्फ ड्यूटी करा रही है।

पिता की आवाज देती है ड्यूटी का संबल

किशनी तहसील कोरोना संक्रमण से अब तक दूर है। यहां तैनात एसडीएम आरएस मौर्या आजमगढ़ के मूल निवासी है। उनके 85 वर्षीय पिता फौजदार की उम्र अधिक हो गई है। बीमार भी रहते हैं। वह पिता का हर रोज वीडियो कॉल के जरिए हालचाल लेते हैं। पिता कहते हैं कि बेटा ख्याल रखना। उनके द्वारा इतना कहने से ही संबल मिल जाता है। पत्नी और बेटा लखनऊ में हैं, दो बेटियां दिल्ली में पढ़ती हैं। सभी अलग-अलग हैं। सबसे हर रोज बात नहीं हो पाती। वह कहते हैं कि तैनाती स्थल के लोगों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है।

चार माह से नहीं हुई है अपनों से मुलाकात

किशनी थाना प्रभारी ओमहरि बाजपेई की ड्यूटी सुबह 6 बजे से शुरू हो जाती है। पूरे दिन चलती है, पूरी रात चलती है। सुबह 4 बजे थाने लौटने के बाद उन्हें दो घंटे सोने का मौका मिलता है। लॉकडाउन में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को घरों में रहने के लिए समझाना टेढ़ी खीर होता है। थाना प्रभारी का परिवार हरदोई में है। उनकी वृद्ध मां से हर रोज बात होती है। उनके बहनोई अभय मिश्रा बीमार हैं। बहन के कहने के बाद भी उन्हें देखने नहीं जा पाए। पत्नी और एक बेटा और पुत्री बरेली में हैं। उनसे भी चार महीने से मुलाकात नहीं हुई है।

माता-पिता बेहद नजदीक पर मुलाकात नहीं

किशनी तहसील में नायब तहसीलदार अनुभव चंद्रा ने भी लॉकडाउन की अवधि शुरू होने के बाद से जिम्मेदारी संभाल रखी है। हालांकि उनका जिला इटावा है। उनकी शादी भी नहीं हुई है। माता-पिता और बहन से पांच माह से मुलाकात नहीं हुई। लॉकडाउन की अवधि में ड्यूटी करते समय परिजनों की याद भी आती है। बेहद नजदीक होने के बाद भी वह उनसे मिलने नहीं जा पाते। उनके भाई मुकेश प्रताप विधूना में सीओ हैं। उनकी तरह भाई भी अपनों से दूर हैं।

बुलाते हैं बेटा और बेटी पर फर्ज बेहद जरूरी

रामनगर चौकी कन्नौज बॉर्डर से लगती है इस नाते यहां के चौकी प्रभारी विकास तोमर पर अधिक जिम्मेदारी है। बदमाशों का आवागमन रोकना है, लॉकडाउन के दौरान कोई संदिग्ध जिले में न आ जाए इस पर भी नजर रखनी है। यह इलाका बहुत बड़ा है। मेरठ में उनके माता-पिता, पत्नी और एक बेटा और बेटी रहते हैं। सिर्फ वीडियो कॉल ही अपनों से बात करने का जरिया है। बेटी और बेटा घर आने के लिए कहते हैं पर ड्यूटी का फर्ज निभाना है। अपनों की याद तो आती ही है।

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  • Web Title:Lockdown Officers playing duty on their hands