
बोले मैनपुरी: यहां कब जलेगी विकास की ‘जोत’
Mainpuri News - मैनपुरी। बेवर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जोत आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है।
बेवर ब्लॉक की ग्राम पंचायत जोत आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। 17 हजार आबादी वाले इस क्षेत्र में ग्रामीण हर दिन उन समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनके समाधान की ज़िम्मेदारी व्यवस्था पर थी। पानी की टंकी वर्षों पहले बन तो गई, पर सप्लाई आज तक नहीं पहुंची। सड़कें आधी-अधूरी, स्वास्थ्य सुविधाएं अधूरी, सफाई व्यवस्था कमज़ोर, आवारा पशुओं का आतंक और स्कूलों के आसपास गंदगी—ये सब मिलकर लोगों का जीवन मुश्किल बना रहे हैं। बजट न आने से अनेक कार्य रुके पड़े हैं। हिन्दुस्तान के बोले मैनपुरी संवाद में पंचायत के लोगों ने बताया कि गांवों को जोड़ने वाले मार्गों तक की मरम्मत नहीं हो सकी।

सबसे अधिक पीड़ा इस बात की है कि सरकार की योजनाएं कागज़ों तक सीमित रह गईं, जबकि ग्रामीण आज भी राहत की प्रतीक्षा में हैं। जोत की आवाज़ अब एक बदलाव की मांग कर रही है, ताकि विकास कागज़ से निकलकर धरातल पर उतर सके। जोत ग्राम पंचायत की स्थिति विकास की उन कहानियों को उजागर करती है, जो फाइलों में तो चमकती हैं पर ज़मीनी हकीकत में अधूरी रह जाती हैं। पंचायत में बनी पानी की टंकी वर्षों पहले तैयार हो गई थी, लेकिन सप्लाई आज तक चालू नहीं हुई। कई सरकारी हैंडपंप भी कम पानी दे रहे हैं, जिससे पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है। सरकार यदि पाइपलाइन नेटवर्क की तकनीकी जांच, मोटर की मरम्मत और जिम्मेदार विभागों पर निगरानी बढ़ाए, तो यह समस्या आसानी से मिट सकती है। उपकेंद्र रसूलपुर में दवाइयां सीमित मिलती हैं, और जांच सुविधा न होने से ग्रामीणों को ज़िला अस्पताल जाना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को सशक्त करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ, परीक्षण किट और नियमित निरीक्षण अनिवार्य हैं। सफाई व्यवस्था भी कमजोर है। 17 हजार आबादी पर केवल दो सफाई कर्मचारी तैनात हैं। यदि पंचायत में कम से कम चार कर्मचारियों की नियुक्ति हो जाए, तो गांव की स्वच्छता स्थिति तुरंत सुधर सकती है। श्मशान घाट का निर्माण हुआ है, पर कई सुविधाएं अधूरी हैं और आसपास सफाई नहीं रहती। सरकार यहां शेड, पानी व्यवस्था और साफ-सफाई के लिए बजट जारी करे, ताकि अंतिम संस्कार में किसी को परेशानी न हो। बरातघर के लिए सरकारी भूमि उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण बजट के इंतजार में अटका है। यह भवन बन जाए तो पंचायत के सामाजिक कार्यक्रमों को एक स्थायी स्थान मिल सकेगा। स्ट्रीट लाइटों का काम भी विवाद और बजट की देरी के कारण रुका पड़ा है, जबकि अंधेरा गांवों में सुरक्षा समस्या बन चुका है। गांव का खेल मैदान कब्जे में होने से युवा खेलों से दूर हैं। यदि प्रशासन कार्रवाई कर मैदान को मुक्त करा दे और मिनी स्टेडियम प्रस्ताव को मंजूरी मिले, तो युवा प्रतिभाएं निखर सकती हैं। विद्यालयों के आसपास गंदगी, जर्जर मुख्य मार्ग, आवारा पशुओं का भय, खराब नलकूप, और नगला राधे, बल्लूपुर, नगरिया, रसूलपुर, महुआ, लालपुर, आम, भरतपुर समेत कई मुजरों में रुके कार्य विकास की तस्वीर को अधूरा साबित करते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के कई आवेदन भी लंबित हैं, जिन्हें तेज़ी से जांच कर लाभ दिलाया जाना चाहिए। ग्राम पंचायत जोत की आवाज़ साफ़ कहती है कि यदि सरकार ठोस कदम उठाए, समयबद्ध बजट जारी करे और विभागीय लापरवाही पर कार्रवाई हो, तो यहां विकास की तस्वीर बदल सकती है। ग्रामीण इंतजार में हैं कि योजनाएं कागज से निकलकर उनके जीवन तक पहुंचे। बोले लोग ग्राम पंचायत जोत में सबसे बड़ी परेशानी पानी की सप्लाई न होना है। टंकी तो बनी, लेकिन पानी नल तक नहीं पहुंचा। कुछ हैंडपंप भी कम पानी दे रहे हैं। गर्मी के दिनों में हालात और बिगड़ जाते हैं। सरकार अगर तुरंत सप्लाई लाइन की जांच कराए और खराब हैंडपंपों की मरम्मत करा दे, तो ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है। - प्रीति शाक्य, ग्राम प्रधान नगला राधे, बल्लूपुर, नगरिया, रसूलपुर, महुआ, लालपुर, भरतपुर और अन्य मुजरों में कई कार्य बजट के अभाव में रुके पड़े हैं। सड़कें, नालियां, बिजली और पानी से जुड़ी योजनाएँ अधूरी हैं। यदि सरकार एकमुश्त बजट जारी कर कार्यों की निगरानी बढ़ाए, तो सभी क्षेत्रों में विकास का संतुलन लाया जा सकता है। - मनोज ग्राम पंचायत को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग जर्जर हालत में है। जगह-जगह गड्ढे बने हुए हैं जिससे वाहनों को नुकसान होता है और रात में हादसों का खतरा बढ़ जाता है। पीडब्ल्यूडी और जिला पंचायत से कई बार मांग की गई है। यदि सड़क को प्राथमिकता में लेकर मरम्मत की जाए। - योगेश कुमार लालपुर गांव की पानी की टंकी एक दशक से खड़ी है, लेकिन आज तक पंचायत में सप्लाई नहीं पहुंची। विभागीय उदासीनता के कारण हर घर जल योजना ठप पड़ी है। यदि इंजीनियरों को मौके पर भेजकर पाइपलाइन की जांच कराई जाए। तो पीने के पानी की समस्या खत्म हो सकती है। - सरमन आवास योजना के तहत कई लोगों को फायदा मिला है लेकिन सैकड़ों नए आवेदन लंबित हैं। पात्र परिवार अपने घर का सपना पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं। यदि जांच तेजी से कराई जाए और बजट जारी हो, तो सभी पात्र परिवारों को आवास योजना का लाभ मिल सकता है और वे सुरक्षित घर में रह सकेंगे। - रवि कुमार भरतपुर और अन्य क्षेत्रों में आवारा पशु किसानों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं। फसलें चर जाने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है और रात-रात भर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है। यदि प्रशासन इन पशुओं को पकड़कर गौशाला भेज दे, तो किसानों की चिंता काफी हद तक कम हो सकती है। - हरबख्स सिंह गांव के खेल मैदान पर कब्जा होने से बच्चे और युवा खेलने से वंचित हैं। मैदान पर पशु बांधे जाते हैं, जिससे खेल गतिविधियां बंद पड़ी हैं। यदि प्रशासन कब्जा हटाकर मैदान को मुक्त करा दे और मिनी स्टेडियम प्रस्ताव पर कार्रवाई करे, तो गांव में खेल संस्कृति फिर जीवंत हो सकती है। - जितेंद्र छह सरकारी विद्यालयों में बच्चे तो पढ़ते हैं, मगर स्कूलों के आसपास गंदगी बनी रहती है। इससे खांसी, जुकाम और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यदि स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए, नालियाँ साफ कराई जाएं और कूड़ा निस्तारण बेहतर हो, तो बच्चों का स्वास्थ्य सुरक्षित रह सकता है। - सुनील कुमार

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