बोले मैनपुरी: सांसें हो रहीं कम, आओ हम सब बचाएं पर्यावरण का दम
Mainpuri News - मैनपुरी। पर्यावरण केवल हमारे चारों ओर मौजूद पेड़-पौधों या हवा-पानी का नाम नहीं है, बल्कि यह वह जीवन रक्षक प्रणाली है जो पृथ्वी पर हर जीव के अस्तित्व क
पर्यावरण केवल हमारे चारों ओर मौजूद पेड़-पौधों या हवा-पानी का नाम नहीं है, बल्कि यह वह जीवन रक्षक प्रणाली है जो पृथ्वी पर हर जीव के अस्तित्व को संभव बनाती है। आज के युग में पर्यावरण संरक्षण की जरूरत पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है क्योंकि हम एक गंभीर पारिस्थितिक असंतुलन के मुहाने पर खड़े हैं। बढ़ती जनसंख्या, अनियंत्रित शहरीकरण व औद्योगिक कचरे ने हमारी स्वच्छ हवा को जहरीला और नदियों को प्रदूषित कर दिया है। प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग, वनों की कटाई और जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाला कार्बन उत्सर्जन ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रहा है व ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियां पेश कर रहा है।
यदि हमें आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित भविष्य देना है तो पर्यावरण का संरक्षण केवल एक विकल्प नहीं बल्कि हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के बोले मैनपुरी के संवाद में लोगों से बात की तो कहा हमें अपनी प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए। पर्यावरण केवल हमारे आसपास का दृश्य नहीं है, बल्कि यह वह जटिल तंत्र है जिसमें हम सांस लेते हैं, भोजन पाते हैं और जीवन जीते हैं। आज जब हम 2026 की दहलीज पर खड़े हैं, तो प्रकृति और मानवता के बीच का संघर्ष अपने चरम पर है। पृथ्वी सौरमंडल का एकमात्र ज्ञात ग्रह है जहां पर जीवन पनपता है और इसका श्रेय हमारे अद्वितीय पर्यावरण को जाता है। प्रकृति के सभी घटक यानि मिट्टी, जल, वायु, जीव-जंतु और वनस्पति एक-दूसरे पर निर्भर हैं। यदि एक भी कड़ी टूटती है तो पूरी खाद्य श्रृंखला और जीवन चक्र प्रभावित होता है। हमारी बुनियादी जरूरतें जैसे स्वच्छ जल, शुद्ध हवा और भोजन हमें सीधे पर्यावरण से प्राप्त होते हैं। इसके अलावा, दवाइयों का एक बड़ा हिस्सा प्राकृतिक वनस्पतियों से आता है। वन और महासागर कार्बन सिंक के रूप में कार्य करते हैं, जो वातावरण से अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर वैश्विक तापमान को नियंत्रित रखते हैं। मैनपुरी के स्टेशन रोड पर सड़क निर्माण के लिए लगभग आधा सैकड़ा पुराने पेड़ों को काटा जाना स्थानीय निवासियों के बीच भारी आक्रोश का विषय बना हुआ है। प्रशासन द्वारा जिले में जगह की कमी का तर्क देकर इन पेड़ों को मैनपुरी से बाहर स्थानांतरित करना लोगों को तर्कसंगत नहीं लग रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेढ़-दो दशक पहले यह मार्ग हरा-भरा हुआ करता था, लेकिन अब पौधरोपण के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। नागरिकों की पुरजोर मांग है कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने को पेड़ों को अन्यत्र भेजने के बजाय सड़क किनारे ही नए पौधे लगाने की व्यवस्था की जाए। विकास के नाम पर हरियाली का इस तरह निर्वासन मैनपुरी के प्राकृतिक स्वरूप को नुकसान पहुंचा रहा है। मानवीय महत्वाकांक्षाओं ने विकास की दौड़ में प्रकृति को पीछे छोड़ दिया है। जीवाश्म ईंधनों (कोयला, तेल, गैस) के अत्यधिक दहन से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन बढ़ा है। इससे पृथ्वी का औसत तापमान बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। कृषि भूमि और शहरी विस्तार के लिए जंगलों की कटाई ने हज़ारों प्रजातियों के आवास छीन लिए हैं। यह चक्र वर्षा को प्रभावित करता है और मिट्टी के कटाव को बढ़ाता है। बोली शिक्षिकाएं पेड़ पृथ्वी के सच्चे मित्र हैं। बढ़ती गर्मी का समाधान अधिक से अधिक पौधे लगाना है।समाज को जागरूक करने में शिक्षकों की भूमिका अहम है। एक पौधा, एक संकल्प का संदेश देना चाहिए। - खुशी पर्यावरण की रक्षा के लिए पौधरोपण जरूरी है। पेड़ प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। बच्चों को बचपन से प्रकृति से जोड़ना चाहिए। हर व्यक्ति का एक पौधा, देश की बड़ी सेवा है। - माधुरी अच्छा जीवन जीने के लिए संतुलित पर्यावरण जरूरी है। सिर्फ पौधे लगाने से ही जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती है, बल्कि इन पेड़ों का संरक्षण भी करना जरूरी है। सभी को कम से कम एक पेड़ लगाना चाहिए।- डा.किरन सौजिया हमें इस बात को गंभीरता से समझना होगा कि पर्यावरण सुरक्षित तो हमारा जीवन सुरक्षित। अगर हम पर्यावरण की रक्षा करेंगे तो पर्यावरण हमारी रक्षा करने में मददगार होगा। - वर्षा चौहान आज विश्व की बड़ी समस्या ग्लोबल वार्मिंग है। हम सभी को अपने आस-पास पौधे लगाने के साथ में उनके संरक्षण की जरूरत है। हर किसी को पौधे लगाने के साथ में उनके संरक्षण की जरूरत है। - इंद्राणी श्रीवास्तव हमें सबसे पहले खुद को बदलना होगा। सिर्फ पर्यावरण दिवस पर ही सक्रिय क्यों होना है, जब हम 365 दिन हवा-पानी के लिए प्रकृति पर निर्भर रहते हैं तो फिर हर रोज पर्यावरण को काम क्यों नहीं करते। - खुशबू जायसवाल पर्यावरण के नाम पर जितने भाषण होते हैं तथा जितने वायदे होते हैं, अगर उसका 50 फीसद भी काम हो जाए तथा हम इसे जीवन में धारण कर लें तो हम खुद की व आने वाली पीढ़ी को बेहतर वातावरण दे सकेंगे। - लकी सेनापति आज जिस तरह की गर्मी का हर कोई सामना कर रहा है, उसके पीछे सबसे बड़ी वजह है पेड़ों का कम होना। अगर अपने घरों के बाहर हम पौधे लगाएं तो अपने आसपास का तापमान भी कम कर सकते हैं। - अनीता यादव
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