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मैनपुरीमैनपुरी सारस सर्किट में मिलेगा सारस पक्षियों को ठिकाना

हिन्दुस्तान टीम,मैनपुरीPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:30 AM
मैनपुरी सारस सर्किट में मिलेगा सारस पक्षियों को ठिकाना

उत्तर प्रदेश के राजकीय पक्षी सारस की प्रजाति पर संकट खड़ा हो गया है। विश्व स्तर पर सारस की प्रजाति में कमी आ रही है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर ने इस प्रजाति को संकटग्रस्त घोषित किया है। इस प्रजाति की संख्या बढ़े इसके प्रयास भी शुरू हो गए हैं। सारस मैनपुरी में भी बहुतायत में पाए जाते हैं लेकिन अब इनकी संख्या में गिरावट आ रही है। मैनपुरी में सारस के संरक्षण के लिए मैनपुरी पर्यटन सारस सर्किट विकसित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

मुख्य विकास अधिकारी ईशा प्रिया ने मैनपुरी में सारस के संरक्षण की पहल शुरू की है। उनके इस काम में एसडीएम सदर ऋषिराज भी सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने मैनपुरी पर्यटन सारस सर्किट बनाने की पहल दिसंबर में शुरू की थी लेकिन कोरोना के चलते इस पहल को रोकना पड़ा लेकिन अब इस पर फिर से काम शुरू हो गया है। सीडीओ के निर्देश पर जनपद में दस बड़े नए वेटलेंड चिह्नित किए गए हैं जहां सारस संरक्षण के लिए सामाजिक संस्थाओं के लिए पहल होगी। वहां वॉच टावर बनाए जाएंगे। उन इलाकों में शिकार रोका जाएगा, साथ ही लोगों को सारस संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। चिह्नित किए गए इन स्थानों पर 50 से अधिक सारस एक साथ पर्यटन के नजरिए से मिलें, इसकी व्यवस्था भी सारस सर्किट में होगी।

गांगसी तालाब पर कब्जा होने की शिकायत

मोहब्बत के प्रतीक सारस संकट में हैं। सारस संरक्षण के लिए सरकार स्तर पर तो पहल चल ही रही है, मैनपुरी की सीडीओ ने भी इस प्रजाति के संरक्षण का अभियान शुरू किया है। इसके लिए दस बड़े तालाब और वेटलैंड चिंह्नित किए गए हैं। इन वेटलैंड पर सारस पक्षियों की सर्वाधिक संख्या मिलती है। बरनाहल-मैनपुरी मार्ग पर स्थित गांगसी तालाब भी सारस पक्षियों की शरण स्थली है लेकिन यहां के इस तालाब पर अवैध कब्जा होने की शिकायत की गई है।

सारस की यह है खासियत

सारस दुनिया का सबसे विशाल उड़ने वाला पक्षी है। भारत में इसकी संख्या सबसे अधिक पाई जाती है। मैनपुरी जैसे कम विकसित इलाकों में इनकी संख्या अधिक है। यह एक ही भौगोलिक क्षेत्र में ज्यादा रहते हैं। यह जीवनभर जोड़े के रूप में साथ रहते हैं। यदि किसी एक सारस की मौत होती है तो दूसरा सारस भी कुछ दिनों बाद मर जाता है। इसीलिए ही इन्हें परस्पर प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। कुछ देशों में तो सारस पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं।

मैनपुरी में पिछले वर्ष सारस पक्षियों की गिनती कराई गई थी। उस समय जनपद में 2694 सारस पाए गए थे जबकि पिछले वर्षों में इनकी संख्या इससे कही अधिक थी। दस नए वेटलैंड चिह्नित कराए गए हैं। यह वेटलैंड तालाब के किनारे हैं। सहज, सहन, सौज में सारस सर्किट का काम शुरू हो गया है। घिरोर के विधूना में अब काम शुरू कराया गया है। जनपद के लोग सहयोग करें, मैनपुरी सारस सर्किट के रूप में पर्यटन दृष्टि के रूप में भी विकसित हो, इसकी कोशिश की जाएगी।

ईशा प्रिया, सीडीओ मैनपुरी

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