
बोले मैनपुरी: खेड़ामहान में विकास के वादे अधूरे
Mainpuri News - मैनपुरी के खेड़ामहान ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय की स्थिति बहुत खराब है। नियमित सफाई और निगरानी के अभाव में महिलाएं और बच्चे खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। जलभराव और गंदगी भी गंभीर समस्याएं हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल सुधार की मांग की है।
मैनपुरी। खेड़ामहान ग्राम पंचायत की सबसे बड़ी समस्या सामुदायिक शौचालय की बदहाली है। शौचालय बन तो गया, लेकिन नियमित सफाई, केयरटेकर की नियुक्ति और निगरानी न होने से उस पर ताला लग गया। जिम्मेदार विभाग और पंचायत स्तर पर लापरवाही के कारण महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे खुले में शौच के लिए मजबूर हैं। सरकार को चाहिए कि शौचालयों के संचालन के लिए स्थायी केयरटेकर नियुक्त किए जाएं, नियमित निरीक्षण हो और सफाई के लिए अलग बजट सुनिश्चित किया जाए। जलभराव गांव की दूसरी बड़ी समस्या है। गलियों और मुख्य परिक्रमा मार्ग पर नालियों का निर्माण न होने से घरों का गंदा पानी सड़कों पर बहता है।
बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं, जिससे बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। यह समस्या पंचायत स्तर पर तकनीकी योजना के अभाव और निगरानी न होने से उत्पन्न हुई है। प्रशासन को तत्काल पक्की नालियों और सड़क निर्माण की योजना बनाकर उसे समयबद्ध तरीके से पूरा कराना चाहिए। हर घर जल योजना के तहत बनाई जा रही पानी की टंकी वर्षों बाद भी अधूरी है। ठेकेदार और संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। सरकार को ऐसे मामलों में ठेकेदारों पर कार्रवाई करते हुए कार्य को शीघ्र पूरा कराना चाहिए, ताकि योजना का वास्तविक लाभ मिल सके। गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सार्वजनिक स्थानों के सामने कूड़े के ढेर लगे हैं, जो स्वच्छता अभियान की विफलता दर्शाते हैं। सफाई कर्मियों की नियमित तैनाती और निगरानी व्यवस्था न होने से यह स्थिति बनी है। प्रशासन को सफाई कर्मियों की टीम बनाकर दैनिक सफाई सुनिश्चित करनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते तालाब की खुदाई, जलनिकासी की व्यवस्था और योजनाओं की निगरानी की जाती, तो आज यह हालात न होते। भविष्य में ऐसी समस्याएं दोबारा न हों, इसके लिए सरकार को पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय करनी होगी, नियमित ऑडिट कराना होगा और ग्रामीणों की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करनी होगी। तभी खेड़ामहान के ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी राहत मिल सकेगी। ग्राम प्रधान विनीता देवी ने बताया कि गांव के मुख्य परिक्रमा मार्ग को पक्का कराने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया गया है। नापतोल भी हो चुकी है, लेकिन कार्य शुरू नहीं हो सका। जल जीवन मिशन की पानी की टंकी बजट के अभाव में अधूरी है। जल्द ही सफाई व्यवस्था मजबूत कर शौचालय चालू कराने के प्रयास किए जाएंगे। - विनीता देवी, ग्राम प्रधान गांव के मुख्य मार्ग पर पानी भरा रहने से छोटे बच्चे आए दिन फिसलकर गिर जाते हैं। नालियों और पक्की सड़क के अभाव में समस्या बढ़ती जा रही है। जलभराव और खराब रास्तों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। शौचालय बंद होने से स्वच्छता पर भी असर पड़ा है। प्रशासन को जल्द समाधान करना चाहिए। ताकि आवागमन में ग्रामीणों की समस्या समाप्त हो जाए। - नरोत्तम सिंह पिछले पांच वर्षों में गांव में कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ। न गलियों का निर्माण हुआ, न जलनिकासी की व्यवस्था। तालाब खुदाई कराई जाए तो जलभराव से राहत मिल सकती है। शौचालय व सफाई की स्थिति सुधारी जाए, तभी ग्रामीणों को राहत मिलेगी। - सुरेश चंद्र विकास के नाम पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी समझ से परे है। जलभराव के कारण महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग गिरकर घायल हो रहे हैं। सामुदायिक शौचालय बंद है और सफाई व्यवस्था पूरी तरह फेल है। ग्रामीण खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। - आदेश गांव में बने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने कूड़े के ढेर लगे हैं। यह स्वच्छता अभियान की खुलेआम अनदेखी है। जलभराव और गंदगी से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। अगर समय रहते सफाई और नाली निर्माण नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ेंगे। - हैप्पी सिंह मुख्य मार्ग पर बने गड्ढों में गंदा पानी भर जाता है, जिससे सड़क और तालाब में फर्क नहीं दिखता। राहगीरों को भारी दिक्कत होती है। जलभराव के साथ-साथ शौचालय की बदहाली ने गांव की छवि खराब कर दी है। समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है। - सोनवीर छात्र-छात्राओं को कोचिंग और स्कूल आते-जाते समय गंदे पानी से होकर निकलना पड़ता है। रात के समय यह खतरनाक हो जाता है। जलभराव और खराब रास्तों के कारण दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विकास कार्य न होने से युवाओं में नाराजगी है। - वीरेश गलियों में गंदा पानी भरा होने से ग्रामीणों को कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। रोजमर्रा के काम मुश्किल हो गए हैं। शौचालय बंद होने से हालात और गंभीर हो गए हैं। स्वच्छता और जल निकासी की व्यवस्था न होने से गांव में नारकीय स्थिति बनी हुई है। - रामनरेश गांव के मुख्य मार्ग पर जगह-जगह पानी भरा रहता है। नालियों का निर्माण न होने से घरों का गंदा पानी सड़क पर बहता है। इससे आने-जाने में भारी परेशानी होती है। बच्चे और बुजुर्ग फिसलकर गिर जाते हैं, लेकिन समस्या के समाधान की कोई ठोस पहल नहीं हो रही है। - बंटी कई बार अधिकारियों से सामुदायिक शौचालय का ताला खुलवाने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। गंदगी बढ़ती जा रही है। बरसात में जलभराव के कारण रास्ते बंद हो जाते हैं। गांव की महिलाओं और बच्चों को रोजाना इस अव्यवस्था से जूझना पड़ रहा है। - सुनीता गांव की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि थोड़ी सी बारिश में पूरा गांव तालाब जैसा बन जाता है। उप जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। जलभराव और गंदगी से बीमारी फैलने का खतरा बना रहता है। पशुओं के लिए चारा लाना तक मुश्किल हो गया है। - अतुल कुमार

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