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कॉलेजों ने छीना 40 हजार छात्र-छात्राओं का वजीफा

हिन्दुस्तान टीम,मैनपुरीPublished By: Newswrap
Mon, 30 Jul 2018 11:21 PM
कॉलेजों ने छीना 40 हजार छात्र-छात्राओं का वजीफा

उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए सरकार लगातार छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित कर रही है। उनके शिक्षण कार्य के खर्चे के लिए छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की योजना संचालित हो रही है, लेकिन कॉलेजों की लापरवाही ने जिले के 40 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं को वजीफे से वंचित कर दिया है। 105 कॉलेजों ने एक महीने में कॉलेज का मास्टर डाटा शासन की बेवसाइट पर ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जिसकी वजह से इतनी बड़ी संख्या में जिले के बीए, बीएससी, बीएड और बीटीसी तथा आईटीआई करने वाले छात्र-छात्राएं इस साल छात्रवृत्ति से वंचित हो जाएंगे।

जिला समाज कल्याण विभाग ने शासन के निर्देश पर जनपद के सभी 160 महाविद्यालय, आईटीआई कॉलेज, बीएड और बीटीसी कॉलेजों से एक महीने पहले से कॉलेजों का मास्टर डाटा ऑनलाइन शासन की बेवसाइट पर फीड करने के निर्देश जारी किए थे। समाज कल्याण विभाग ने कई बार कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को दूरभाष पर भी प्रधानाचार्य और नोडल अधिकारी का संयुक्त डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस तैयार कर मास्टर डाटा फीड करने की बात कही। प्रधानाचार्यों की बैठक भी इसी काम के लिए डीआईओएस और समाज कल्याण विभाग ने बुलाई। लेकिन जिले के 105 कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों ने ध्यान नहीं दिया और आखिरी तारीख निकल गई।

जिले के इन 105 कॉलेजों में पढ़ रहे 40 हजार छात्र-छात्राएं

मैनपुरी। मास्टर डाटा ऑनलाइन फीड करने की अंतिम तिथि 30 जुलाई शासन ने निर्धारित कर रखी थी। दो दिन से समाज कल्याण विभाग ने दो बाबुओं को इसी काम पर लगा भी रखा था और वह लगातार कॉलेजों से संपर्क बनाकर मास्टर डाटा फीड करने की बात कर रहे थे। लेकिन उसके बावजूद भी कॉलेजों ने अंतिम तिथि बीत जाने के बाद मास्टर डाटा अपलोड नहीं किया है। जिले के इन 105 कॉलेजों में लगभग 40 हजार छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन छात्र-छात्राओं का वजीफा का आवेदन ही नहीं हो पाएगा। क्योंकि इन कॉलेजों ने डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से मास्टर डाटा ही अपलोड नहीं किया है और अंतिम तिथि बीत चुकी है। वहीं इस मामले में जिला समाज कल्याण अधिकारी डा. इंद्रा सिंह का कहना है कि जिले के सभी कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों से कई बार कॉलेज का मास्टर डाटा फीड करने के निर्देश दिए गए लेकिन उसके बावजूद भी 105 कॉलेज ने मास्टर डाटा फीड नहीं किया है। वहीं इस मामले में धीरेंद्र पाल सिंह इंस्टीट्यूट के सचिव सुमन चौहान का कहना है कि डिजिटल सिग्नेचर डिवाइस बनने में काफी समय लग गया,जबकि दो दिन से बेवसाइट काम नहीं कर रही थी। इसकी वजह से मास्टर डाटा अपलोड नहीं हो सका। हम अभी भी प्रयासरत हैं।

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