
ऑस्कर विनर 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' के नायक से कम नहीं है दुधवा के इरशाद अली की कहानी
2023 में रिलीज 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' डॉक्यूमेंट्री फिल्म में इरशाद अली जैसा एक किरदार नायक था जिसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर रघु नाम के अनाथ हाथी को पाला था। इरशाद को गज गौरव सम्मान भी मिल चुका है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के महावत इरशाद अली की हाथियों से दोस्ती चर्चा में रहती है। इरशाद उन बच्चा हाथियों को भी पाल चुके हैं, जिनको बड़े हाथी छोड़ जाते हैं। इरशाद को देखकर ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'द एलिफेंट व्हिस्परर्स' के नायक की याद आती है। फ़िल्म के नायक ने अपनी पत्नी के साथ अनाथ हाथी का पालन-पोषण किया था।
इरशाद अली इंसान और हाथियों की मोहब्बत की दास्तान लिख रहे हैं। इरशाद के लिए हाथी ही परिवार हैं। वह बेसहारा हाथियों के बच्चों को ऐसे पालते हैं, जैसे कोई अपने बच्चों को दुलार रहा हो। उनके प्यार-दुलार से परिवार से बिछड़े हाथी भी दुधवा की आबोहवा में ढल गए हैं। महावत इरशाद की हाथियों से मोहब्बत की कहानी दुधवा से निकलकर केंद्रीय वन मंत्रालय तक पहुंच चुकी है। हाथी दिवस पर तमिलनाडु में उनको गज गौरव सम्मान से भी नवाजा गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में तीन किस्म के हाथी पाए जाते हैं। पहले जंगल में स्वच्छंद घूमने वाले हाथी हैं। इनमें ज्यादातर नर हैं। दूसरे नेपाल के जंगलों से आने वाले प्रवासी हाथी हैं। हाथी की तीसरी किस्म खास है। इनको राजकीय हाथी कहा जाता है। इनकी संख्या 25 है। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी इरशाद अली पर है। लेकिन इरशाद और हाथियों के बीच सिर्फ नौकरी भर का रिश्ता नहीं है। उनके लिए यह परिवार पालने जैसा है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक जगदीश आर ने बताया कि इरशाद की नियुक्ति 2014 में महावत पद पर हुई थी। तब से वह हाथियों की देखरेख, प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग एवं पर्यटन संबंधी कार्यों में बेहतर योगदान दे रहे हैं। दूसरे जंगलों में मां से बिछड़कर अलग हुए दो हाथी शिशुओं को भी इरशाद ने शिद्दत के साथ पाला है। अप्रैल में दुधवा आए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गौरी हथिनी का नाम भवानी रख दिया। योगी ने महावत इरशाद अली की तारीफ भी की थी।
इरशाद के प्यार ने हाथियों को दिया माहौल
2018 में बिजनौर वन प्रभाग में बिछड़ी 3 माह की दुर्गा और 2023 में नजीबाबाद में मां से अलग हुई 10-12 दिन की गौरी को पालने और ट्रेनिंग देने में इरशाद का बड़ा हाथ है। जब दोनों शिशु दुधवा में आए थे तो वो दुखी और अकेले थे। इरशाद ने एक पिता की तरह उनको दूध पिलाकर पाला। इरशाद का कहना है कि पशुओं के भी जज्बात होते हैं। वे भी परिवार और दोस्त चाहते हैं। उनको सिर्फ हांकने से काम नहीं चलता, भरोसा जीतना पड़ता है।





