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जिला व महिला अस्पताल से निकलने वाले वेस्ट पानी का होगा ट्रीटमेंट, बनेगा एसटीपी

जिला व महिला अस्पताल से निकलने वाले वेस्ट पानी का होगा ट्रीटमेंट, बनेगा एसटीपी

संक्षेप:

Maharajganj News - महराजगंज जिला अस्पताल से निकलने वाला 20,000 लीटर वेस्ट पानी अब बर्बाद नहीं होगा। इसे ट्रीटमेंट कर सिंचाई योग्य बनाया जाएगा और कचरे से जैविक खाद तैयार की जाएगी। अस्पताल परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

Feb 07, 2026 10:52 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, महाराजगंज
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महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। जिला अस्पताल से निकल रहा वेस्ट पानी अब बर्बाद नहीं होगा। इसका ट्रीटमेंट कर सिंचाई योग्य बनाया जाएगा। उससे निकले कचरा से जैविक खाद बनाया जाएगा। अस्पताल परिसर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) बनेगा। शासन ने अस्पताल प्रशासन से इसके लिए प्रस्ताव मांगा है। 200 बेड वाले जिला व महिला अस्पताल से हर रोज करीब 20 हजार लीटर पानी निकल रहा है। वार्ड से निकल रहे इन दूषित पानी को नालियों के सहारे परिसर के बाहर निकासी हो रही है। शासन ने पानी निकासी की व्यवस्था सुदृढ़ करने के लिए परिसर में एसटीपी निर्माण करने का आदेश दिया है।

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इसके लिए अस्पताल प्रशासन से प्रस्ताव मांगा है। अस्पताल प्रशासन एसटीपी निर्माण के लिए जल निगम से प्रस्ताव के साथ स्टीमेट बनाने के लिए पत्र भेजा है। प्रस्ताव के स्वीकृत होने के बाद धन जारी होते ही अस्पताल परिसर में एसटीपी निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। एसटीपी में वेस्ट पानी को बनाया जाएगा सिंचाई योग्य दोनों अस्पताल की नालियों में पाइप लाइन बिछाया जाएगा। पाइप लाइन के माध्यम से वेस्ट पानी एसटीपी में पहुंचेगी। एसटीपी में वेस्ट पानी का ट्रीटमेंट कर उसे सिंचाई योग्य बनाया जाएगा। ट्रीटमेंट से निकले कचरे से जैविक खाद बनाया जाएगा। खुली नालियों से मिलेगी निजात अस्पताल परिसर की करीब सभी नालिया स्लैब से ढ़की हैं। जोड़ पर कही-कही नालियों का पानी दिखाई दे रहा है। एसटीपी बनने से इन नालियों में पाइप लाइन बिछेगी। पाइप लाइन के माध्यम से एसटीपी में पानी पहुंचेगा। इससे खुली नालियों से निजात मिलेगी। एसटीपी निर्माण के लिए शासन ने प्रस्ताव मांगा है। जल निगम से एसटीपी निर्माण के लिए प्रस्ताव व स्टीमेट बनाने के लिए पत्र भेजा गया है। एसटीपी बन जाने के बाद अस्पताल से निकल रहे वेस्ट पानी का ट्रीटमेंट कर सिंचाई योग्य बनाया जाएगा। डॉ. एके द्विवेदी, सीएमएस