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इंडो-नेपाल बॉर्डर पर ग्रामीण पर्यटन की नई उड़ान: 34 और गांव बनेंगे वाइब्रेंट

इंडो-नेपाल बॉर्डर पर ग्रामीण पर्यटन की नई उड़ान: 34 और गांव बनेंगे वाइब्रेंट

संक्षेप:

Maharajganj News - भारत-नेपाल सीमा के करीब बसे गांवों को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत पर्यटन और बुनियादी ढांचे के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में पांच गांवों में काम पूरा किया जा रहा है, और दूसरे चरण में 34 नए गांवों को चुना गया है। स्थानीय युवाओं को कौशल विकास और होम-स्टे नीति के तहत तैयार किया जा रहा है।

Jan 21, 2026 09:53 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, महाराजगंज
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महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। भारत-नेपाल सीमा के करीब बसे गांवों की पहचान अब केवल दुर्गम रास्तों, संसाधनों के अभाव व पिछड़ेपन से नहीं होगी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत इन सरहदी इलाकों को आधुनिक पर्यटन, बेहतर बुनियादी ढांचे व आत्मनिर्भरता के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिले में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब दूसरे चरण का आगाज हो गया है। इसमें 34 नए गांवों को वाइब्रेंट विलेज के रूप में विकसित कर वहां पर्यटन की उम्मीदों को पंख दिया जाएगा। वाइब्रेंट विलेज योजना के प्रथम चरण में चयनित पांच गांव ईटहिया, भेड़िहारी, गिरहिया, चंडीथान व बनरसिहा कला में बुनियादी ढांचे का काम पूरा किया जा रहा है।

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स्थानीय युवाओं व महिलाओं के कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इन गांवों को मॉडल के रूप में पेश कर प्रशासन अब बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। होम-स्टे व ग्रामीण पर्यटन बनेगा मुख्य आधार वाइब्रेंट विलेज योजना का सबसे आकर्षक पहलू होम-स्टे नीति है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को घरों में ठहराना है। जिससे वे गांव की वास्तविक संस्कृति, खान-पान व ग्रामीण जीवन का अनुभव कर सकें। हर गांव की कोई कहानी जरूर होती है, उसे पर्यटकों को सुनाने के लिए स्थानीय युवकों को विलेज कोआर्डिनेटर व स्टोरी टेलर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह पर्यटकों को सीमावर्ती क्षेत्रों की ऐतिहासिक गाथाएं व सांस्कृतिक विरासत सुनाएंगे। गांव के खेल को भी आगे बढ़ाया जाएगा। पलायन पर लगेगी लगाम, युवा बनेंगे उद्यमी इस व्यापक योजना का एक मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकना है। प्रशासन की मंशा है कि जब गांव में ही होम-स्टे, टूरिस्ट गाइड व छोटे व्यवसायों के माध्यम से आय के स्रोत विकसित होंगे, तो लोग अपनी मिट्टी से जुड़े रहकर सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। इन गांवों के समीप स्थित नदियों व तालाबों में बोटिंग की सुविधा शुरू की जाएगी। इसके लिए नाविकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को हस्तशिल्प व स्थानीय व्यंजनों के व्यापार के लिए तैयार किया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। दूसरे चरण में 34 गांवों का वाइब्रेंट विलेज में चयन पायलट प्रोजेक्ट के बाद केन्द्र सरकार के निर्देश पर दूसरे चरण के लिए जिले के 34 नए गांवों का वाइब्रेंट विलेज के रूप में चयनित किया गया है। इन गांवों को रणनीतिक महत्व और पर्यटन की संभावनाओं के आधार पर चुना गया है। यहां इंटरनेट, बेहतर सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर पर्यटकों को उपलब्ध कराई जाएंगी। वाइब्रेंट विलेज योजना के दूसरे चरण में 34 गांवों का चयन किया गया है। यहां होम-स्टे व लोक कला को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आने वाले समय में ये गांव सीमा क्षेत्र में ग्रामीण पर्यटन सर्किट के रूप में उभरेंगे। अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को भी यह गांव आकर्षित करेंगे। प्रभाकर मणि त्रिपाठी- सहायक पर्यटन अधिकारी