बेमौसम बारिश से किसानों को झटका, खेतों में फंसी गाढ़ी कमाई
Maharajganj News - महराजगंज जिले में मैंथा चक्रवात के कारण चार दिनों से हो रही बेमौसम बारिश ने किसानों को बड़ा झटका दिया है। धान की फसल तैयार होने के बावजूद बारिश के कारण कटाई नहीं हो पा रही है। कई किसानों की फसल गिर गई है और नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। मैंथा चक्रवात के असर से महराजगंज जिले में लगातार चार दिनों से जारी बेमौसम बारिश से किसानों को जोर का झटका लगा है। खेतों में धान की फसल पककर तैयार हो गई है। लेकिन मुख्य मौके पर बेमौसम बारिश से खेतों में धान की फसल कट नहीं पा रही है। खेतों में गाढ़ी कमाई फंसने से किसान परेशान हैं। अक्तूबर के पहले सप्ताह में मानसून की वापसी के बाद कोई मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं होने से लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा। अक्तूबर महीने में दिन का तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। लेकिन अरब सागर से आ रही नमी और बंगाल की खाड़ी में बन रहे वेदर सिस्टम के चलते बादलों की सक्रियता के बाद हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की परेशानियों को बढ़ा दिया है।

नौतनवा क्षेत्र में बारिश के बीच 10 से लेकर 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के चलने से कई किसानों की धान की फसल गिर गई। ऐसे में बादलों की आवाजाही और हवाओं को देखकर जिलेभर के किसानों की दिल की धड़कन बढ़ गई है। सदर क्षेत्र के चेहरी के किसान रामनरेश यादव, विनोद यादव, जयराम गुप्ता ने बताया कि धान की फसल पक कर तैयार हो गई है। खेतों में पानी लगने के कारण कंबाइन मशीन नहीं चल पा रही है। धान की फसल खेतों में फंसने से आलू, मटर, गेहूं की बुआई पिछड़ सकती है हल्की बारिश व हवाओं से किसानों के उड़े होश मौसम के बदलते मिजाज को देखकर नौतनवा क्षेत्र के किसानों के होश उड गए हैं। किसानों का मानना है कि बारिश से धान की फसल को काफी क्षति पहुंची है। कई किसानों की धान की फसल गिरकर पानी में डूब गई है। ऐसे में धान के जम जाने का डर है। किसान रामसमुझ, शंकर, अलगू यादव, महेन्द्र, नागेन्द्र, राकेश जयसवाल, ध्रुवचन्द जयसवाल, सुरेश साहनी, रामप्रकाश बरूण, श्यामदेव चौधरी, भगवानदास चौधरी आदि लोगों का कहना है कि बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान पहुंची है। पचास प्रतिशत नुकसान होने पर ही किसानों को मिलेगी क्षतिपूर्ति खरीफ सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर किसानों के सहयोग से बैंकों ने ठीक-ठाक बीमा कंपनी में प्रीमियम जमा किया है। लेकिन क्षतिपूर्ति को लेकर बीमा कंपनी ने जो गाइड लाइन जारी किया है, उसके मुताबिक पचास प्रतिशत नुकसान होने पर ही किसानों को क्षतिपूर्ति मिलेगी। फसलों का नुकसान होने पर कृषि विभाग के निर्देश पर बीमा कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा स्थलीय जांच की जाती है। जांच में 50 प्रतिशत तक नुकसान होने की पुष्टि होने पर तत्काल बीमित राशि का 25 प्रतिशत रकम किसानों को मिल जाती है। वहीं क्रापकटिंग के बाद 75 प्रतिशत रकम मिलती है। नुकसान होने पर 72 घंटे में दें सूचना जिला कृषि अधिकारी शैलेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं एवं प्रतिकूल मौसम के प्रभाव के कारण होने वाली संभावित वित्तिय हानि की क्षतिपूर्ति करती है। लेकिन व्यक्तिगत क्षतिपूर्ति होने पर किसानों को 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी में दावा करना पड़ेगा। इसके बाद किए गए दावे को कंपनी स्वीकार नहीं करता है। ऐेसे में नुकसान होने पर किसान 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी में सूचना दे सकते हैं।

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