सोहगीबरवा सेंक्चुरी में खीरी की बाघिन संग घूम रहा वीटीआर का टाइगर
महराजगंज के सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में एक नर बाघ ने मादा बाघिन पर दिल हार लिया है। यह बाघिन, जिसे पिछले साल रेस्क्यू किया गया था, अपने दो शावकों के साथ शिवपुर रेंज में रह रही है। बाघ गणना के दौरान दोनों की सरहद पार प्रेम कहानी का पता चला है, जो वन महकमे के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के शिवपुर रेंज में रह रही दक्षिणी खीरी की एक बाघिन पर पड़ोसी सूबे बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के एक नर बाघ का दिल आ गया है। यह शाही मेहमान सरहद की परवाह किए बिना मादा टाइगर व उसके दो शावकों के साथ बेखौफ विचरण कर रहा है। सेंक्चुरी में चल रही हाईटेक बाघ गणना के पहले ही चरण में दोनों की इस सरहद पार जुगलबंदी के सुखद संकेत मिले हैं। इससे वन महकमा उत्साहित है।
बाघिन का परिचय
दरअसल बीते साल अगस्त महीने में लखीमपुर खीरी के दक्षिणी क्षेत्र से रेस्क्यू की गई एक बाघिन को उसके दो नन्हें शावकों के साथ सोहगीबरवा सेंक्चुरी के शिवपुर रेंज के जंगलों में लाकर छोड़ा गया था। शिवपुर रेंज बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व से सीधे जुड़ा है, इसलिए वीटीआर का एक नर बाघ इस बाघिन के शावकों संग यहां बसने के बाद से ही लगातार शिवपुर रेंज की तरफ रुख कर रहा है।
प्रेम कहानी का अनावरण
कैमरों के पहरे में परवान चढ़ रही सरहद पार की प्रेम कहानी वर्तमान में सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में बाघों की आधिकारिक गणना का काम बड़े स्तर पर चल रहा है। इसके लिए जिले के सभी सात रेंजों में कुल 160 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार पहले फेज की गणना पूरी होने के बाद जब कैमरों के शुरुआती फुटेज व वन्यजीव हलचलों को खंगाला गया तो शिवपुर रेंज में खीरी की इस बाघिन के प्रभाव वाले इलाके में वीटीआर के उस नर बाघ की नियमित चहलकदमी व मौजूदगी की बातें सामने आ रही हैं। दोनों वन्यजीवों के बीच बढ़ता यह सामंजस्य सोहगीबरवा के जंगलों में बाघों के कुनबे को बढ़ाने के लिहाज से एक बड़ा व सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
वैज्ञानिक प्रमाण
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भेजे गए वैज्ञानिक प्रमाण सेंक्चुरी क्षेत्र में बाघ गणना के लिए वन विभाग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रमाण ढूंढ रहा है। प्रत्यक्ष प्रमाण ट्रैप कैमरे से मिल रहे हैं। इसके अलावा वन कर्मी जंगलों से बाघों की मौजूदगी के अप्रत्यक्ष प्रमाण जैसे उनके पगमार्क व मलमूत्र के नमूने एकत्रित किए हैं। प्रभाग के सभी सात रेंजों से एक-एक विशेष नमूना लेकर जांच के लिए देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भेजा गया है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद इस बात पर अंतिम मुहर लग जाएगी कि यह नर बाघ स्थायी रूप से सोहगीबरवा को अपना नया ठिकाना बना चुका है या नहीं?
गणना की प्रक्रिया
जिले के सभी सात रेंजों में मानक के अनुसार बाघों की गणना का कार्य चल रहा है। इसके लिए 160 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। शिवपुर रेंज बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व की सीमा से सटा हुआ है इसलिए वहां वन्यजीवों का प्राकृतिक मूवमेंट हमेशा बना रहता है। पहले चरण के तहत साक्ष्य व सैंपल एकत्रित कर देहरादून स्थित वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया भेजे गए हैं। फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही आंकड़ों व टाइगर की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी।
निरंजन सुर्वे, डीएफओ-सोहगीबरवा सेंक्चुरी
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


