
सेंक्चुरी के सीमावर्ती गांवों में अघोषित कर्फ्यू, हिंसक हुए वन्यजीवों से दहशत
Maharajganj News - महराजगंज के सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण हिंसक वन्यजीवों ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। पिछले दस दिनों में दो लड़कियों की मौत हुई है। वन विभाग ने गश्त बढ़ा दी है और लोगों से जंगल की ओर जाने से परहेज करने की अपील की है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों दहशत का साया है। कड़ाके की ठंड व घने कोहरे के बीच जंगल से निकलकर आबादी की ओर रुख कर रहे हिंसक वन्यजीवों ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। आलम यह है कि पिछले दस दिनों के भीतर दो लड़कियों को वन्यजीवों ने अपना निवाला बना लिया है, जिससे सीमावर्ती दर्जनों गांवों में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति बन गई है। जनवरी की शुरुआत से ही तराई के इस इलाके में घना कोहरा छाया हुआ है। वन विशेषज्ञों के अनुसार जीरो विजिबिलिटी के चलते वन्यजीव रास्ता भटक कर जंगल की सीमाओं को पार कर खेतों और रिहाइशी इलाकों में पहुंच रहे हैं।
गन्ने के ऊंचे खेत इन जानवरों के लिए सुरक्षित छिपने की जगह बन गए हैं, जहां से वे अचानक हमला कर रहे हैं। शावकों की सुरक्षा को मादा वन्यजीव संवेदनशील वन कर्मियों के अनुसार मादा वन्यजीव अपने शावकों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक संवेदनशील होती हैं। यदि इस दौरान मानवीय हस्तक्षेप या आहट मिलती है, तो वे इसे सीधे खतरे के रूप में देखते हैं और जानलेवा हमला कर देते हैं। इसके अलाव प्रजनन के लिए नर वन्यजीव नए इलाकों की तलाश में दूर तक निकल जाते हैं। इस दौरान जो भी उनके राह में दिखाई देता है, उन पर हमला से नहीं चूकते। जनवरी में सामने आ चुके वन्यजीवों के चार हमले नए साल में जनवरी माह के 19 दिन में वन्यजीवों के चार हमले सामने आ चुके हैं। इसमें से दो की मौत हुई। दो घायल हुए। सोहगीबरवा व उत्तरी चौक रेंज में 12 बार वन्यजीवों की साइटिंग हो चुकी है। मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए वन विभाग ने गश्त बढ़ा दिया है। मॉनिटरिंग के लिए 5 टीमें गठित की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम 5 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। लोग लाठी-डंडों और टॉर्च के साथ समूहों में निकल रहे हैं। सोहगीबरवा सेंक्चुरी क्षेत्र के बाहर वन्यजीवों के निकलने की घटना को देखते हुए गश्त बढ़ा दी गई है। लोगों से अपील की गई है कि वह सुबह-शाम जंगल की ओर जाने से परहेज करें। क्योंकि इसी समय वन्यजीवों की एक्टविटी अधिक रहती है। निरंजन सुर्वे-डीएफओ

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