
रेलवे मुआवजा में 42 लाख के भ्रष्टाचार की सीओ करेंगे विवेचना
Maharajganj News - महराजगंज में रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण मुआवजे में 42 लाख की जालसाजी का मामला सामने आया है। एडीएम न्यायिक की रिपोर्ट के आधार पर भूमि अर्जन अमीन और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि उन्होंने संगठित तरीके से धोखाधड़ी की। अमीन को निलंबित कर दिया गया है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण मुआवजे के भुगतान के बाद 42 लाख की जालसाजी के दर्ज केस की विवेचना सीओ सदर करेंगे। एडीएम न्यायिक की जांच रिपोर्ट के आधार पर उप भूमि अध्याप्ति अधिकारी ने भूमि अर्जन अमीन आकाश चंद्र बादल, डॉ. एएच खुसरो व प्रेमचंद्र वर्मा को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनयम समेत कई अन्य संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज कराया है। जांच में यह बात सामने आई है कि भूमि अर्जन अमीन, डॉक्टर व प्रेमचंद्र की तिकड़ी ने मिलकर एक संगठित गिरोह की तरह षड्यंत्र रचकर यह फर्जीवाड़ा किया था।

डीएम ने अमीन आकाश चंद्र बादल को निलंबित कर दिया है। कानूनी कार्रवाई का शिकंजा कसते देख भूमि अध्याप्ति विभाग के कर्मियों का चैन गायब हो गया है। क्योंकि जांच हो तो कई चेहरे बेनकाब होंगे। इस मामले में तहरीर में लेखपाल का भी नाम आया है, लेकिन नामजद आरोपितों की लिस्ट में उसका नाम नहीं है। ऐसे बुना गया था जालसाजी का जाल एफआईआर के अनुसार ग्राम पकड़ी नौनिया निवासी उमर खान और उनके भाइयों की जमीन रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहीत हुई थी। जांच में सामने आया कि अमीन आकाश चंद्र बादल और एक हल्का लेखपाल उमर खान के घर पहुंचे और उनकी मां को कहा कि नक्शे में सड़क नहीं दिख रही, लेकिन हम रोड रेट के हिसाब से ज्यादा मुआवजा दिलवा देंगे। दो दिन बाद तहसील में भी दोनों ने यही बात दोहराई। उमर ने इसका विरोध किया, लेकिन बादल ने बाहर बुलाकर मोबाइल नंबर लिया और कहा कि रकम बढ़वाने के लिए कुछ खर्चा लगेगा। आरोप है कि अमीन ने डॉक्टर के सामने शिकायत कर्ता व उनके दो भाईयों से ब्लैंक चेक लिया। अमीन ने वह चेक डॉक्टर को दिया। डॉक्टर ने चेक को बैंक मैनेजर को दिया था। चेक भर कर कुल 42 लाख रूपये प्रेमचंद्र वर्मा के एक्सिस बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। प्रेमचंद्र ने बताया कि यह पैसा गहना लेने के बदले दिया गया था। जांच में यह बात सामने आई कि अमीन आकाश बादल ने डॉ खुसरो व प्रेमचंद्र वर्मा के साथ मिलकर योजना बनाई। शिकायतकर्ता को बरगलाकर खाली चेकों पर हस्ताक्षर कराए गए। संगठित तरीके से वित्तीय धोखाधड़ी की गई। यह भी आशंका जताई गई कि ऐसा ही फर्जीवाड़ा अन्य किसानों के साथ भी हुआ हो सकता है। इसलिए आरोपियों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की संस्तुति की गई। इस मामले में कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक निर्भय कुमार सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना सीओ सदर करेंगे।

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