Power Plant Agency located in the Gadaura Sugar Mill reached the Supreme Court - सुप्रीम कोर्ट पहुंची गड़ौरा चीनी मिल में पावर प्लांट लगाने वाली एजेंसी DA Image

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सुप्रीम कोर्ट पहुंची गड़ौरा चीनी मिल में पावर प्लांट लगाने वाली एजेंसी

सुप्रीम कोर्ट पहुंची गड़ौरा चीनी मिल में पावर प्लांट लगाने वाली एजेंसी

महराजगंज। गड़ौरा चीनी मिल की जमीन को नीलाम कर गन्ना किसानों के बकाया मूल्य भुगतान में एक के बाद एक समस्या सामने आ रही है। मिल परिसर में पावर प्लांट लगाने वाली एजेंसी आईआरईडीए (इंडियन रिनेबल एनर्जी डवलपमेंट एजेंसी) नीलामी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका(एसएलपी) दायर की है। जिसकी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गन्ना अधिकारी को पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी की थी। गन्ना अधिकारी सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख चुके हैं। इस मामले में सुनवाई शुरू हो गई है।यह है मामला आईआरईडीए (इंडियन रिनेबल एनर्जी डवलपमेंट एजेंसी) ने वर्ष 2011 में गड़ौरा चीनी मिल के अंदर गन्ने की खोई पर आधारित बिजली सयंत्र(पावर प्लांट) लगाने के लिए प्रबंधन को 57 करोड़ रुपए कर्ज दिया था। पावर प्लांट शुरू होने के बाद मिल प्रबंधन को चार किश्तों में आईआरईडीए को भुगतान किया जाना था। लेकिन मिल में न तो पावर प्लांट लगा और ना ही एजेंसी के कर्ज को वापस किया गया। एजेंसी ने मिल प्रबंधन को कर्ज अदायगी के लिए कई बार नोटिस भी जारी किया, लेकिन मिल प्रबंधन ने आईआरईडीए को पैसा वापस नहीं किया। इसी बीच जेएचवी के सदर क्षेत्र के गौनरिया स्थित 6.76 एकड़ जमीन की नीलामी कर दी गई। एजेंसी का मानना है कि मिल की जमीन बेच कर अगर गन्ना किसानों के बकाया मूल्य का भुगतान कर दिया जाएगा तो पावर प्लांट के लिए मिल प्रबंधन को 57 करोड़ रुपए का जो कर्ज दिया गया है। वह फंस जाएगा। बैंक आफ बड़ौदा ने भी हाईकोर्ट में दाखिल किया याचिकाजेएचवी मिल प्रबंधन ने मिल को सुचारु रुप से संचालित करने के लिए बैंक आफ बड़ौदा से भी 66 करोड़ रूपया कर्ज कु छ वर्ष पहले लिया था। बैंक ने भी मिल प्रबंधन को किश्तवार भुगतान करने की शर्त पर कर्ज दिया था। पर जेएचवी ने बैंक का पैसा भी फंसा दिया। जेएचवी की गनौरिया स्थिति जमीन की बिक्री जिला प्रशासन ने शुरु कराई तो बैंक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके मिल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की। यह मामला भी अभी हाईकोर्ट में लंबित है।चीनी मिल पर गन्ना किसानों का 49 करोड़ है बकाया जेएचवी ने पेराई सत्र 2014-15 में किसानों से 22 लाख कुंतल गन्ने की खरीदारी की थी। जिसका कुल मूल्य 61 करोड़ 63 लाख 29 हजार रुपए हुआ था। पर मिल प्रबंधन ने किसानों के गन्ना मूल्य का भुगतान समय पर नहीं किया। ऐसे में किसानों का 22 करोड़ 92 लाख रुपया कई वर्षों से फंसा हुआ है। पेराई सत्र 2017-2018 में भी 27.03 लाख कुंतल गन्ने की खरीदारी जेएचवी ने किया था। जिसका कुल मूल्य 85 करोड 33 लाख हुआ था। इस सत्र का भी 26 करोड़ 81 लाख रुपया किसानों का मिल में फंसा हुआ है। पिछले पेराई सीजन में जेएचवी मिल प्रबंधन द्वारा पेराई से हाथ खड़ा कर दिए जाने से किसानों का कुल 49 करोड़ रुपए गन्ना मूल्य पूरी तरह से फंस चुका है। पिछले पेराई सीजन में शासन स्तर से किसानों के पुराने गन्ना मूल्य भुगतान की कार्रवाई शुरु हुई तो मिल प्रबंधन का एक और मामला सामने आ गया है। कोट-महराजगंज के गन्ना किसानों का 49 करोड़ गन्ना मूल्य जेएचवी चीनी मिल में कई वर्षों से फंसा हुआ है। भुगतान के लिए जिला प्रशासन ने मिल की जमीन की विक्री भी शुरु कराया गया। पर आईआरईडीए द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने से किसानों का गन्ना मूल्य फं स गया है।जगदीश यादव- जिला गन्ना अधिकारी

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