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महाराजगंज

प्रधानाध्यापक ने दम तोड़ा, 22 लाख लोन की ईएमआई चुकाना मुश्किल

हिन्दुस्तान टीम,महाराजगंजPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 05:31 AM
प्रधानाध्यापक ने दम तोड़ा, 22 लाख लोन की ईएमआई चुकाना मुश्किल

परतावल। नवीन त्रिपाठी

कोरोना संक्रमण के चलते जान गंवाने वाले प्रधानाध्यापक वीरेन्द्र प्रताप नारायण का परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। करीब डेढ़ माह का समय बीतने के बाद घरवालों को किसी तरह की सरकारी मदद नहीं मिल सकी है। नौबत यहां तक आ गई है कि प्रधानाध्यापक की मौत के बाद घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। वीरेन्द्र प्रताप नारायण ने होम लोन के लिए 22 लाख रुपया का कर्ज लिया था। इसकी हर माह करीब 26 हजार रुपये की ईएमआई आती है। सेलरी बंद होने से ईएमआई चुकता नहीं हो पा रहा है। परिवार में पत्नी के अलावा दो बेटे आलोक व अनिकेत के अलावा एक बेटी रतन प्रिया है। सभी का भरण-पोषण उनके वेतन से ही होता था।

गोरखपुर जनपद के ग्राम सभा जंगल मठिया पोस्ट सरदारनगर(चौरीचौरा) के रहने वाले वीरेन्द्र प्रताप नारायण की वर्ष 2009 में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हुई थी। वह परतावल क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बरैठवा में प्रधानाध्यापक पद पर तैनात थे। उनकी पत्नी रेनू पासवान ने बताया कि पंचायत चुनाव में उनकी ड्यूटी लगी थी। 19 अप्रैल को निचलौल ब्लाक में मतदान कराने के बाद वह घर आए। घर आने के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। 27 अप्रैल को जांच में टायफायड निकला। उसकी इलाज शुरू हुई। फिर भी तबीयत में सुधार नहीं हुआ। 30 अप्रैल को गोरखपुर के तारा मंडल में एक निजी हॉस्पीटल में भर्ती कराया गया। पहली जून को एंटीजन जांच में कोविड पॉजिटिव निकले। तीन मई को दिन में 11 बजे इलाज के दौरान निधन हो गया।

मददगार हाथ

इलाज में खर्च हुआ सवा दो लाख रूपये, केवल शिक्षकों से मिली मदद

वीरेन्द्र प्रताप नारायण की पत्नी रेनू पासवान ने बताया कि गोरखपुर के हॉस्पीटल में इलाज के दौरान तीन दिन में पौने दो लाख रुपया खर्च हुआ था। उसके पहले भी करीब पचास हजार रुपया इलाज में लगा था। तीस लाख सरकारी मदद के लिए आनलाइन आवेदन हुआ है। अभी सरकारी मदद नहीं मिली है। परतावल क्षेत्र के शिक्षक साथियों ने 79 हजार की मदद दी थी।

अवरोध

उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनवाने में कदम-कदम पर आया गतिरोध

वीरेन्द्र प्रताप नारायण ने पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी शादी की थी। पहली पत्नी से दो बेटे हैं। दूसरी पत्नी से पांच साल की बेटी है। पत्नी रेनू पासवान भी एमए बीएड पास हैं। बड़ा बेटा बीएससी की पढ़ाई का रहा है। उत्तराधिकार पत्र दस दिन के भागदौड़ के बाद बन पाया। पांच दिन तक लेखपाल ने दौड़ाया। उसके बाद राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार नहीं मिल रहे थे। चार दिन बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। उसके बाद उत्तराधिकार प्रमाण पत्र मिल पाया। अब पेंशन की पत्रावली पूरी हो गई है। एमए बीएड पास पत्नी या फिर बड़े बेटे की नौकरी की बात चल रही है। लेकिन शिक्षक की नियुक्ति के लिए उनके पास टीईटी का प्रमाण पत्र नहीं है। लिपिक पद पर तैनाती के लिए परिजन आस लगाए हैं, लेकिन अभी मृतक आश्रितों के लिए लिपिक पद पर तैनाती के लिए शासनादेश नहीं आया है। परिवार असमंजस की स्थिति में है। होम लोन की ईएमआई से परिवार चिंतित है। जमा-पूंजी खर्च हो गई है। किसी तरह परिवार की गृहस्थी चल रही है।

हिन्दुस्तान का साथ

हिन्दुस्तान का साथ, आगे बढ़ेगी पेंशन व ग्रेच्युटी की पत्रावली

परतावल ब्लाक के बीईओ श्याम सुन्दर पटेल ने बताया कि वह दिवंगत प्रधानाध्यापक वीरेन्द्र प्रताप नारायण के परिवार के सम्पर्क हैं। पेंशन व ग्रेच्युटी की पत्रावली के लिए परिवार रजिस्टर का नकल, मृत्यु प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, नोटरी, आधार कार्ड समेत सभी दस्तावेज परिजन प्राप्त कर लिए हैं। जैसे ही पत्रावाली मिलेगी उसको अग्रसारित कर दिया जाएगा। शासनादेश के मुताबिक जो भी विभागीय मदद मिलनी है, उसे उपलब्ध कराया जाएगा। दुख की इस घड़ी में बेसिक शिक्षा परिवार दिवंगत प्रधानाध्यापक के साथ खड़ा है। विभाग स्तर पर प्रक्रिया में कोई भी देरी नहीं होने दी जाएगी।

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