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अहसास किताबों में जब से दब गए हैं, आदमी बस सड़क बनके रह गए हैं...

महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। उत्तर प्रदेश साहित्य सभा इकाई महराजगंज के तत्वाधान में मासिक काव्य...

अहसास किताबों में जब से दब गए हैं, आदमी बस सड़क बनके रह गए हैं...
हिन्दुस्तान टीम,महाराजगंजWed, 29 Nov 2023 10:00 AM
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महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम।
उत्तर प्रदेश साहित्य सभा इकाई महराजगंज के तत्वाधान में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन रामपुरवा में किया गया। अध्यक्षता कर रहे सभा के संरक्षक डॉ. परशुराम गुप्त ने अहसास किताबों में जब से दब गए हैं, आदमी बस सड़क बनके रह गए हैं...सुनाकर गोष्ठी को नया रंग दिया।

साहित्यकार केएम अग्रवाल ने संविधान कहता है जाति धर्म सब है एक समान, फिर इसे क्यों कोसे सारा हिंदुस्तान सुनाया। अमरेंद्र शर्मा ने यूं ही का लेने की जिद मत कर, मैं मुकद्दर हूं बड़े नसीब से मिलता हूं, कवि मनोज मद्धेशिया ने बन जाओ मां सहारा, पार लगा दो किनारा सुनाया तो संयोजक कुमार देवेश ने आजकल नींद में उनके सपने नहीं होते, साजिश निशा की है हम रात भर नहीं सोते सुनाकर वाहवाही लूटी। कवियत्री सरिता त्रिपाठी ने हाय साहब! एक लग्जरी है, पंकज मौर्य ने भी अपनी रचना सुनाई। कवि राजेश स्वर्णकार ने सर्व नीति का जहां सम्मान है, वही रीती हमारा संविधान है, कवि राघवेश पति त्रिपाठी जी ने पूरे की ख्वाहिश में इंसान सब कुछ खोता है, दिव्यांश कुमार पाण्डेय ने रश्मि रथी का पाठ किया। बाल कवियत्री आदृशा शर्मा ने संग्राम जिंदगी है लड़ना यहां पड़ेगा, बलराम पटेल ने लिख दिया है प्यार उसने और नाम भी, कवि एस. कुमार ने इससे पहले की वो बहुत दूर निकल जाए, सुनाया। विष्णु गुप्ता ने जी आरजू ये नहीं की उसका मैं हो जाऊं, कवि प्रिंस प्रजापति ने सुन हो भाई तोहे घुमाई गांव के कच्ची माटी में, कवि अर्जुन ने एक गंभीर दुख सहकार निकले फिर कोई गीत बहकर निकले सुनाया। संचालन राजेश स्वर्णकार ने किया।

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