Hindi NewsUttar-pradesh NewsMaharajganj NewsDelay in Maternal Death Audit Raises Concerns in Paratawal Health Department
छह माह बाद मातृत्व मृत्यु का ऑडिट करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

छह माह बाद मातृत्व मृत्यु का ऑडिट करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम

संक्षेप:

Maharajganj News - स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण मातृत्व मृत्यु के मामले में डेथ ऑडिट की प्रक्रिया में छह महीने की देरी हुई है। राजपुर गांव में स्नेहलता की मौत के बाद अब जांच टीम बयान दर्ज करने पहुँची है। सीएमओ ने इस लापरवाही की गंभीरता को स्वीकार किया है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Jan 15, 2026 12:40 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, महाराजगंज
share Share
Follow Us on

परतावल, हिन्दुस्तान संवाद। स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती का एक मामला सामने आया है। मातृत्व मृत्यु के मामलों में कारणों की पड़ताल व जिम्मेदारी तय करने के लिए बनाया गया डेथ ऑडिट का नियम परतावल ब्लॉक में फाइलों में दबा रह गया। राजपुर गांव में एक प्रसूता की मौत के छह महीने बाद अब जांच टीम बयान दर्ज करने पहुंची है, जबकि यह प्रक्रिया 42 दिनों के भीतर पूरी हो जानी चाहिए थी। डेट ऑडिट में देरी को सीएमओ ने गंभीरता से लिया है। कहा कि इसकी जांच कराई जाएगी। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। परतावल क्षेत्र के राजपुर निवासी विचित्र सिंह की पुत्रवधू स्नेहलता (23) ने 2 जुलाई 2025 को मेडिकल कॉलेज में एक बच्चे को जन्म दिया था।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

प्रसव के बाद स्नेहलता की स्थिति बिगड़ती गई। परिजनों ने उसे बचाने की हर संभव कोशिश की; इलाज के दौरान उसे 22 यूनिट ब्लड व 16 यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 12 अगस्त 2025 को इलाज के दौरान स्नेहलता ने दम तोड़ दिया। बुधवार को जब सीएचसी परतावल की टीम ऑडिट के लिए गांव पहुंची, तो मंजर बेहद भावुक कर देने वाला था। स्नेहलता के ससुर विचित्र सिंह उसी छह माह के मासूम नाती को गोद में लेकर अधिकारियों के सामने आए, जिसने अपनी मां को देखा तक नहीं। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। टीम ने परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए और इलाज से संबंधित पुराने दस्तावेजों का अवलोकन किया। जानकारों का कहना है कि डेट ऑडिट के लिए 42 दिन की समय-सीमा निर्धारित है। इस दौरान रेफरल प्रक्रिया, अस्पताल की भूमिका व इलाज में हुई देरी के साक्ष्य की जांच की जाती है। मौत के 180 दिन बाद डेथ ऑडिट को विभागीय लापरवाही बताई जा रही है। मातृत्व मृत्यु की सूचना मिलने के बाद अधिकतम एक माह के भीतर ऑडिट की प्रक्रिया पूर्ण हो जानी चाहिए। स्नेहलता के प्रकरण में छह माह का विलंब क्यों हुआ, इसकी गहन जांच कराई जाएगी। जो भी कर्मचारी या अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. नवनाथ प्रसाद-प्रभारी सीएमओ