पैडल पर जिंदगी: साधन संपन्न भी फिटनेस के लिए चुन रहे साइकिल की राह
महराजगंज में बदलती जीवनशैली के बीच साइकिल अब स्टेटस सिंबल बन गई है। पेशेवर लोग जैसे डॉक्टर और शिक्षक सुबह साइकिल चलाकर अपनी सेहत का ध्यान रख रहे हैं। साइकिल की लोकप्रियता ईंधन की किल्लत से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूकता से बढ़ रही है।
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। बदलती जीवनशैली व बढ़ते तनाव के बीच जिले के लोगों में अब अपनी सेहत को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी सिर्फ आम आदमी की जरूरत समझी जाने वाली साइकिल अब जिले के साधन संपन्न व संभ्रांत लोगों के लिए स्टेटस सिंबल व फिटनेस मंत्र बन चुकी है। जिले की सड़कों की सुबह एक सुखद तस्वीर बयां कर रही है, जहां गैरेज में महंगी गाड़ियां खड़ी कर डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक व व्यवसायी सुबह-सुबह पैडल मारते नजर आ रहे हैं।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता
शहर के फरेंदा रोड निवासी डॉ. सुधाकर राय पेशे से शिक्षक हैं। उनके पास घर में कार व बाइक दोनों मौजूद हैं, लेकिन खुद को फिट रखने के लिए वह रोज सुबह साइकिलिंग को ही प्राथमिकता देते हैं। डॉ. सुधाकर राय बताते हैं कि सुबह साइकिल चलाने व उसके बाद नियमित व्यायाम करने से वे दिनभर खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं। जिला मुख्यालय पर हर दिन सुबह डीआरडीए के पीडी रामदरस चौधरी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कन्हैया यादव, विज्ञान शिक्षक देवेन्द्र पांडेय सरीखे कई ऐसे प्रबुद्ध जन हैं जो किसी मजबूरी में नहीं बल्कि अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए हर रोज भोर में साइकिल की सवारी कर रहे हैं।
साइकिल की लोकप्रियता के कारण
तेल की किल्लत नहीं, फिटनेस के लिए बढ़ रहा रुझान
चौंकाने वाली बात यह है कि साइकिल की इस लोकप्रियता के पीछे पेट्रोल-डीजल की महंगाई या किल्लत कोई बड़ी वजह नहीं है। शहर के प्रमुख साइकिल दुकानदारों से हुई बातचीत में यह साफ हुआ कि जब भी कभी ईंधन की किल्लत की खबरें आती हैं तब भी बाजार पर कोई खास असर नहीं दिखता। लोग अब विशुद्ध रूप से सेहत व पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर साइकिल की ओर लौट रहे हैं। खासकर सुबह के वक्त प्रमुख रास्तों व जिला मुख्यालय परिसर में साइकिलिंग करने वालों की तादात नजर आती रहती है।
साइकिल बाजार के ट्रेंड
बाजार में रेंजर का जलवा, लेडीज साइकिलों की भी मांग
साइकिल बाजार के मौजूदा ट्रेंड को देखें तो युवाओं व शौकीनों के बीच गियर व रेंजर साइकिलों का क्रेज सबसे ज्यादा है। साइकिल दुकान मालिक फुरकान खान बताते हैं कि बाजार में स्टैंडर्ड साइकिल जहां 45 सौ रुपये में उपलब्ध है, वहीं रेंजर साइकिलों की रेंज 35 सौ से शुरू होकर 12 हजार रुपये तक जा रही है। महिलाओं व छात्राओं के लिए लेडीज साइकिलें 4 हजार से 6 हजार रुपये के बीच बिक रही हैं। इसके अलावा बाजार में 85 हजार रुपये तक की प्रीमियम इलेक्ट्रॉनिक साइकिलें भी मौजूद हैं, जिनकी महीने में एक या दो की बिक्री हो जा रही है। अन्य प्रमुख व्यवसाई गणेश व फैजान का कहना है कि साइकिल की बिक्री का ग्राफ अपनी सामान्य रफ्तार से चल रहा है। हालांकि बाजार में इलेक्ट्रॉनिक बाइक व स्कूटी के विकल्प आ जाने से भारी-भरकम बजट वाली इलेक्ट्रॉनिक साइकिलों की बिक्री थोड़ी मुश्किल से और महीनों में इक्का-दुक्का ही होती है, लेकिन सेहत व शौक के लिए पारंपरिक व रेंजर मॉडलों की पूछपरख लगातार बनी हुई है।
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