
दस लाख से अधिक लागत वाले मकान स्वामियों से वसूल होगा सेस
Maharajganj News - महराजगंज में यदि आपने व्यक्तिगत या व्यवसायिक भवन बनवाया है, तो बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन एक्ट के अनुसार आपको निर्माण लागत का एक प्रतिशत सेस जमा करना होगा। श्रम विभाग ने निर्माणाधीन और पुराने मकानों...
महराजगंज, हिन्दुस्तान टीम। यदि आप अपना निजी मकान या व्यवसायिक भवन बनवा चुके हैं या बनवा रहे हैं तो बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन एक्ट (बीओसी) को जान समझ लीजिए। इस कानून के तहत सभी निर्माण कराने वाले व्यक्ति या संस्था को कुल निर्माण की लागत का एक प्रतिशत उपकर (सेस )जमा करना अनिवार्य है। इस कानून पर ठीक से अमल नहीं होने से लोग सेस नहीं जमा कर रहे हैं, लेकिन अब शासन के निर्देश पर श्रम विभाग मकान स्वामियों से सेस वसूलने की तैयारी कर चुका है। इसके लिए विभाग निर्माणाधीन व बन चुके मकानों का सर्वे कर रहा है।

इसके क्रम में हाल ही में दस लोगों को नोटिस जारी कर सेस की रकम जमा करने का नोटिस जारी किया गया है। सेस जमा नहीं करने पर दो से चार गुना तक पेनाल्टी लग सकती है। सर्वे में देखा जा रहा है कि निर्माणाीधन मकान कितने क्षेत्रफल में बन रहा है। उसकी अनुमानित लागत कितनी है। निर्माण स्थल पर श्रमिकों के लिए क्या क्या सुविधाएं दी जा रही हैं और क्या क्या कमियां हैं? वहीं पुराने बने मकानों का भी सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि मकान कितने कमरे का बना है उसका क्षेत्रफल कितना है? उसकी अनुमानित लागत कितनी होगी? इसी आधार पर निर्माण की कुल लागत का एक प्रतिशत सेस का निर्धारण किया जाएगा। इस धनराशि को मकान स्वामी को जमा करना होगा। सर्वे के बाद श्रम विभाग ने दस लोगों को नोटिस जारी कर सेस जमा करने को कहा है। इसमें तीन आवासीय, दो व्यावसायिक व पांच आवासीय व कामर्शियल मकान स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। पुराने मकानों पर होगी दिक्कत चूंकि सेस का निर्धारण चार फरवरी 2009 के बाद के बने मकानों पर लगाया जाना है। हजारों ऐसे मकानों का अनुमान लगा पाना कठिन होगा कि वह किस वर्ष बने हैं? इसमें गांव में रहने वाले मकानों का मूल्यांकन करना सबसे कठिन कार्य है। दस लाख से अधिक लागत वाले मकान स्वामियों को एक प्रतिशत सेस जमा किया जाना अनिवार्य है। भवनों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। अब तक दस लोगों को नोटिस जारी कर सेस जमा करने को कहा गया है। गणेश सिंह, श्रम एवं प्रवर्तन अधिकारी

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