
संगम तट पर कल्पवास शुरू, लाखों श्रद्धालुओं ने शुरू की एक महीने की कठिन साधना
शनिवार से माघ मेला शुरू हो गया। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। वहीं, करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने एक महीने चलने वाला कठिन तपस्या कल्पवास शुरू किया।
मां गंगा की गोदी में सबकी अपनी कामना, सबका अपना भक्ति-भाव। तंबुओं की नगरी में टेंट की बनी एक छोटी सी कुटिया, जिसमें सीमित सामग्री में सिमटी सकल गृहस्थी। शयन के लिए एक कोने में जमीन पर बिछा पुआल, दूसरे कोने में रसोई और एक कोने में चौकी पर विराजित रामचरित मानस, शंख और भगवान विष्णु का आसान। न कोई सांसारिक मोह-माया न ही कोई खेती-पाती की चिंता। अभिलाषा यही कि जब तक शरीर साथ दे पतित पावनी मां गंगा के निमित्त जीवन समर्पित रहे। जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिले। इसी भक्ति-भाव और अक्षय पुण्य की कामना के साथ माघ मास के पहले स्नान पर्व पर शनिवार को लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं ने कल्पवास का संकल्प लिया।
ब्रह्ममुहूर्त में गंगा स्नान कर कल्पवासियों ने मां गंगा का पूजन किया। घाट पर दीप, फल, पुष्प, मिष्ठान, नैवेद्य अर्पित कर संकल्प पूर्ण होने की कामना की। तीर्थपुरोहित को यथाशक्ति अन्न, वस्त्र, द्रव्य आदि दान किया। स्नान-दान के बाद शिविर में हवन-पूजन कर मानस का पाठ, श्रीमद्भागवत पाठ व भजन-कीर्तन किया। शाम को पंडालों में सत्संग सुनने पहुंचे। कल्पवास के पहले दिन स्नान के लिए घर से आए लोगों के कारण शिविरों में चहल-पहल रही।
मेले में नौकरी के साथ कल्पवास की साधना
अन्नपूर्णा मार्ग पर कल्पवास कर रहे करछना के जटाशंकर पांडेय मेला में राजस्व निरीक्षक का दायित्व संभाल रहे हैं। लेकिन वे अपने पिता माधव प्रसाद पांडेय के साथ कल्पवास भी करते हैं। स्नान-दान व स्वल्पाहार के बाद ड्यूटी पर चले जाते हैं और शाम को शिविर में आकर पिताजी की सेवा करते हैं। जटा शंकर का कहना है कि कल्पवास का यह भी नियम है कि मेला क्षेत्र में ही प्रवास जरूरी है। वह मैं कर रहा हूं, लेकिन अपने शासकीय दायित्व को निष्ठा से निभा रहा हूं। इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य माधव प्रसाद 20 साल से कल्पवास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कल्पवास से मिली आत्मिक शक्ति से शारीरिक परेशानियां कमजोर हो जाती हैं।
कल्पवासियों की सेवा कर कमा रहे पुण्य
सेक्टर पांच में मेजा के देवी प्रसाद मिश्र पत्नी राज कुमारी के साथ कल्पवास कर रहे हैं। देवी प्रसाद ने बताया कि महाकुम्भ में कल्पवास का संकल्प लिया था। स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण इस बार लगा कि कल्पवास का संकल्प अधूरा रह जाएगा। लेकिन बहू डिंपल ने साहस बढ़ाया और सेवा करने के लिए बच्चों के साथ वह खुद साथ में आ गयीं। उन्होंने बताया कि सुबह चार बजे स्नान किया। घाट पर मां गंगा को पूड़ी, मिष्ठान अर्पित कर हवन-पूजन किया। भजन-कीर्तन व सत्संग में मन इतना रम गया कि घर-गृहस्थी की चिंता खत्म हो गयी। अन्नपूर्णा मार्ग पर कल्पवास कर रहे शिकरो कोरांव के रहने वाले ज्ञान शंकर के साथ उनका बेटा और पौत्र भी सेवा करके पुण्य प्राप्त कर रहे हैं।
पंचायत चुनाव की छूट गई चर्चा
करछना के शेष मणि पांडेय ने बताया कि कल्पवास करने से पूरी दिनचर्या बदल गई। गांव में अलाव के सामने बैठकर पंचायत चुनाव की चर्चा छूट गई। घर पर रोज सुबह और शाम को बस प्रधानी के चुनाव पर ही बातचीत होती रहती थी। कोहड़ोर के रहने वाले दुर्गा प्रसाद पांडेय ने बताया कि घर पर गर्म पानी से स्नान करता था, लेकिन यहां तीन बार ठंडे जल से स्नान करना होगा।
टेंट और शौचालय के लिए परेशान रहे कल्पवासी
मेला क्षेत्र के सेक्टर तीन और पांच के कई शिविरों में शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं है। कल्पवासी राम अधार दुबे ने बताया कि मेला कार्यालय में शिकायत भी की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। शिविर में गेट के पास लगा टेंट भी फटा हुआ है। टेंट को कोई सपोर्ट भी सही नहीं मिला है जिससे हवा चलने पर गिर जाएगा। सेक्टर पांच की कल्पवासी सुशीला ने बताया कि शिविर में शौचालय नहीं बना है।

लेखक के बारे में
Pawan Kumar Sharmaपवन कुमार शर्मा पिछले चार वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े हैं। डिजिटल मीडिया में काम करते हुए वह उत्तर प्रदेश की राजनीति, क्राइम, सरकारी योजनाओं और टूरिज्म से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से लिखते हैं। इससे पहले पवन एबीपी न्यूज के साथ बतौर फ्रीलांसर काम कर चुके हैं। पवन ने नई दिल्ली स्थित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इससे पहले क्राइस्ट चर्च कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। ग्राउंड रिपोर्टिंग और अकादमिक समझ के साथ पवन तथ्यात्मक, संतुलित और पाठक-केंद्रित समाचार लेखन करते हैं।
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