लखनऊ का एसजीपीजीआई बनेगा अति आधुनिक अस्पताल, एम्स जैसी सुविधा होगी, उच्च स्तरीय समिति बनी
लखनऊ का एसजीपीजीआई अति आधुनिक अस्पताल बनेगी। नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। इसमें अवनीश अवस्थी, धीमान के अलावा विषय विशेषज्ञ भी शामिल हैं। यहां एम्स के बाद क्वार्टनरी केयर सुविथाएं होंगी। यूपी के बजट में इसके लिए पैसे का प्रावधान किया जाएगा।

यूपी के एसजीपीजीआई को क्वार्टनरी केयर का अति विशिष्ट अस्पताल बनाने की कवायद प्रदेश सरकार ने शुरू कर दी है। इसके लिए नीति आयोग के सदस्य विनोद पॉल की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। इसी समिति की देखरेख में इस पूरी परियोजना को अमलीजामा पहनाया जाएगा। हब एंड स्पोक मॉडल के जरिए प्रदेश के अस्पताल पीजीआई से जुड़ेंगे। फिर टेली आईसीयू सुविधा के जरिए वहां भर्ती गंभीर मरीजों को भी विशेषज्ञों से इलाज मिल सकेगा।
प्रदेश के तमाम अस्पतालों में अभी प्राइमरी, सेकेंडरी और टर्शरी केयर की सुविधा ही उपलब्ध है। मगर जल्द राजधानी का एसजीपीआई एम्स के बाद क्वार्टनरी केयर की सुविधा उपलब्ध कराने वाला अति विशिष्ट अस्पताल बन जाएगा। देश के राज्यों के स्तर पर यह पहला प्रयोग होगा। प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने के लिए समिति का गठन किया है। विनोद पॉल की अध्यक्षता वाली इस समिति में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव कृतिका शर्मा, एसजीपीजीआई के निदेशक डा. आरके धीमान शामिल हैं। इसके लिए तमाम विशेषज्ञों को समिति में जगह दी गई है।
उच्च स्तरीय इलाज के साथ भविष्य की बीमारी भी पता चलेगी
इस योजना के तहत पीजीआई में बेहद अत्याधुनिक व उच्च स्तरीय इलाज की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। एआई युक्त डायग्नोस्टिक सर्विस शुरू की जाएगी। इसकी मदद से निकट भविष्य में होने वाली बीमारियों का भी पता लगाया जा सकेगा। एक ही बीमारी के मरीजों का ट्रीटमेंट भी उनके शरीर की जरूरतों के हिसाब से हो सकेगा। उधर, विभागीय सूत्रों की मानें तो बुधवार को विधानमंडल में पेश होने वाले प्रदेश के बजट में भी इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए बजट प्रावधान किया जाएगा।
डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम और शोध पर केंद्रित होगा नया ढांचा
क्वार्टनरी केयर सेंटर बनने के साथ ही एसजीपीजीआई में जीनोम सीक्वेंसिंग, रोबोटिक सर्जरी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट की क्षमताओं को विश्वस्तरीय मानकों तक ले जाने की तैयारी है। इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका 'डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम' होगा, जिसके तहत मरीज का डेटा पूरी तरह क्लाउड-बेस्ड होगा। इससे प्रदेश के दूर-दराज के जिलों के डॉक्टर पीजीआई के विशेषज्ञों के साथ लाइव सर्जिकल परामर्श कर सकेंगे।
इसके साथ ही, संस्थान में एक विशेष 'प्रिसिजन मेडिसिन' यूनिट स्थापित की जाएगी, जो केवल लक्षणों के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की आनुवंशिक संरचना (Genetic makeup) के आधार पर दवाइयां और उपचार तय करेगी। यह पहल न केवल रेफरल सिस्टम के बढ़ते दबाव को कम करेगी, बल्कि यूपी को 'मेडिकल टूरिज्म' के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी स्थापित करेगी।
लेखक के बारे में
Yogesh Yadavयोगेश यादव हिन्दुस्तान में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर हैं।
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