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अराजकता का वातावरण पैदा करने वालों के खिलाफ संवाद महत्वपूर्ण: योगी

अराजकता का वातावरण पैदा करने वालों के खिलाफ संवाद महत्वपूर्ण: योगी

संक्षेप:

Lucknow News - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित 26वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड में शिक्षा को वैश्विक लक्ष्यों का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि संवाद और शिक्षा ही दुनिया की समस्याओं का समाधान कर सकती हैं। अराजकता के वातावरण में सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बातें बेमानी हैं।

Nov 21, 2025 06:07 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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-दुनिया के समक्ष रखे गए सभी लक्ष्यों में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण: योगी आदित्यनाथ -मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (आईसीसीजेडब्ल्यू) के उद्घाटन समारोह में दिया बड़ा संदेश -मुख्यमंत्री ने सिटी मॉन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को वैश्विक मंच पर आगे बढ़ाने का किया आह्वान -हमें विश्व की वास्तविक समस्या को कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए -दुनिया में जहां अशांति और अराजकता है, वहां सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात लगती है बेमानी: योगी -स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए संवाद को बाधित किया जाता रहा हैः मुख्यमंत्री -मुख्यमंत्री बोले: बस्ते के बोझ से बच्चे डिप्रेस्ड न हों, इसके बारे में भी हमें करना होगा विचार लखनऊ, विशेष संवाददाता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अराजकता का वातावरण पैदा करने वालों के खिलाफ संवाद महत्वपूर्ण व जरूरी है।

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स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए संवाद को बाधित किया जाता रहा है। जहां दुनिया में अशांति और अराजकता है, वहां सस्टेनेबल विकास की बात करना बेमानी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लखनऊ में सिटी मॉन्टेसरी स्कूल द्वारा आयोजित 26वें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ चीफ जस्टिसेस ऑफ वर्ल्ड (आईसीसीजेडब्ल्यू) के उद्घाटन समारोह में ये बातें रखीं। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम् यानी 'होल वर्ल्ड इज वन फैमिली, हैज बीन बेसिक फिलॉसफी ऑफ इंडिया फॉर थाउजैंड्स ऑफ ईयर्स' की भावना से विश्व को अवगत कराते हुए इसे भारत की हजारों वर्षों की परंपरा करार दिया। कहा कि संकट के समय शरण देने और आगे बढ़ाने में भारत ने हमेशा योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें यूएन की उस घोषणा को भी स्मरण करना होगा, जिसमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट लक्ष्य के बारे में दुनिया के देशों से आह्वान किया गया था। सस्टेनेबल लक्ष्य शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल संसाधन, रोजगार-कौशल विकास, पर्यावरण और वन संपदा की रक्षा के विषयों पर आधारित हैं। इन 16 लक्ष्य में शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। कभी न भूलें क्या है वास्तविक समस्या मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें ये कभी विस्मृत नहीं करना चाहिए कि विश्व की वास्तविक समस्या क्या है। जब हम इसकी तह में जाते हैं तो लगता है कि डायलॉग एक-दूसरे के बीच में नहीं है। स्वयं के वर्चस्व को स्थापित करने के लिए डायलॉग को बाधित किया गया। ये कॉन्फ्रेंस अपने आप में डायलॉग का एक माध्यम है। दुनिया के न्यायाधीशों के माध्यम से यह मानवता और उन लोगों के लिए भी एक उद्घोषणा है कि जिन्होंने अपना वर्चस्व स्थापित करने के लिए अराजकता का वातावरण पैदा करने का प्रयास किया। समस्याओं के समाधान के लिए हर प्रयास करने की जरूरत मुख्यमंत्री ने कहा दुनिया में जहां अशांति व अराजकता है, वर्चस्व को लेकर एक-दूसरे की संप्रभुता को हड़पने की होड़ हो, वहां पर एजुकेशन, हेल्थ तथा सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात बेमानी सी दिखती है। उन स्थितियों में हम सभी को इस बारे में विचार करना चाहिए कि कैसे इन समस्याओं के समाधान के लिए हर एक स्तर पर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अगर एक संस्था अपने स्तर पर पिछले 25 वर्षों से इस प्रयास को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, तो क्यों नहीं अन्य स्तर पर यह प्रयास आगे बढ़ाया जा सकता है? योगी ने प्रदेश की राजधानी में अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब हम दुनियाभर से जुड़े न्यायविदों के इस सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में उपस्थित हुए हैं, ऐसे में सीएमएस लखनऊ के संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी की स्मृतियों को नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने विश्व की एकता, अखंडता व न्याय के लिए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेस ऑफ चीफ जस्टिसेस के कार्यक्रम का लंबे समय से आयोजन किया तथा इसके माध्यम से एक-दूसरे को समझने व नया संदेश देने का काम किया था। बड़ी लकीर खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका का करना होगा निर्वहन मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर हमारे सामने दुनिया के अंदर की प्रतिस्पर्धा चुनौती के रूप में है, तो वहीं हमारे सामने जलवायु परिवर्तन और उससे उत्पन्न होने वाला संकट भी नई चुनौती के रूप में हैं। उन्होंने कहा कि हमारे सामने इमर्जिंग टेक्नोलॉजी जीवन को सहज और सरल करने में जहां उपयोगी भूमिका का निर्वहन कर रही है, वहीं इसके द्वारा उत्पन्न अभूतपूर्व कानूनी चुनौतियां भी हम सभी के सामने खड़ी हुई हैं, जिसमें साइबर क्राइम, डाटा चोरी और अन्य समस्याएं प्रमुख हैं। भारत की सोच निकाल सकती है वैश्विक चुनौतियों का रास्ता मुख्यमंत्री ने कहा कि हम केवल उन पुरानी बातों तक सीमित न रहें, बल्कि आज की उन ज्वलंत समस्याओं के बारे में भी हमें विचार करते हुए जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य के संकट, वैश्विक आतंकवाद जैसे मुद्दों पर मुखर होकर यूएन जैसे प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग करना चाहिए। दुनिया के लिए वर्तमान में जलवायु परिवर्तन की चुनौती हो या फिर इसके माध्यम से उत्पन्न उन वैश्विक संकट के समाधान का रास्ता, भारत की सोच के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाल सकती है। आंख बंद करने से नहीं मिलेगा हल मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया ने इस युग की सबसे बड़ी महामारी कोविड को झेला है। एक पुरानी कहावत है कि आग दूसरे के घर में लगी है और आप निश्चिंत होकर के सो रहे हैं, तो यह मान कर के चलिए कि कल वह आपको भी अपने आगोश में ले सकती है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया आज जिन चुनौतियों से जूझ रही है, फिर चाहे वह जलवायु परिवर्तन का हो या फिर साइबर सिक्योरिटी व आतंकवाद का हो, अगर कोई भी देश या कोई भी समाज इन सभी मुद्दों से आंखें बंद करके दुनिया की मानवता के सामने संकट खड़ा कर रहा है, तो यह मान कर चलिए कि यह संकट उसको भी एक दिन अवश्य निगलेगा। इस दौरान विश्व के सम्मुख आ रही विभिन्न प्रकार की चुनौतियों की भी चर्चा की गई। वहीं ईयू, रशियन फेडरेशन और भारत के डेलिगेशन ने भी मॉडल सेशन में अपना पक्ष रखा। भारत के डेलिगेशन ने 'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया' के थीम पर अपना पक्ष रखा। कार्यक्रम में सीएमएमस के संस्थापक निदेशक डॉ. जगदीश गांधी के विजन को भी याद किया गया। इस दौरान डॉ. जगदीश गांधी ग्लोब का उद्घाटन भी किया गया। वहीं, कानपुर रोड कैंपस के छात्र-छात्राओं ने विश्व एकता प्रार्थना के माध्यम से पृथ्वी पर एकता की कामना की। कार्यक्रम में सीएमएस की निदेशक तथा आईसीसीजेडब्ल्यू की कन्वीनर प्रो. सुनीता गांधी किंगडम ने जोर दिया कि भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना में ही विश्व का कल्याण निहित है। उन्होंने 80 साल पहले बने यूएन चार्टर में भी वर्तमान व भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बदलाव की वकालत की। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने मार्टिन लूथर किंग, व्हिना कूपर, नेल्सन मंडेला तथा मदर टेरेसा जैसी कई महान विभूतियों की ओर से विश्व के कल्याण की कामना की। कार्यक्रम में क्रोएशिया के पूर्व राष्ट्रपति, लेसोथो के पूर्व प्रधानमंत्री, वर्तमान व पूर्व राष्ट्रप्रमुख, सीएमएस की संस्थापक निदेशक डॉ. भारती गांधी, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल के अध्यक्ष डॉ. रोजर किंगडम, भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला तथा विभिन्न देशों से आए मुख्य, उप मुख्य न्यायाधीश समेत डेलिगेट्स उपस्थित रहे।