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कार्यसंस्कृति बदले जिलों के अधिकारी-योगी आदित्यनाथ

विशेष संवाददाता-राज्य मुख्यालय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने कार्यालयों को साफ रखें। कार्यसंस्कृति को बदले। ऐसे बदलाव लाएं कि जनता को महसूस हो।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग की सराहना करते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में बुनियादी शिक्षा में सुधार दिखने लगा है।

योगी आदित्यनाथ संभवता पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने सीधे डीआईओएस और बीएसए के साथ बैठक की है। उन्होंने विभागीय योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि कितने ऐसे डीआईओएस या बीएसए हैं जिन्होंने प्रधानाचार्यों के साथ बैठक की है? डीआईओएस के हाथ खड़ा करने पर कहा कि बोर्ड परीक्षाओं में की होगी लेकिन इसे नियमित कीजिए। उन्होंने कहा कि बीएसए और डीआईओएस प्रधानचार्यों के साथ नियमित बैठक करें क्योंकि योजनाओं की असली क्रियान्वयन तो स्कूलों में ही होना है।

उन्होंने 25 जून से एक जुलाई के बीच बैठक करने के निर्देश देते हुए कहा कि 25 जून से सभी स्कूल खुल जाने चाहिए, भले ही विद्यार्थी स्कूल में 1 जुलाई से आयें। इस अवधि में स्कूल में साफ-सफाई की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित कर ली जानी चाहिए। विद्यार्थियों के स्कूल आने से पहले विद्यालय गन्दगी से मुक्त होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि डीआईओएस और बीएसए अपने कार्यालयों को साफ रखें। उनके कार्यालयों में पाक की पीक और गंदगी साफतौर पर दिखती है। कार्यसंस्कृति में बदलाव जरूरी है। वहीं उन्होंने शिक्षकों के तबादले में पैसा लेने पर तंज कसते हुए कहा कि जो भी शिक्षकों से तबादले में पैसा खाएगा वह कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सफल प्रशासन के लिए संवाद जरूरी है। जिस तरह शासन के अधिकारी जिला स्तर के अधिकारियों से संवाद कर रहे हैं, उसी तरह जिला स्तर के अधिकारियों को भी नीचे संवाद स्थापित करना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बीते दो वर्षों में बुनियादी शिक्षा में सुधार हुआ है। 46 हजार शिक्षकों की नियुक्ति हुई है और 69 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कायाकल्प योजना के तहत 90 हजार विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ी हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई तरह के प्रयोग हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि माध्यमिक स्कूलों में भी प्रबन्धक और डीआईओएस को मानदेय पर शिक्षक नियुक्त करने के अधिकार दिये गये हैं। नकल पर नियंत्रण हुआ है। उच्च शिक्षा में सत्र नियमित हुआ है। समय पर परीक्षाएं हुई हैं और परिणाम भी समय पर आये हैं। इस दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। इसके लिए शिक्षा अधिकारियों द्वारा रुचि लेकर कार्य किये जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों की तरह महाविद्यालयों, माध्यमिक व प्राथमिक स्कूलों में भी शैक्षिक कलेण्डर लागू किये जाने जरूरत पर बल देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने महापुरुषों की जन्म जयंती तथा पुण्यतिथि पर होने वाले अवकाशों को समाप्त किया है। इन अवसरों पर स्कूलों में सम्बन्धित महापुरुषों के व्यक्तित्व व कृतित्व के बारे में विद्यार्थियों को बताना चाहिए।

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