DA Image
22 अक्तूबर, 2020|6:28|IST

अगली स्टोरी

गांवों के सालों पुराने भू-मानचित्र बदले जाएंगे

default image

- ग्रामीणों को गाटा या खसरा संख्या पता करना होगा आसान- राजस्व परिषद पुराने खराब हो चुके नक्शों को नया कराएगा-राजस्व विवादों में आएगी कमीप्रमुख संवाददाता- राज्य मुख्यालयगांवों में रहने वालों को अब अपनी जमीन का खसरा या गाटा संख्या या फिर सीमा रेखा पता करना आसान होगा। लेखपाल या फिर तहसीलदार नक्शा पुराना होने या फिर नष्ट होने का बहाना नहीं बना पाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने भू-मानचित्रों को बदला जाएगा। राजस्व परिषद ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में पत्र भेजते हुए कहा है कि अगर उनके यहां का भू-मानचित्र काफी पुराना हो गया है तो उसे परिषद को भेजते हुए ठीक कराया जाए।विवाद का नहीं रहेगा झंझटजिला प्रशासन राजस्व परिषद के बनाए हुए नक्शों को ही अधिकृत मानता है। इसके आधार पर ही जमीन का वास्तविक हिस्सा या सीमांकन किया जाता है। इसके आधार पर ही गाटा और खसरा संख्या का मिलान किया जाता है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में काफी पुराने भू-मानचित्र हैं। इनमें से कई नष्ट हो गए हैं या फिर काफी जर्जर हो गए हैं। इसके चलते इससे सीमाओं का मिलान नहीं हो पा रहा है और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जरूरत के आधार पर इस नक्शे की कापी नहीं मिल पाती है। राजस्व परिषद इसीलिए चाहता है कि जर्जर हो चुके पुराने भू-मानचित्र को ठीक करा दिया जाए।पुराने के आधार पर बनेगा नयारीना सिंह प्रभारी अधिकारी ने प्रदेश के सभी जिलों को भेजे निर्देश में कहा है कि जिला मुख्यालयों के राजस्व अभिलेखागार में रखे भू-मानचित्र नष्ट या इतने जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं कि उनमें अंकित गाटा संख्या और प्रदर्शित सीमा रेखाओं की सही जानकारी नहीं हो पाती है। इसके कारण जनता और शासकीय काम रुक सकते हैं। ऐसे भू-मानचित्रों की प्रतिलिपियां परिषद के मानचित्रालय में उपलब्ध भू-मानचित्रों से बनवा कर जिले के राजस्व अभिलेखाकार में रखा जाए। उन्होंने कहा है कि इस संबंध में जिलाधिकारियों को पहले भी राजस्व परिषद से निर्देश दिया जा चुका है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया या। इसलिए रोस्टर के आधार पर जिले भू-मानचित्र राजस्व परिषद को उपलब्ध कराएंगे।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Years old terrain maps of villages will be replaced