लखनऊ की पहचान नवाबी विरासत ही नहीं विश्व प्रसिद्ध स्वाद भी
Lucknow News - आज विश्व धरोहर दिवस 'जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया' थीम के तहत मनाया जाएगा। लखनऊ को यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी का दर्जा मिला है, जिससे यहां की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के प्रयास बढ़ेंगे। यह दिन नई पीढ़ी को अपनी विरासत के महत्व के प्रति जागरूक करने का अवसर है।

विश्व धरोहर दिवस आज -जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया थीम पर मनाया जाएगा विश्व धरोहर दिवस-नई पीढ़ी को जोड़ना व विरासत के ऐतिहासिक महत्व को लेकर युवाओं को जागरूक करनालखनऊ। वरिष्ठ संवाददातालखनऊ की पहचान केवल नवाबी विरासत, ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, बल्कि यहां की गंगा-जमुनी तहजीब और विश्व-प्रसिद्ध स्वाद की भी है। वर्ष 2026 में विश्व धरोहर दिवस का यह उत्सव और भी खास हो गया है क्योंकि लखनऊ को यूनेस्को की ओर से क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी के रूप में वैश्विक पहचान मिली है। ऐसे में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया थीम पर विश्व धरोहर दिवस मनाया जाएगा।
जहां ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा पर केंद्रित रहेगा।जीवित विरासत केवल पत्थरों की इमारतों की नहीं बल्कि उन परंपराओं, कलाओं और सांस्कृतिक प्रथाओं की रक्षा करना है। नई पीढ़ी को जोड़ना है और विरासत के ऐतिहासिक महत्व को लेकर युवाओं को जागरूक करना हैं। ताकि नई पीढ़ी के युवा नवाबी विरासत और वास्तुकला से रूबरू हो सके। यूनेस्को ने लखनऊ की 2000 साल पुरानी पाक परंपरा, विशेषकर टुंडे कबाब, अवधी बिरयानी और मलाई गिलोरी जैसे व्यंजनों को विश्व धरोहर का हिस्सा माना है। पर्यटन विभाग इस मौके पर हेरिटेज थ्रू माई लेंस जैसे अभियान शुरू किए हैं।ऐतिहासिक धरोहरों में बड़ा इमामबाड़ा सबसे प्रमुखलखनऊ की पहचान ऐतिहासिक स्मारकों से है जिनमें बड़ा इमामबाड़ा सबसे प्रमुख है। 1784 में नवाब आसफउद्दौला ने अकाल राहत कार्य के रूप में इस इमारत को निर्मित किया था। यह इमारत अपनी अद्भुत भूलभुलैया और बिना किसी खंभे के टिकी विशाल छत के लिए विख्यात है। रूमी दरवाजा और छोटा इमामबाड़ा अवधी वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं। ब्रिटिश रेजीडेंसी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शौर्य गाथा सुनाते हैं। जहां बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया था।अदब, खानपान और प्रेमपूर्ण संस्कृति भी धरोहरलखनऊ आधुनिकता और परंपरा का संगम हैं। यहां का स्वाद और संस्कृति की गूंज वैश्विक है। लखनऊ की असली विरासत केवल पत्थर की इमारतों में नहीं, बल्कि यहां के लोगों के अदब, खानपान और प्रेमपूर्ण संस्कृति में जीवित है। चौक की गलियों में आज भी चांदी के वर्क की खनक और इत्र की खुशबू वही एहसास कराती है। वहीं विधानसभा भवन और आधुनिक गोमती रिवर फ्रंट शहर के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं।वर्जनविश्व धरोहर दिवस हमें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने की प्रेरणा देता है। हमें गर्व है कि लखनऊ को यूनेस्को द्वारा क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी के रूप में जो अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है। वह हमारी सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा है। इस पहचान के जरिए प्रदेश के खान-पान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।जयवीर सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री
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