शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों में लगने से परिषदीय बच्चों की पढ़ाई चौपट-शिक्षक संघ

Jan 11, 2026 08:55 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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Lucknow News - उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने पर चिंता व्यक्त की है। शिक्षण कार्य केवल नाम मात्र रह गया है। शिक्षक निर्वाचन ड्यूटी और अन्य कार्यों में लगे हुए हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। परीक्षा और आकलन कैसे होंगे जब विद्यालय में शिक्षक ही नहीं हैं?

शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों में लगने से परिषदीय बच्चों की पढ़ाई चौपट-शिक्षक संघ

लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने को लेकर गहरी चिन्ता व्यक्त की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने बताया है कि प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण कार्य केवल नाम मात्र की चल रही है। उन्होंने बताया कि जून-जुलाई में हुई स्कूल पेयरिंग फिर टीईटी मुद्दा,ऑनलाइन हाजिरी के बाद अब सरप्लस समायोजन के चक्कर में शिक्षक खींचा-तानी में मानसिक तौर पर परेशान हैं, जिसका असर बच्चों की पढ़ाई पर साफ देखा गया है। दो महीने से चल रहे एसआईआर ने शिक्षा व्यवस्था को तो चौपट ही कर दिया।

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शिक्षक और शिक्षामित्र के बीएलओ में ड्यूटी लगने से नौनिहालों की शिक्षा केवल कागजों पर चलती नजर आ रही है। कहीं एक शिक्षक तो कहीं शिक्षा मित्र के सहारे चल रहे स्कूल में बच्चे आते हैं और खेलकूद कर चले जाते हैं। अकेले लखनऊ में तीन हजार से अधिक शिक्षक व शिक्षामित्र बीएलओ में लगे हैं। शिक्षक संगठनों ने कई बार शिक्षकों को निर्वाचन ड्यूटी से हटाने की मांग की लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसे सिरे से नकारते नजर आए, यही नहीं बीएलओ के साथ शिक्षक बोर्ड परीक्षा ड्यूटी ,प्रतियोगिता परीक्षाएं, पल्स पोलियो जैसे सैकड़ों गैर शैक्षणिक कार्य में लगा दिए जाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। अभी परिषदीय विद्यालयों में 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षाएं आरंभ हो रही हैं, उसके बाद 27 जनवरी से निपुण आकलन होना है लेकिन प्रश्न यह है कि जब विद्यालय में शिक्षक ही नहीं है तो परीक्षाएं और आकलन कैसे होगा क्योंकि एसआईआर का काम तो 28 फरवरी तक होना है, जिसका जवाब जिम्मेदार देने से कतरा रहे हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक का मूल कार्य अध्यापन करना है किंतु आज इनसे शिक्षण कार्य के अतिरिक्त सारे गैर शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं, शिक्षक के आवाज उठाने पर अधिकारी वेतन रोकने,सस्पेंड करने जैसी मानसिक प्रताड़ना देते हैं।

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