
‘वंदे मातरम्’ के माध्यम से स्कूली बच्चों में राष्ट्रप्रेम की चेतना को स्थायी बनाने का प्रयास
संक्षेप: Lucknow News - लखनू, प्रमुख संवाददाता। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ अपने 150 वर्ष
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ अपने 150 वर्ष पूर्ण होने पर स्कूली बच्चों के बीच देशभक्ति की नई मिसाल पेश कर रहा है। 150वीं वर्षगांठ पर स्कूलों में इस राष्ट्रगीत का सामूहिक गान किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 75 जिलों के लगभग 1.32 लाख परिषदीय विद्यालयों के 1.48 करोड़ विद्यार्थियों में से 90 लाख 87 हजार से अधिक इसमें प्रतिभाग कर चुके हैं। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आरंभ किया गया, यह अभियान वर्ष भर संचालित किया जाएगा, जिसके तहत प्रदेश के विद्यालयों में विविध सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस आयोजन में वर्ष के अंत तक सभी नामांकित विद्यार्थियों को शामिल करने का विभाग ने लक्ष्य रखा है।

इसकी शुरुआत बीते 7 नवम्बर को उस समय हुई, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर देशव्यापी कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उसी क्रम में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लगभग 1.33 लाख विद्यालयों में एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का गान अभियान की शुरुआत की गई, जिसके क्रम में विद्यालयों के प्रांगण आज भी “सुजलां सुफलाम्...” के स्वर से गूंज रहे हैं। स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी की माने तो प्रदेश के हर परिषदीय विद्यालय में बच्चों के स्वर से जो देशभक्ति गूंज रही है, वह हमारे शैक्षिक तंत्र की आत्मा को दर्शाती है। यह पहल विद्यार्थियों में आत्मगौरव, अनुशासन और एकता की भावना को गहराई से स्थापित करेगी। कोट:- यह आयोजन केवल गीत का गायन नहीं, बल्कि उस भावना का पुनर्जागरण है, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को ऊर्जा दी थी। ‘वंदे मातरम्’ के माध्यम से हम बच्चों में राष्ट्रप्रेम की चेतना को स्थायी बनाना चाहते हैं। ‘वंदे मातरम्’ के इस अमृत पर्व को उत्तर प्रदेश ने केवल गीत के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के जनांदोलन के रूप में परिवर्तित कर दिया है। यह एक ऐसा आयोजन बनकर उभरा है, जो बच्चों के हृदय में देशभक्ति के स्वर को जीवित रखेगा। - संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

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