
संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए प्रतिभागियों को मिली प्रोत्साहन वृत्ति
Lucknow News - उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज सम्मान समारोह में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहनवृत्ति और पाठ्य सामग्री प्रदान की गई। मुख्य अतिथि डॉ. राम सुमेर यादव ने संस्कृत के महत्व पर प्रकाश डाला।
लखनऊ, कार्यालय संवाददाता उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से आयोजित राज्य स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज सम्मान समारोह में विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। विजेताओं को संस्थान द्वारा संस्कृत अध्ययन एवं प्रोत्साहनवृत्ति दी गई। पांच प्रतियोगिताओं के विजेताओं को चार हजार और एक हजार की पाठ्य सामग्री प्रदान की गई। श्लोकरल्त्याक्षरी प्रतियेागिता में 14 प्रतिभागियों को प्रोत्सान वृत्ति दी गई। जिनमें शशांक पाण्डैय, कृष्णा पोखरियाल, शिवानी राजकमल तिवारी, आर्यन मिश्रा, कृतिा, सचिन, वंश, उत्कर्ष, मिनाक्षी पाण्डेय, वरुण गुप्ता, अंश मिश्रा, शुभजीत राम त्रिपाठी, अनुज कुमार, हर्षित शुक्ला, कार्तिक, योगेश्वर शुक्ला, राममोहन, अभिषेक कुमार एवं वंश वर्मा का नाम शामिल रहा। इसी प्रकार लघुसिद्धांत कौमुदी कठस्थापाठ प्रतियोगिता में आनन्द उपाध्याय, अमित पाण्डेय, मयंक तिवारी, ऋषभ, सूर्यांश पाण्डेय, दुर्गेश पाण्डेय, देव, शिवाकांत, दिव्यांश मिश्रा, विकास ओझा, प्रियम तिवारी, करुणेश, हर्ष पाण्डेय, हर्षित कुमारी तिवारी, विवेक कुमार, अभय कुमार, अनुराग पाण्डेय, ओमपति त्रिपाठी, देवेन्द्र नारायण शुक्ल एवं दीपक शर्मा को प्रोत्साहन वृत्ति मिली।
इसी प्रकार अमरकोश कण्ठस्थपाठ एवं अष्टाध्यायी कठस्थपाठ प्रतियोगिता के उत्कृष्ट प्रतिभागियों को भी प्रोत्साहन वृत्ति दी गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा. राम सुमेर यादव ने कहा कि संस्कृत हमारी प्राचीन संस्कृति , ज्ञान और विज्ञान की आधारशिला है। संस्थान के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दिनेश कुमार मिश्र ने बताया कि प्रोत्साहन वृत्ति का उदेद्दय है कि छात्रों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़े और संस्कृत अध्ययन कको प्रोत्साहित किया जा सके।

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