
भ्रष्टाचार करने वाले चार अधिकारी बर्खास्त, तीन की पेंशन से होगी कटौती
संक्षेप: Lucknow News - उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। समाज कल्याण विभाग ने चार अधिकारियों को बर्खास्त किया और तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन में कटौती करने का आदेश दिया। ये मामले पिछले डेढ़ दशक से लंबित थे। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
भ्रष्टाचार पर प्रहार... -डेढ़ दशक से लंबित थे कुछ मामले, आरोपियों से सरकारी धन की होगी रिकवरी -समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) की निगरानी में हुई जांच में हुआ बड़ा खुलासा -श्रावस्ती, मथुरा, शाहजहांपुर और औरैय जनपदों में हुए घोटाले पर कार्यवाही लखनऊ, विशेष संवाददाता प्रदेश की योगी सरकार ज़ीरो टोलरेंस की निति को अपनाते हुए भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर लगातार प्रहार कर रही है। इसी सिलसिले में समाज कल्याण विभाग ने रविवार को भ्रष्टाचार के आरोपी चार अधिकारियों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई करते हुए तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों के पेंशन से कटौती का निर्देश दिया है। इनमें से भ्रष्टाचार के कुछ मामले पिछले डेढ़ दशक से भी अधिक समय से लंबित पड़े थे।

आरोपी अधिकारियों में से तीन सेवानिवृत्त हो गए हैं। इनसे सरकारी रकम की वसूली के साथ पेंशन से स्थायी कटौती करने का निर्देश दिया गया है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतन्त्र प्रभार) असीम अरुण की निगरानी में हुई जांच के बाद आरोपी अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। विभागीय मंत्री ने सभी मामलों में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश दिया है। इसके तहत श्रावस्ती की तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी मीना श्रीवास्तव मार्च 2008 से 12 अप्रैल 2012 तक श्रावस्ती में तैनात रहीं। उन पर तैनाती के दौरान मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना के तहत प्राप्त आवेदन को बिना सक्षम स्तर से स्वीकृत कराये डाटा फीडिंग करने के आरोप हैं। शादी बीमारी योजना में लाभार्थियों की स्वीकृत सूची में उनके खाता संख्या में हेर-फेर करने का आरोप है। उनकी छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि के गलत व्यय में शामिल होने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इसी तरह मथुरा के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी पर कार्रवाई की गई है। उन पर आरोप हैं कि तैनाती के दौरान निजी प्राइवेट आईटीआई संस्थानों को अनियमित तरीके से छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान कर गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई। वहीं 11 मान्यताविहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में गलत ढंग से किया गया। उन्होंने निजी आईटीआई संस्थानों द्वारा दो वर्ष आयु के बच्चों से लेकर 51 वर्ष तक की आयु वाले व्यक्तियों को आईटीआई पाठ्यक्रम में प्रवेश दिला कर धनराशि का गलत ढंग से व्यय किया गया। उन्हें बर्खास्त करने के साथ ही उनसे 19.25 करोड़ रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह हापुड़ के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी संजय कुमार ब्यास वित्तीय वर्ष 2012-13 में शासनादेश में दिए गए निर्देशों की अवहेलना करने के दोषी पाए गए हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं से डेबिट अथारटी लेटर प्राप्त कर छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि छात्र, छात्राओं के बैंक खातों में न ट्रांसफर कर 2.74 करोड़ रुपये की धनराशि शिक्षण संस्थाओं के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर कर दी। इसके अलावा हापुड़ में दशमोत्तर छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति की विभागीय वेबसाइट पर छात्र-छात्राओं के अपलोड विवरण में से सूची प्रिंट कर उसमें फ्ल्यूड लगा कर अभिलेखों में कूटरचना करते हुए छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति में गड़बड़ी की गई। उन्हें बर्खास्तगी के साथ 3.23 करोड़ रुपये की वसूली का निर्देश दिया गया है। इसी तरह शाहजहांपुर के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार तैनाती के दौरान वित्तीय वर्ष 2022-23 में विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के बैंक खाते बदल कर अपात्रों को लाभ पहुंचाने का आरोप है। उन्हें बर्खास्त कर 2.52 करोड़ रुपये की वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह औरैया के सेवानिवृत्त तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी श्रीभगवान पर आरोप हैं कि वह वर्ष 2018 से 2020 तक जनपद में कार्यरत रहे और यहीं से सेवानिवृत्त हुए। उन्होंने वृद्धावस्था पेंशनरों के खातों के नाम में भिन्नता होने पर भी सत्यापन कर दिया। इससे 251 लाभार्थियों के खाते बदल कर अन्य व्यक्तियों के खाते में पेंशन की धनराशि भेजी गई। जांच में 33,47,400 की शासकीय क्षति पाई गई। उन पर गबन की धनराशि 33 लाख 47 हजार 400 में से 20 लाख रुपये की वसूली अधिकारी के देयकों से किये जाने तथा उनकी पेंशन से स्थाई रूप से 10 प्रतिशत की कटौती करने का निर्देश दिया गया है। इसी तरह मुथरा के सेवानिवृत्त जिला समाज कल्याण अधइकारी विनोद शंकर तिवारी पर आरोप हैं कि उन्होंने वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक 11 मान्यता विहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में की गई। इसी तरह वर्ष 2018-19 में 20 शिक्षण संस्थानों तथा वर्ष 2017-18 में आठ शिक्षण संस्थानों के कुल 5133 छात्रों ने बिना परीक्षा में शामिल हुए छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में 9.69 करोड़ रुपये प्राप्त किया। उनकी पेंशन से 50 प्रतिशत स्थाई रूप से कटौती करने के साथ ही शासकीय क्षति रुपये 1 .96 करोड़ रुपये के सापेक्ष वसूली करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त मथुरा के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी उमा शंकर शर्मा पर आरोप हैं कि वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक 11 मान्यता विहीन संस्थानों को 2.53 करोड़ रुपये की धनराशि का भुगतान छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में की गई। संस्थाओं द्वारा आईटीआई पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीट के सापेक्ष 5526 अधिक छात्रों की धनराशि का भुगतान अनियमित तरीके से प्राप्त किया गया। उनके खिलाफ पेंशन से 50 प्रतिशत की स्थाई रूप से कटौती करने के साथ शासकीय क्षति के 88 लाख 94 हजार 40 रुपये की वसूली का निर्देश दिया गया है। मंत्री असीम अरुण:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भ्रष्टाचार पर कार्यवाही जारी रहेगी। ऐसे और मामले जो दबे हुए थे, उनमें भी शीघ्र कार्यवाही होगी और एफआईआर भी दर्ज होगी।

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