
सतर्कता, समन्वय और समयबद्ध तैयारी से होगा सफल बाढ़ प्रबंधन: योगी
Lucknow News - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ और अतिवृष्टि की पूर्व-तैयारी की समीक्षा की। उन्होंने सभी तटबंधों, ड्रेनों की समयबद्ध मरम्मत और रियल-टाइम निगरानी प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया। 11 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। जलभराव रोकने के लिए ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग तेज की जा रही है।
-जितनी बेहतर तैयारी होगी होगी, उतने प्रभावी ढंग से होगा चुनौती का समाधान: मुख्यमंत्री -बाढ़/अतिवृष्टि की पूर्व-तैयारी की मुख्यमंत्री ने की समीक्षा, सभी तटबंधों और ड्रेनों की समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करने का निर्देश -नदी की ड्रेजिंग और चैनेलाइजेशन बाढ़ से बचाव का व्यवस्थित उपाय: मुख्यमंत्री -प्रदेश की 8 मुख्य नदी बेसिन से प्रभावित जिलों के लिए व्यापक मॉनसून-प्रबंधन प्लान तैयार, मुख्यमंत्री ने रियल-टाइम निगरानी प्रणाली लागू करने को कहा -11 जिलों के 19 अति संवेदनशील और 12 जिलों के 18 संवेदनशील तटबंधों पर विशेष फोकस, बोले मुख्यमंत्री, किसी भी स्थिति में लापरवाही न हो -10727 ड्रेन और 60047 किमी नेटवर्क की सफाई-ड्रेजिंग तेज, जलभराव रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रगति की समीक्षा की लखनऊ, विशेष संवाददाता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और सफलता से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा।
उन्होंने बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सतर्कता, समन्वय और तय समयसीमा में काम पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन की मूल कुंजी है। मुख्यमंत्री ने ये निर्देश मंगलवार को बाढ़ नियंत्रण के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा) राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आस-पास के जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी-पट्टी और वर्षा पैटर्न का विश्लेषण करते हुए इस वर्ष 12 जनपदों में 18 तटबंधों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 241.58 किमी है। 11 जनपद के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 464.92 किमी है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता पर चल रहे हैं। बैठक में बताया गया कि ग्रामीण इलाकों में जल-निकासी को सुचारु रखने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग कराई जा रही है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई 60,047 किमी है। कई महत्त्वपूर्ण रूटों की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तय समय में पूरे किए जा रहे हैं। यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं, जिससे नदी प्रवाह सुधरेगा और तटीय इलाकों में जलभराव कम होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कहीं नदी के मेन स्ट्रीम में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान होना संभव न हो, तब ही तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाये।

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