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प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक बीज नीति तैयार करें: योगी

प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक बीज नीति तैयार करें: योगी

संक्षेप:

Lucknow News - मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश को प्रमाणित बीजों की कमी नहीं होनी चाहिए और संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त करनी चाहिए। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के विकास और कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रम से जोड़ने के निर्देश दिए। अगले पांच वर्षों में 'सीड पार्क' स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।

Feb 02, 2026 07:17 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, लखनऊ
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-प्रमाणित बीज की कमी न हो, संकर बीजों में बाहरी निर्भरता समाप्त कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाएं -कृषि उत्पादन की असली ताकत अच्छा और भरोसेमंद बीज: मुख्यमंत्री -हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी अनिवार्य करें; मिलावटी और अमानक बीजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश -कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर, उपकार और निजी उद्योग को एक मंच पर लाने का निर्देश, बीज अनुसंधान, नवाचार और किस्म रिलीज़ प्रक्रिया तेज हो -कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास से जोड़ने और हर क्लाइमेटिक ज़ोन में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने के निर्देश -प्रगतिशील किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम से जोड़कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्धता बढ़ाने पर जोर -ट्यूबवेलों का सौर ऊर्जीकरण तेज़ हो, प्रदेश के सोलर पैनल निर्माताओं को प्राथमिकता देने के मुख्यमंत्री के निर्देश -अगले पाँच वर्षों में पाँच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की योजना, टिशू कल्चर लैब्स और प्रमाणित नर्सरी नेटवर्क सुदृढ़ करने के निर्देश लखनऊ, विशेष संवाददाता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कृषि उत्पादन की वास्तविक शक्ति उच्च गुणवत्ता वाले, भरोसेमंद और प्रमाणित बीजों में निहित है।

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उन्होंने कहा है कि प्रदेश के लिए नई और आधुनिक 'बीज नीति' समय की मांग है। भूमि जोत लगातार घट रही है, ऐसे में ध्यान केवल रकबे पर नहीं, बल्कि प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाने पर होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि उच्च उपज, रोग-प्रतिरोधी और जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए ऐसी बीज नीति तैयार की जाए जो आने वाले वर्षों की कृषि चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे। बीज नीति पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने अगले पांच वर्षों के लिए प्रदेश की बीज उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और उपलब्धता को नए स्तर तक ले जाने के लिए ठोस रोडमैप तैयार करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और भंडारण की पूरी प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है, ताकि प्रमाणित बीज की कमी न हो और किसान सशक्त बन सकें। मिलावटी बीजों के प्रति कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं मुख्यमंत्री ने भरोसेमंद बीज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर बीज की एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मिलावटी या अमानक बीजों के प्रति कोई भी ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। किसानों तक पहुंचने वाला हर बीज पैकेट प्रमाणित, परीक्षणित और पूरी तरह मानक होना चाहिए। विकसित करें पांच सीड पार्क फसल विविधीकरण को गति देने के लिए मुख्यमंत्री ने दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा, ज्वार और बागवानी फसलों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की उपलब्धता के लिए विशेष रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। इसी क्रम में प्रदेश में अगले पांच वर्षों में कम से कम पांच ‘सीड पार्क’ स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए। ये सीड पार्क उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और भंडारण की सभी सुविधाओं से सुसज्जित एकीकृत परिसर होंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रम से जोड़ा जाए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि सभी कृषि विज्ञान केंद्रों को बीज विकास कार्यक्रमों से सीधे जोड़ा जाए, ताकि अनुसंधान, प्रशिक्षण और खेत-स्तर पर तकनीक के प्रसार के बीच सुदृढ़ समन्वय स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि प्रदेश के नौ क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप एक-एक कृषि विज्ञान केंद्र को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाए, जिससे क्षेत्र-विशेष की फसलों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज और तकनीकी समाधान तैयार किए जा सकें। मुख्यमंत्री ने कृषि में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि अधिकाधिक ट्यूबवेलों को सौर ऊर्जीकरण से जोड़ा जाए, जिससे किसानों का सिंचाई खर्च कम हो और कृषि में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़े। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में स्थापित सोलर पैनल इकाइयों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिलने से रोजगार, निवेश और कृषि अवसंरचना को मजबूती मिलेगी।