
कैबिनेट...उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से अलग हुआ खाद्य प्रसंस्करण, कैबिनेट ने दी मंजूरी
संक्षेप: Lucknow News - लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण को अब दो अलग-अलग विभागों में बांट दिया
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण को अब दो अलग-अलग विभागों में बांट दिया गया है। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण में से खाद्य प्रसंस्करण विभाग को पृथक विभाग बनाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने शुक्रवार को मंजूरी प्रदान कर दी। इससे अब दोनों विभागों के अलग-अलग निदेशक एवं उनसे नीचे के अधिकारी और स्टाफ होंगे। पिछले दिनों बिना कैबिनेट की मंजूरी के अचानक से खाद्य प्रसंस्करण निदेशक के पद पर पृथक रूप से विभाग की विशेष सचिव को तैनात कर दिए जाने से शासन से लेकर विभाग तक में बवाल मचा हुआ था। इसी बात की चर्चा थी कि बिना नियमावली में संशोधन किए तथा कैबिनेट और सदन की मंजूरी के बिना ही विभाग का बंटवारा कैसे कर दिया गया।

इसको लेकर विभागीय अपर मुख्य सचिव की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे थे। 14 नवम्बर को उप मुख्यमंत्री एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के विभागीय मंत्री केशव प्रसाद मौर्या की पहल पर आए प्रस्ताव को कैबिनेट ने सहमति देकर पूरे विभाद का पटाक्षेप कर दिया। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय से खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय को अलग कर पृथक से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय को स्थापित किया जाएगा ताकि खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके एवं व्यवस्थित धनराशि का समुचित उपयोग हो सके। प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय के लिए स्थान, भवन तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नए पदों के सृजन की अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है। उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023 के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कुल 300 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है। अलग खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय गठित होने से खाद्य प्रसंस्करण से सम्बन्धित योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा एवं व्यवस्थित धनराशि का समुचित उपयोग हो सकेगा, जिसका लाभ प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के उद्यमियों को मिलेगा। अलग खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय गठित होने से खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित योजनाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जा सकेगा, जिसका सीधा लाभ प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के उद्यमियों को अनुदान के रूप में मिलेगा। खाद्य प्रसंस्करण निदेशालय गठित होने से खाद्य प्रसंस्करण से सम्बन्धित योजनाओं के तहत प्रदेश के जनमानस को रोजगार के अवसर प्राप्त होगें।

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