देवरिया, संभल, कौशांबी, बदायूं, गाजियाबाद और वाराणसी में जनशिकायतों में बढ़ोत्तरी पर डीजीपी ने मांगा जवाब
Lucknow News - उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने 12 सितंबर 2025 को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जनसुनवाई, क़ानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और कस्टडी डेथ पर समीक्षा की। उन्होंने शिकायतों...

पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश राजीव कृष्ण द्वारा आज दिनांक 12-9-2025 को सभी जनपदों, कमिश्नरेट, रेंज तथा ज़ोन के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में मुख्यतः पाँच बिंदुओं पर समीक्षा की गई—जनसुनवाई, क़ानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और कस्टडी डेथ। लखनऊ, विशेष संवाददाता पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप जन-शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता न देने पर गाजियाबाद और वाराणसी के पुलिस कमिश्नर और चार जिलों के पुलिस अधीक्षकों से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा है कि जनसुनवाई, कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और हिरासत में मौत के मामलों में गंभीरता से कार्रवाई की जाए।
डीजीपी राजीव कृष्ण शुक्रवार को सभी जिलों के जून, जुलाई और अगस्त के जनशिकायत के निस्तारण की समीक्षा कर रहे थे। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान पाया गया कि 75 में से 56 जनपदों में जन-शिकायतों में कमी आई है जबकि 20 जनपदों में थोड़ी वृद्धि हुई है। इन 20 जनपदों में सर्वाधिक वृद्धि वाले छह जनपदों में शिकायतों के शिथिल पर्यवेक्षण पर डीजीपी राजीव कृष्ण ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए एसपी देवरिया, संभल, कौशांबी, बदायूं व पुलिस आयुक्त ग़ाज़ियाबाद एवं वाराणसी के स्पष्टीकरण प्राप्त करने के निर्देश दिए हैं। डीजीपी ने हर जनपद को अपने उन थानों को चिन्हित कर कार्यवाही करने के निर्देश दिए जहां जन शिकायतों के निस्तारण में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। डीजीपी ने कहा कि जन-शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिकायत आने के कारणों को दूर करना होगा। क्षेत्राधिकारियों को जन-शिकायतों के निस्तारण में सक्रिय भूमिका निभानी होगी और जन-शिकायतों के निस्तारण में फ़ोकस्ड दृष्टिकोण की जरूरत है। झांसी, लखनऊ, जौनपुर, कानपुर व आगरा पुलिस के खिलाफ ज्यादा शिकायतें डीजीपी ने पुलिस कर्मियों के विरुद्ध प्राप्त शिकायती प्रार्थना पत्रों की भी समीक्षा की, जिसमें झांसी, बहराइच, लखनऊ, जौनपुर, कानपुर और आगरा में सबसे अधिक शिकायतें मिलीं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन पुलिस कर्मियों के विरुद्ध सर्वाधिक शिकायतें हैं, उन्हें चिन्हित कर सभी मामलों की सूची तैयार की जाए और पुलिस प्रभारी स्वयं उनका अनुसरण करें। शिकायत सही पाए जाने पर पुलिस अधिकारी से एक स्तर उच्च स्तर का कोई अधिकारी शिकायतकर्ता से व्यक्तिगत वार्ता करें और पुष्टि होने पर दोषी पुलिसकर्मी के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई करे। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि जन-शिकायतों से जुड़े मामलों में पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार हो, अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, और किसी मुद्दे पर आक्रोशित व्यक्तियों से संवेदनशीलता से धैर्यपूर्वक वार्ता कर समस्या का समाधान निकाला जाए। उन्होंने हिरासत में मौत के प्रकरणों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि इन प्रकरणों में जीरो टालरेंस सुनिश्चित किया जाए। महिला सुरक्षा के संबंध में पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए कि छेड़खानी, घरेलू हिंसा आदि जैसे प्रकरणों को भी अत्यंत गंभीरता से लेते हुए थाने स्तर पर इनके त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करें। क्षेत्राधिकारी स्तर पर पीड़िता से वार्ता कर छोटे से छोटे मामलों में भी एफआईआर दर्ज की जाए। घटना के बाद पीड़िता की काउंसलिंग, वन स्टॉप सेंटर और ट्रॉमा हैंडलिंग के लिए जनपदीय पुलिस प्रभारी योजना बनाएँ। अपर पुलिस महानिदेशक (क़ानून-व्यवस्था) अमिताभ यश ने आगामी त्योहारों में शांति समिति बैठकों द्वारा विवादों के निस्तारण, त्यौहारों के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, सोशल मीडिया पर छोटी घटनाओं एवं अफ़वाहों का संज्ञान लेकर तुरंत कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने बताया कि महिला अपराध के हॉट स्पॉट चिन्हित कर वहाँ सीसीटीवी लगाए जाएँ तथा बालिकाओं के स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, मॉल और बाज़ार क्षेत्रों को कैमरों से पूर्णतः आच्छादित किया जाए।
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