विदेश में बढ़ाई जाएगी यूपी में बनी शराब की खपत
Lucknow News - - आबकारी निर्यात नीति लागू करने वाला पहला राज्य बना उत्तर प्रदेश - तीन

लखनऊ, विशेष संवाददाता यूपी में बनी शराब की विदेश में बिक्री बढ़ाने के लिए सरकार ने पहली बार आबकारी निर्यात नीति को मंजूरी दी है। यह कदम उठाने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य है। नीति को तीन वित्तीय वर्षों के लिए लागू करने का निर्णय किया गया है। कैबिनेट ने इसके साथ ही नई आबकारी नीति को भी स्वीकृति प्रदान की है। आबकारी निर्यात नीति के तहत निर्धारित पेय क्षमता के 25 प्रतिशत तक के समतुल्य किए जाने वाले निर्यात के लिए बोतल भराई शुल्क, निर्यात पास फीस, फ्रैंचाइजी फीस और स्पेशल फीस की दरों को न्यूनतम स्तर तक कम कर दिया गया है।
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह लक्ष्य वर्तमान वित्तीय वर्ष से लगभग आठ हजार करोड़ रुपये अधिक है। बढ़े हुए राजस्व लक्ष्य को पूरा करने के लिए आबकारी विभाग शराब के निर्यात पर फोकस करेगा। इन्वेस्ट यूपी जल्द आबकारी निवेशक शिखर सम्मेलन भी करेगा। खासकर सिंगल माल्ट स्काच का उत्पादन व निर्यात बढ़ाने के लिए आधा दर्जन से अधिक कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। वर्तमान में केवल दो कंपनियां रेडिको खेतान व मोहन मीकिंस की बनी सिंगल माल्ट शराब का विदेश में निर्यात होता है। ईएनए (एक्ट्रा न्यूट्रल एल्कोहल) के निर्यात को भी बढ़ावा दिया जाएगा। ईएनए की निर्यात फीस प्रति बल्क लीटर 0.50 रुपये प्रति बल्क लीटर की कमी की गई है। ----- बढ़ेगी वाइन की बिक्री वाइन की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए पहली बार साकेंतिक रूप से 0.1 प्रतिशत ड्यूटी भी लगाई गई है। इससे स्थानीय अनाज और फल उत्पादकों को भी लाभ होगा। निर्यात नीति से डिस्टिलरी, पैकेजिंग, लाजिस्टिक्स का विस्तार भी किया जाएगा, जिससे रोजगार भी सृजित होगा। निर्यात किये जाने वाले मदिरा ब्रांडों के ब्रांड पंजीकरण और लेबिल अनुमोदन के प्राविधानों को भी सरल कर फीस की दरों को न्यूनतम स्तर तक कम किया गया है। ------- देशी शराब के बढ़ेंगे दाम वित्तीय वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति में राजस्व वसूली का लक्ष्य बढ़ाने का असर देशी शराब के दामों पर पड़ेगा। देशी शराब में पांच रुपये तक की वृद्धि हो सकती है। देशी शराब के लिए नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत व ग्रामीण क्षेत्र में अलग-अलग चार से आठ प्रतिशत तक कोटे में वृद्धि की गई है। शहरों में देशी शराब की खपत कम होने से ग्रामीण क्षेत्र का सर्वाधिक आठ प्रतिशत कोटा बढ़ाया गया है। विदेशी शराब (कंपोजिट शाप) के कोटे में 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। नई नीति में थोक विक्रेताओं का एकाधिकार कम करने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। अन्य कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
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